27 जुलाई 2026
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ममता बनर्जी की अनुपस्थिति में CID का आवास-तलाशी अभियान, TMC विधायक कुणाल घोष ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

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ममता बनर्जी की अनुपस्थिति में CID का आवास-तलाशी अभियान, TMC विधायक कुणाल घोष ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

सारांश

ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे पर रहते उनके कोलकाता आवास पर CID की दो घंटे की तलाशी ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। TMC विधायक कुणाल घोष ने इसे 'डर का माहौल बनाने की कोशिश' बताया और कहा कि इससे 'बंगाल की शेरनी' को डराया नहीं जा सकता।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 9 जून को ममता बनर्जी के कोलकाता आवास पर करीब दो घंटे तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के समय ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर थीं और उनका कार्यक्रम पहले से सार्वजनिक था।
TMC विधायक कुणाल घोष ने इस कार्रवाई को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि यह जाँच नहीं, डर का माहौल बनाने की कोशिश है।
घोष के अनुसार, जब तक ममता बनर्जी घर पर थीं, कोई कार्रवाई नहीं हुई — दिल्ली जाने के बाद अचानक यह कदम उठाया गया।
सीआईडी की तलाशी का उद्देश्य और आगे की कार्रवाई अभी तक स्पष्ट नहीं है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर सीआईडी (CID) ने मंगलवार, 9 जून को करीब दो घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर थीं और उनके आवास पर उनकी मौजूदगी नहीं थी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने पूरे घटनाक्रम को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी का दिल्ली दौरे पर होना पहले से सार्वजनिक जानकारी थी। उनके अनुसार, जब तक ममता बनर्जी कोलकाता में अपने घर पर थीं, तब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई — लेकिन उनके दिल्ली रवाना होते ही इस तरह का माहौल बनाया जाने लगा। घोष ने यह भी कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सीआईडी वहाँ वास्तव में क्या कर रही थी।

कुणाल घोष की प्रतिक्रिया

घोष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसे प्रशासन का कोई साहसिक कदम नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, 'जब ममता बनर्जी घर पर ही नहीं हैं, तब उनके आवास पर इस तरह की गतिविधियाँ करना उचित नहीं है और इससे गलत संदेश जाता है।' उनके मुताबिक, ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो यह दिखाने की कोशिश हो कि पुलिस ममता बनर्जी के घर तक पहुँच सकती है।

जाँच बनाम डर का माहौल

घोष ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के पीछे जाँच से ज़्यादा 'डर और नकारात्मक माहौल' बनाने की मंशा दिखती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब जाँच एजेंसियाँ ममता बनर्जी के पास पहले आई थीं, तब उन्होंने पूरा सहयोग किया था, क्योंकि वह कानून का सम्मान करने वाली नागरिक हैं। घोष ने यह भी जोड़ा कि इस तरह के कदमों से ममता बनर्जी को डराया नहीं जा सकता।

घोष का मौके पर पहुँचना

घोष ने बताया कि वह किसी अन्य काम के सिलसिले में पिछली रात कोलकाता आए थे और फॉलो-अप के लिए दोबारा पहुँचे थे। इसी दौरान उन्हें सीआईडी की तलाशी की सूचना मिली। उनके सामने दो विकल्प थे — वापस लौट जाएँ या मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लें। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना और घटनास्थल पर पहुँचकर पूरी जानकारी ली।

आगे क्या

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि राज्य की जाँच एजेंसियों की कार्रवाई और विपक्षी नेताओं के आवासों पर छापेमारी को लेकर बंगाल की राजनीति में लंबे समय से विवाद रहा है। सीआईडी की इस तलाशी के पीछे की वजह और आगे की कार्रवाई अभी स्पष्ट नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संदेश की तरह पढ़ी जा रही है — और TMC की तीखी प्रतिक्रिया इसी पाठ की पुष्टि करती है। सवाल यह है कि जब तलाशी का उद्देश्य सार्वजनिक नहीं किया गया, तो पारदर्शिता किसकी? पश्चिम बंगाल में जाँच एजेंसियों का राजनीतिकरण कोई नई बात नहीं — लेकिन विपक्षी नेता के घर पर उनकी अनुपस्थिति में छापा, बिना स्पष्ट कारण बताए, संस्थागत विश्वसनीयता को और कमज़ोर करता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी के आवास पर CID की तलाशी क्यों हुई?
9 जून को CID ने ममता बनर्जी के कोलकाता आवास पर करीब दो घंटे तलाशी अभियान चलाया, लेकिन अब तक इस कार्रवाई का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। TMC विधायक कुणाल घोष के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि सीआईडी वहाँ क्या कर रही थी।
तलाशी के समय ममता बनर्जी कहाँ थीं?
तलाशी के वक्त ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर थीं और उनका कार्यक्रम पहले से सार्वजनिक था। कुणाल घोष ने इसी बात को आधार बनाते हुए कहा कि उनकी अनुपस्थिति में यह कार्रवाई करना उचित नहीं है।
कुणाल घोष ने CID की कार्रवाई पर क्या कहा?
TMC विधायक कुणाल घोष ने इस कार्रवाई को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि इसे प्रशासन का साहसिक कदम नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार, यह जाँच से ज़्यादा डर और नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश है।
क्या ममता बनर्जी ने पहले जाँच एजेंसियों का सहयोग किया था?
कुणाल घोष के अनुसार, जब जाँच एजेंसियाँ पहले ममता बनर्जी के पास आई थीं, तब उन्होंने पूरा सहयोग किया था, क्योंकि वह कानून का सम्मान करने वाली नागरिक हैं। घोष ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस बार की कार्रवाई की प्रकृति अलग और संदिग्ध है।
इस घटना का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है। राज्य की जाँच एजेंसियों की कार्रवाई और विपक्षी नेताओं के आवासों पर छापेमारी को लेकर बंगाल की राजनीति में लंबे समय से विवाद चलता रहा है। आगे की कार्रवाई और सीआईडी का आधिकारिक बयान अभी प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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