12 अक्टूबर 2026
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मणिकम टैगोर का डीएमके पर निशाना: भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून-व्यवस्था से हुई हार, वोटर लिस्ट नहीं

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मणिकम टैगोर का डीएमके पर निशाना: भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून-व्यवस्था से हुई हार, वोटर लिस्ट नहीं

सारांश

कांग्रेस के टैगोर ने DMK का वोटर लिस्ट वाला बहाना सीधे स्टालिन के अपने पुराने दावों से काटा — और हार की असली वजह बताई: भ्रष्टाचार, महिला विरोधी टिप्पणियाँ और सहयोगियों का अपमान। गठबंधन के भीतर यह सार्वजनिक जवाबदेही की माँग एक असामान्य और तीखा कदम है।

मुख्य बातें

मणिकम टैगोर ने 12 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर DMK की चुनावी हार के लिए वोटर लिस्ट को नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और खराब शासन को जिम्मेदार ठहराया।
स्टालिन ने 21 फरवरी को मदुरै में स्वयं कहा था कि 75,032 बूथ एजेंट और 5.5 लाख पोलिंग कमेटी सदस्य वोटर लिस्ट की सुरक्षा में सफल रहे।
टैगोर ने कहा कि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में SIR संबंधी कोई शिकायत नहीं आई, जबकि बंगाल, असम, बिहार में आई।
DMK सांसदों के दिल्ली के विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने पर भी सवाल, VCK और MDMK नेताओं की भागीदारी और गिरफ्तारी का उल्लेख।
टैगोर ने BJP को नाराज न करने की DMK की मंशा पर आरोप लगाया और पार्टी को आत्मनिरीक्षण की सलाह दी।

तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष और सांसद मणिकम टैगोर ने 12 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की चुनावी पराजय के लिए भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और गठबंधन सहयोगियों के साथ दुर्व्यवहार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस दावे को सिरे से खारिज किया कि 2026 के विधानसभा चुनावों और हालिया उपचुनावों में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के कारण पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

स्टालिन के दावों से टकराव

टैगोर ने अपनी पोस्ट में 21 फरवरी को मदुरै में दक्षिणी जोन के पोलिंग स्टेशन कमेटी सदस्यों के लिए आयोजित प्रशिक्षण सम्मेलन का हवाला दिया। उस सम्मेलन में DMK अध्यक्ष और तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने स्वयं कहा था कि पार्टी ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के दौरान तमिलनाडु में किसी भी मतदाता का नाम न हटाए जाने के लिए अथक प्रयास किए थे।

स्टालिन ने उस अवसर पर पार्टी के 75,032 बूथ-लेवल एजेंट, 5.5 लाख पोलिंग स्टेशन कमेटी सदस्य और 75,032 डिजिटल एजेंट के विशाल नेटवर्क का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि यह संगठनात्मक मजबूती विधानसभा चुनावों में जीत सुनिश्चित करेगी। टैगोर ने इसी आधार पर तीखा सवाल उठाया कि पार्टी मतदान से पहले प्रक्रिया को सफल बता रही थी और परिणाम प्रतिकूल आने पर उसी प्रक्रिया पर दोष मढ़ रही है — यह दोनों बातें एक साथ सच नहीं हो सकतीं।

ज्ञापन और अन्य राज्यों से तुलना

टैगोर ने राष्ट्रपति को सौंपे गए एक ज्ञापन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस ज्ञापन की चौथी माँग में केवल उन्हीं राज्यों में चुनाव रद्द करने की बात थी जहाँ वोट चोरी के ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हों।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटर लिस्ट से नाम हटाने और चुनावी गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं, किंतु तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में SIR को लेकर इस प्रकार की कोई शिकायत सामने नहीं आई। यह तुलना यह स्थापित करने के लिए की गई कि DMK का तर्क तथ्यात्मक रूप से टिकाऊ नहीं है।

हार के असली कारण: टैगोर का विश्लेषण

कांग्रेस नेता ने DMK को आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दी। उनके अनुसार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकामी, महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ और गठबंधन सहयोगियों का अपमान — ये वे असली कारण हैं जिनकी वजह से मतदाताओं ने पार्टी को नकारा।

टैगोर ने यह भी उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों में DMK के सांसद शामिल नहीं हुए, जबकि तमिलनाडु की वामपंथी पार्टियों, वीसीके और एमडीएमके के नेताओं ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया और गिरफ्तारी भी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि DMK भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नाराज करने के डर से इन प्रदर्शनों से दूर रही।

DMK को खुली चुनौती

टैगोर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि DMK तमिलनाडु की भलाई, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के प्रति वास्तव में प्रतिबद्ध है, तो उसे ऐसे विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मतदाता ऐसी कोई भी सफाई स्वीकार नहीं करेंगे जो वोटर लिस्ट की सुरक्षा के बारे में पार्टी के पूर्व वादों से सीधे तौर पर मेल न खाती हो।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब गठबंधन के भीतर तनाव के संकेत पहले से बढ़ रहे हैं और तमिलनाडु में विपक्षी पुनर्गठन की चर्चा जोर पकड़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब एक सहयोगी दल का नेता दूसरे के आत्म-सेवी तर्क को उसी के शब्दों से काट रहा है। DMK का वोटर लिस्ट वाला बचाव उस क्षण से टकराता है जब स्टालिन ने खुद चुनाव पूर्व संगठनात्मक ताकत का दावा किया था। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक सकती है, वह यह है कि यह विवाद 2026 के बाद तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन के भविष्य और कांग्रेस-DMK समीकरण के लिए एक गहरी दरार का संकेत दे सकता है। BJP-भय का आरोप, यदि सही साबित हुआ, तो DMK की धर्मनिरपेक्ष साख के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिकम टैगोर ने DMK की हार के लिए क्या कारण बताए?
टैगोर ने भ्रष्टाचार के व्यापक आरोप, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकामी, महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ और गठबंधन सहयोगियों के साथ दुर्व्यवहार को DMK की हार का असली कारण बताया। उन्होंने कहा कि इन्हीं वजहों से मतदाताओं ने पार्टी को नकारा।
टैगोर ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के तर्क को क्यों खारिज किया?
टैगोर ने खुद स्टालिन के 21 फरवरी के मदुरै भाषण का हवाला दिया, जिसमें स्टालिन ने कहा था कि DMK के 75,032 बूथ एजेंट और 5.5 लाख पोलिंग कमेटी सदस्यों ने वोटर लिस्ट की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की थी। टैगोर ने कहा कि मतदान से पहले प्रक्रिया को सफल बताना और बाद में उसी पर दोष मढ़ना तार्किक रूप से असंभव है।
तमिलनाडु में SIR (वोटर लिस्ट रिविजन) को लेकर क्या स्थिति है?
टैगोर के अनुसार, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में SIR प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस शिकायत सामने नहीं आई। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटर लिस्ट से नाम हटाने और गड़बड़ी के आरोप लगे।
DMK पर BJP-भय का आरोप किस संदर्भ में लगाया गया?
टैगोर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों में DMK सांसद शामिल नहीं हुए, जबकि VCK और MDMK नेताओं ने भाग लिया और गिरफ्तारी भी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि DMK BJP को नाराज करने से बच रही थी।
इस बयान का तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह बयान कांग्रेस-DMK गठबंधन के भीतर खुली असहमति का संकेत देता है। 2026 के चुनावी नतीजों के बाद टैगोर की यह सार्वजनिक आलोचना दोनों दलों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है और भविष्य के गठबंधन समीकरण पर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्र प्रेस
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