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मेजर अभिलाषा बराक को यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड, PM मोदी ने बताया करोड़ों बेटियों की प्रेरणा

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मेजर अभिलाषा बराक को यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड, PM मोदी ने बताया करोड़ों बेटियों की प्रेरणा

सारांश

भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट मेजर अभिलाषा बराक को यूएन का प्रतिष्ठित मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड मिला है — यह सम्मान पाने वाली वे भारत की तीसरी महिला अधिकारी हैं। लेबनान के सबसे जोखिमभरे शांति मिशन में तैनात बराक की उपलब्धि पर PM मोदी ने कहा — यह हर उस बेटी की प्रेरणा है जो देश सेवा का सपना देखती है।

मुख्य बातें

मेजर अभिलाषा बराक को 'संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया।
वे भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं और यह पुरस्कार पाने वाली तीसरी भारतीय महिला अधिकारी हैं।
PM नरेंद्र मोदी ने 7 जून 2026 को एक्स पर बधाई देते हुए इसे भारतीय बेटियों के लिए प्रेरणा बताया।
मेजर बराक लेबनान में यूएनआईएफआईएल के तहत एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में तैनात हैं।
उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है।
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उन्हें 'सेवा और साथियों के लिए आदर्श' बताया।

भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट मेजर अभिलाषा बराक को प्रतिष्ठित 'संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड 2025' से सम्मानित किया गया है। 7 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उन लाखों भारतीय बेटियों के लिए प्रेरणा है जो देश और मानवता की सेवा का सपना देखती हैं।

पुरस्कार और मेजर बराक की भूमिका

मेजर बराक फिलहाल लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के अंतर्गत भारतीय बटालियन के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में सेवारत हैं। यह मिशन इजरायल-लेबनान सीमा पर तैनात है और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के सबसे जोखिमभरे शांति अभियानों में गिना जाता है। यह पुरस्कार उन्हें शांति मिशन में महिलाओं की भूमिका को सशक्त करने और समावेशी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया।

PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड मिलने पर बधाई। मेजर बराक लेबनान में यूएनआईएफआईएल के तहत एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में सेवा दे रही हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'यह सम्मान उनकी बेहतरीन सेवा को दर्शाता है और साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत के लंबे योगदान को भी दिखाता है। उनकी यह उपलब्धि कई भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है, खासकर उन बेटियों के लिए जो देश और मानवता की सेवा करना चाहती हैं।'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की सराहना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुरस्कार प्रदान करते हुए मेजर बराक को 'उन लोगों के लिए एक आदर्श' बताया जिनकी वे सेवा करती हैं और जिनके साथ वे काम करती हैं। गुटेरेस ने यह भी रेखांकित किया कि मेजर बराक ने स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास कायम कर शुरुआती अलर्ट नेटवर्क बनाने में मदद की, जिससे नागरिकों की सुरक्षा मजबूत हुई। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव लिसा बटेनहेम ने भी कहा कि मेजर बराक के नेतृत्व और नवाचारी तरीकों ने सैन्य अभियानों में महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे को नई दिशा दी है।

ज़मीनी काम और सामुदायिक प्रभाव

एक फ्रंटलाइन कमांडर के रूप में मेजर बराक ने हजारों महिलाओं और लड़कियों को कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, 'सपनों का कोई जेंडर नहीं होता, और न ही नेतृत्व, साहस या मानवता की सेवा करने की इच्छाशक्ति का कोई जेंडर होता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह पुरस्कार इस बात की याद दिलाता है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब हर आवाज़ सुनी जाए और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिले।

भारत की तीसरी सम्मानित अधिकारी

गौरतलब है कि मेजर बराक यह पुरस्कार पाने वाली भारत की तीसरी महिला सैन्य अधिकारी हैं। उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है। भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट होने के नाते मेजर बराक ने खुद कहा, 'जब अवसर मिलता है तो महिलाएं हर बाधा को पार कर सकती हैं और बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं।' यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत की दशकों पुरानी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। आने वाले समय में यह उम्मीद की जा रही है कि इस मान्यता से भारतीय महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय शांति मिशनों में भागीदारी और बढ़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर घरेलू स्तर पर महिला सैन्य भर्ती के आँकड़े अभी भी बेहद कम हैं। असली सवाल यह है कि क्या ये प्रतीकात्मक मान्यताएं नीतिगत त्वरण में बदलेंगी — या सिर्फ प्रेरणादायक सुर्खियों तक सीमित रहेंगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेजर अभिलाषा बराक को कौन सा पुरस्कार मिला है?
मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र का 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' मिला है। यह पुरस्कार उन्हें लेबनान में यूएनआईएफआईएल मिशन के दौरान महिलाओं की भूमिका को सशक्त करने और सामुदायिक सुरक्षा में योगदान के लिए दिया गया।
मेजर अभिलाषा बराक कौन हैं?
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं। वे वर्तमान में लेबनान में यूएनआईएफआईएल के तहत भारतीय बटालियन के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में तैनात हैं।
PM मोदी ने मेजर बराक के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह सम्मान मेजर बराक की बेहतरीन सेवा और यूएन शांति मिशन में भारत के लंबे योगदान को दर्शाता है। उन्होंने इसे भारतीय युवाओं, खासकर उन बेटियों के लिए प्रेरणा बताया जो देश और मानवता की सेवा करना चाहती हैं।
यह पुरस्कार पाने वाली पहले कौन-सी भारतीय महिला अधिकारी थीं?
मेजर अभिलाषा बराक यह पुरस्कार पाने वाली भारत की तीसरी महिला सैन्य अधिकारी हैं। उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है।
यूएनआईएफआईएल मिशन क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यूएनआईएफआईएल (संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल) इजरायल और लेबनान की सीमा पर तैनात संयुक्त राष्ट्र का शांति मिशन है। इसे वर्तमान में यूएन के सबसे जोखिमभरे शांति अभियानों में माना जाता है, और भारत इसमें दशकों से महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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