13 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र में अवैध फ्लैटों की रजिस्ट्री पर रोक, फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला

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महाराष्ट्र में अवैध फ्लैटों की रजिस्ट्री पर रोक, फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने अवैध निर्माण पर एक ऐतिहासिक लगाम लगाई है — अब बिना मंजूर नक्शे और जरूरी प्रमाणपत्रों के किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं होगी। यह फैसला उन लाखों खरीदारों की सुरक्षा के लिए है जो वर्षों से अवैध निर्माण की चपेट में आकर ठगे जाते रहे हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 से अनधिकृत निर्माण वाले फ्लैटों की रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नया सर्कुलर जारी किया।
22 सितंबर 2026 की बैठक में उजागर हुआ कि बिना अनुमति निर्माण कर फ्लैट बेचे जा रहे थे।
रजिस्ट्री के लिए रेरा सर्टिफिकेट / ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और मंजूर नक्शा अनिवार्य होगा।
नियमों का उल्लंघन करने वाले सब-रजिस्ट्रार के विरुद्ध विभागीय जाँच का प्रावधान।

महाराष्ट्र सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 से राज्य में अनधिकृत निर्माण से जुड़े फ्लैटों की रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह निर्णय लिया और सरकार ने इस संबंध में एक नया सर्कुलर जारी किया है। यह कदम फ्लैट खरीदारों को अवैध निर्माण की वजह से होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्या बदला है: नए निर्देशों का विस्तार

नए सरकारी सर्कुलर के अनुसार, नियमों के विरुद्ध बने फ्लैटों की पहली बिक्री के एग्रीमेंट, खरीद-बिक्री दस्तावेज, डीड ऑफ अपार्टमेंट और ट्रांसफर डीड — इनमें से किसी की भी रजिस्ट्री नहीं होगी। इसके साथ ही, जिन इमारतों में मंजूर नक्शे में तय क्षेत्रफल से अधिक निर्माण किया गया है, उन फ्लैटों की रजिस्ट्री भी वर्जित रहेगी।

यह नियम तब लागू होगा जब दस्तावेज में दर्ज फ्लैट का क्षेत्रफल, मंजूर प्लान में उल्लिखित क्षेत्रफल से किसी भी स्थिति में अधिक हो।

मुख्य घटनाक्रम: कब और क्यों लिया गया यह फैसला

राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में 22 सितंबर 2026 को हुई एक अहम बैठक में यह तथ्य उजागर हुआ था कि राज्य के कई हिस्सों में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के निर्माण परियोजनाएँ खड़ी की जा रही हैं और उनमें फ्लैट बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा, मंजूर नक्शे से अधिक क्षेत्रफल वाले फ्लैटों की भी बिक्री हो रही थी। इस व्यापक गड़बड़ी की वजह से खरीदारों को बड़े पैमाने पर आर्थिक ठगी का सामना करना पड़ रहा था।

दस्तावेज़ीकरण की नई शर्तें

सरकार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्री के लिए कागजात की दो श्रेणियाँ होंगी। पहली: यदि परियोजना रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 की धारा 3 के तहत महाराष्ट्र रेरा (MahaRERA) में पंजीकृत है, तो रेरा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अथवा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और प्राधिकारी द्वारा मंजूर नक्शा — जिसमें फ्लैट का क्षेत्रफल स्पष्ट अंकित हो — जमा करना अनिवार्य होगा।

दूसरी: यदि रेरा पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है, तो सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त निर्माण अनुमति / कमेंसमेंट सर्टिफिकेट, मंजूर नक्शा, जोन सर्टिफिकेट और मोजणी नक्शा लगाना अनिवार्य होगा।

सब-रजिस्ट्रारों पर जवाबदेही

राज्य के सभी सब-रजिस्ट्रार अधिकारियों को इस संदर्भ में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार जानबूझकर इन निर्देशों की अवहेलना करते हुए अवैध निर्माण के दस्तावेजों की रजिस्ट्री करता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय जाँच शुरू की जाएगी। यह प्रावधान इस नीति को कागज़ी आदेश से आगे ले जाकर एक प्रवर्तन-केंद्रित ढाँचे में बदलता है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

गौरतलब है कि महाराष्ट्र — विशेषकर मुंबई, पुणे और नाशिक — में अवैध निर्माण की शिकायतें लंबे समय से चली आ रही हैं। यह कदम उन लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राहत लेकर आ सकता है, जो अपनी जमा-पूँजी से फ्लैट खरीदते समय कागजों की जाँच कर पाने में असमर्थ होते हैं। अब आगे देखना होगा कि जमीनी स्तर पर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय इस सर्कुलर का कितना प्रभावी क्रियान्वयन करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों पर दबाव और भ्रष्टाचार की शिकायतें नई नहीं हैं। मुंबई जैसे शहरों में जहाँ रियल एस्टेट में हजारों करोड़ का कारोबार होता है, वहाँ बिल्डर लॉबी के प्रभाव में नियमों को दरकिनार करने की आशंका बनी रहती है। जवाबदेही तब ठोस होगी जब विभागीय जाँच के प्रावधान को केवल कागजी धमकी न रहने दिया जाए। खरीदारों की सुरक्षा का यह संकल्प तभी सार्थक होगा जब सत्यापन तंत्र डिजिटल, पारदर्शी और स्वतंत्र हो।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में अवैध फ्लैटों की रजिस्ट्री पर रोक क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 से उन फ्लैटों की रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है जो बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बने हैं या जिनका क्षेत्रफल मंजूर नक्शे से अधिक है। इसमें पहली बिक्री एग्रीमेंट, खरीद-बिक्री दस्तावेज, डीड ऑफ अपार्टमेंट और ट्रांसफर डीड सभी शामिल हैं।
यह फैसला क्यों लिया गया?
22 सितंबर 2026 को राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में सामने आया कि राज्य के कई हिस्सों में बिना अनुमति निर्माण कर फ्लैट बेचे जा रहे थे, और मंजूर नक्शे से अधिक एरिया वाले फ्लैट भी खरीदारों को बेचे जा रहे थे। इससे फ्लैट खरीदारों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हो रहा था।
रजिस्ट्री के लिए अब कौन-से दस्तावेज जरूरी होंगे?
यदि परियोजना महाराष्ट्र रेरा में पंजीकृत है, तो रेरा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और मंजूर नक्शा अनिवार्य होगा। यदि रेरा पंजीकरण की जरूरत नहीं है, तो निर्माण अनुमति / कमेंसमेंट सर्टिफिकेट, मंजूर नक्शा, जोन सर्टिफिकेट और मोजणी नक्शा जमा करना होगा।
नियम न मानने वाले सब-रजिस्ट्रार पर क्या कार्रवाई होगी?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार जानबूझकर इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए अवैध निर्माण के दस्तावेज रजिस्टर करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की जाएगी।
इस फैसले से फ्लैट खरीदारों को क्या फायदा होगा?
अब बिना वैध दस्तावेज के कोई भी फ्लैट कानूनी रूप से पंजीकृत नहीं हो सकेगा, जिससे खरीदार अवैध निर्माण में फँसने से बचेंगे। यह नीति विशेष रूप से मुंबई, पुणे जैसे महँगे बाजारों में उन मध्यमवर्गीय परिवारों की सुरक्षा करेगी जो अपनी जमा-पूँजी से फ्लैट खरीदते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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