11 अगस्त 2026
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महासमुंद: शिवालिक इंजीनियरिंग कर्मचारी रमेश जांगड़े की मौत पर परिजनों का धरना, फैक्ट्री प्रबंधन से मिला मुआवज़ा

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महासमुंद: शिवालिक इंजीनियरिंग कर्मचारी रमेश जांगड़े की मौत पर परिजनों का धरना, फैक्ट्री प्रबंधन से मिला मुआवज़ा

सारांश

महासमुंद के ग्राम मुढेना में एक कारखाने की लापरवाही ने एक परिवार को तोड़ दिया — रमेश जांगड़े, जो पत्नी और चार बच्चों के एकमात्र सहारे थे, आँख में लोहे का टुकड़ा पड़ने के तीन महीने बाद चल बसे। परिजनों के धरने के बाद प्रबंधन ने आजीवन वेतन और बच्चों की शिक्षा की ज़िम्मेदारी ली, लेकिन सुरक्षा जाँच अभी बाकी है।

मुख्य बातें

रमेश जांगड़े , शिवालिक इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कर्मचारी, की 22 जून को उपचार के दौरान मृत्यु हुई।
22 मार्च को रात की ड्यूटी में आँख में लोहे का टुकड़ा पड़ने से संक्रमण हुआ और वे लकवाग्रस्त हो गए।
परिजनों और ग्रामीणों ने फैक्ट्री के सामने शव रखकर धरना दिया और क्षतिपूर्ति की माँग की।
समझौते के तहत प्रबंधन मृतक की पत्नी को आजीवन वेतन और बच्चों की शिक्षा की ज़िम्मेदारी उठाएगा।
पत्नी की मृत्यु की स्थिति में बच्चों को 24 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह वेतन मिलेगा।
फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों की जाँच के लिए संबंधित विभाग को सूचित किया गया है।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ग्राम मुढेना स्थित शिवालिक इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कार्यरत कर्मचारी रमेश जांगड़े की 22 जून को उपचार के दौरान मृत्यु हो जाने के बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों ने शव को फैक्ट्री के सामने रखकर धरना-प्रदर्शन किया। परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उचित क्षतिपूर्ति की माँग की।

कैसे हुई घटना

मृतक के भाई राम नारायण जांगड़े के अनुसार, 22 मार्च को रात की ड्यूटी के दौरान रमेश जांगड़े की आँख में लोहे का एक टुकड़ा पड़ गया, जिससे सूजन आ गई। फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें राम कृष्ण केयर हॉस्पिटल में उपचार के लिए भेजा। कुछ दिनों बाद आँख में संक्रमण फैल गया और रमेश लकवाग्रस्त हो गए। लंबे उपचार के बावजूद 22 जून को उनकी मृत्यु हो गई।

परिजनों का आक्रोश और धरना

रमेश परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी और चार बच्चे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव को फैक्ट्री के सामने रखकर धरने पर बैठ गए और क्षतिपूर्ति की माँग करने लगे।

प्रशासन का हस्तक्षेप

माहौल बिगड़ता देख प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल और तहसीलदार जुगल किशोर पटेल को भेजा। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच बातचीत हुई।

समझौते की शर्तें

तहसीलदार जुगल किशोर पटेल ने बताया कि प्रबंधन और परिजनों के बीच समझौता हो गया है। इसके तहत फैक्ट्री प्रबंधन रमेश जांगड़े की पत्नी को आजीवन उनका वेतन देगा और बच्चों की शिक्षा की ज़िम्मेदारी भी उठाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि किसी कारणवश पत्नी की भी मृत्यु हो जाती है, तो बच्चों को 24 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। समझौते के बाद परिजन शव लेकर अपने गाँव रवाना हो गए, जहाँ विधिवत अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सुरक्षा जाँच और आगे की कार्रवाई

तहसीलदार पटेल ने बताया कि फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोपों को लेकर संबंधित विभाग को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया गया है। एक टीम फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की विधिवत जाँच करेगी। यह मामला औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुरक्षा की अनदेखी के व्यापक सवाल को एक बार फिर सामने लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस व्यापक लापरवाही का प्रतीक है जो असंगठित और अर्ध-संगठित औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के साथ अक्सर होती है। परिवार को 'आजीवन वेतन' का वादा राहत देता है, लेकिन यह समझौता अदालत के बाहर हुआ — बिना किसी कानूनी बाध्यता के, जिससे भविष्य में इसके पालन पर सवाल उठ सकते हैं। फैक्ट्री में सुरक्षा जाँच की घोषणा सकारात्मक है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या इसके नतीजे सार्वजनिक होंगे और दोषियों पर कार्रवाई होगी — या यह भी फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रमेश जांगड़े की मौत कैसे हुई?
रमेश जांगड़े, महासमुंद के ग्राम मुढेना स्थित शिवालिक इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज में कार्यरत थे। 22 मार्च को रात की ड्यूटी के दौरान उनकी आँख में लोहे का टुकड़ा पड़ गया, जिससे संक्रमण फैला और वे लकवाग्रस्त हो गए। लंबे उपचार के बाद 22 जून को उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों ने फैक्ट्री के सामने धरना क्यों दिया?
रमेश परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनके पीछे पत्नी व चार बच्चे हैं। परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया और उचित क्षतिपूर्ति की माँग को लेकर शव फैक्ट्री के सामने रखकर धरने पर बैठ गए।
फैक्ट्री प्रबंधन और परिजनों के बीच क्या समझौता हुआ?
तहसीलदार जुगल किशोर पटेल की मध्यस्थता में हुए समझौते के तहत प्रबंधन मृतक की पत्नी को आजीवन वेतन देगा और बच्चों की शिक्षा की ज़िम्मेदारी उठाएगा। यदि पत्नी की भी मृत्यु हो जाती है, तो बच्चों को 24 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह वेतन मिलता रहेगा।
फैक्ट्री में सुरक्षा जाँच को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं?
परिजनों के आरोपों के बाद संबंधित विभाग को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया है। एक टीम फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की विधिवत जाँच करेगी। जाँच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना में प्रशासन की क्या भूमिका रही?
धरने के बाद माहौल बिगड़ता देख प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल और तहसीलदार जुगल किशोर पटेल को भेजा। उनकी मध्यस्थता में फैक्ट्री प्रबंधन और परिजनों के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद परिजन शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए गाँव रवाना हो गए।
राष्ट्र प्रेस
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