मणिकम टैगोर का डीएमके पर निशाना: भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून-व्यवस्था से हुई हार, वोटर लिस्ट नहीं
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने 12 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की चुनावी पराजय के लिए भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और गठबंधन सहयोगियों के साथ दुर्व्यवहार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस दावे को सिरे से खारिज किया कि 2026 के विधानसभा चुनावों और हालिया उपचुनावों में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
स्टालिन के दावों से टकराव
टैगोर ने अपनी पोस्ट में 21 फरवरी को मदुरै में दक्षिणी जोन के पोलिंग स्टेशन कमेटी सदस्यों के लिए आयोजित प्रशिक्षण सम्मेलन का हवाला दिया। उस सम्मेलन में DMK अध्यक्ष और तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने स्वयं कहा था कि पार्टी ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान तमिलनाडु में किसी भी मतदाता का नाम न हटाए जाने के लिए अथक प्रयास किए थे।
स्टालिन ने उस अवसर पर पार्टी के 75,032 बूथ-लेवल एजेंट, 5.5 लाख पोलिंग स्टेशन कमेटी सदस्य और 75,032 डिजिटल एजेंट के विशाल नेटवर्क का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि यह संगठनात्मक मजबूती विधानसभा चुनावों में जीत सुनिश्चित करेगी। टैगोर ने इसी आधार पर तीखा सवाल उठाया कि पार्टी मतदान से पहले प्रक्रिया को सफल बता रही थी और परिणाम प्रतिकूल आने पर उसी प्रक्रिया पर दोष मढ़ रही है — यह दोनों बातें एक साथ सच नहीं हो सकतीं।
ज्ञापन और अन्य राज्यों से तुलना
टैगोर ने राष्ट्रपति को सौंपे गए एक ज्ञापन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस ज्ञापन की चौथी माँग में केवल उन्हीं राज्यों में चुनाव रद्द करने की बात थी जहाँ वोट चोरी के ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हों।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटर लिस्ट से नाम हटाने और चुनावी गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं, किंतु तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में SIR को लेकर इस प्रकार की कोई शिकायत सामने नहीं आई। यह तुलना यह स्थापित करने के लिए की गई कि DMK का तर्क तथ्यात्मक रूप से टिकाऊ नहीं है।
हार के असली कारण: टैगोर का विश्लेषण
कांग्रेस नेता ने DMK को आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी। उनके अनुसार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकामी, महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ और गठबंधन सहयोगियों का अपमान — ये वे असली कारण हैं जिनकी वजह से मतदाताओं ने पार्टी को नकारा।
टैगोर ने यह भी उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों में DMK के सांसद शामिल नहीं हुए, जबकि तमिलनाडु की वामपंथी पार्टियों, वीसीके और एमडीएमके के नेताओं ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया और गिरफ्तारी भी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि DMK भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नाराज करने के डर से इन प्रदर्शनों से दूर रही।
DMK को खुली चुनौती
टैगोर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि DMK तमिलनाडु की भलाई, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के प्रति वास्तव में प्रतिबद्ध है, तो उसे ऐसे विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता ऐसी कोई भी सफाई स्वीकार नहीं करेंगे जो वोटर लिस्ट की सुरक्षा के बारे में पार्टी के पूर्व वादों से सीधे तौर पर मेल न खाती हो।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब गठबंधन के भीतर तनाव के संकेत पहले से बढ़ रहे हैं और तमिलनाडु में विपक्षी पुनर्गठन की चर्चा जोर पकड़ रही है।