मणिपुर पुलिस का 'ई-मालखाना सिस्टम' लॉन्च, जब्त संपत्ति और सबूत प्रबंधन में आएगी पारदर्शिता
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर पुलिस ने 31 मई 2026 को पुलिस स्टेशन स्तर पर जब्त संपत्तियों और साक्ष्यों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए पहली बार 'ई-मालखाना सिस्टम' लॉन्च किया। यह डिजिटल पहल इंफाल ईस्ट जिले के इरिलबुंग पुलिस स्टेशन से शुरू की गई है, जहाँ पुराने मालखाने को अपग्रेड कर नई प्रणाली के अंतर्गत लाया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य का अब तक का सबसे ठोस तकनीकी प्रयास है।
क्या है ई-मालखाना सिस्टम
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस प्रणाली के तहत केस से जुड़ी हर संपत्ति और प्रदर्शनी (एग्जिबिट) को कैटलॉग कर डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। प्रत्येक वस्तु को एक यूनिक बारकोड दिया जाता है, जिसमें एफआईआर नंबर, संबंधित कानूनी धाराएँ, जाँच अधिकारी का नाम, वस्तु का विवरण, फोटो, वर्तमान स्थिति और निपटान विवरण जैसी जानकारी संग्रहीत होती है।
यह बारकोड संबंधित केस रिकॉर्ड से भी लिंक होता है, जिससे जाँच या न्यायालय की कार्यवाही के दौरान किसी भी समय साक्ष्यों की त्वरित पहचान, सत्यापन और पुनर्प्राप्ति संभव हो जाती है।
किसने की यह पहल
यह पहल इंफाल ईस्ट जिले के पुलिस अधीक्षक शिवानंद सुर्वे और पुलिस अधिकारी पूजा मलानी — दोनों आईपीएस अधिकारी — द्वारा पुलिस अवसंरचना को आधुनिक बनाने और साक्ष्य प्रबंधन पद्धतियों को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रयासों के तहत की गई। अधिकारियों ने कहा कि यह सिस्टम पुलिस स्टेशन प्रशासन में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पुराने तरीकों की कमियाँ और नई प्रणाली का महत्त्व
अधिकारी ने बताया कि चोरी, प्रतिस्थापन, सेंधमारी, गबन और जब्त संपत्ति को नष्ट किए जाने की घटनाएँ — जो प्रायः अवैज्ञानिक भंडारण तरीकों की वजह से होती हैं — कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साख को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में विस्फोटकों सहित खतरनाक सामग्री के गलत भंडारण से मालखानों में दुर्घटनाएँ और विस्फोट तक हो चुके हैं।
गौरतलब है कि 'मालखाना' शब्द फारसी के 'माल' (संपत्ति) और 'खाना' (स्थान) से बना है और यह पुलिस स्टेशन के उस निर्धारित स्थान को इंगित करता है जहाँ जाँच के दौरान जब्त की गई संपत्ति रखी जाती है। ऐसी संपत्तियाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और अन्य विशेष एवं स्थानीय कानूनों के तहत जब्त की जाती हैं।
आम जनता और न्यायिक प्रक्रिया पर असर
अधिकारी के अनुसार, साक्ष्यों और जब्त संपत्तियों का उचित प्रबंधन निष्पक्ष जाँच, सफल अभियोजन और न्याय वितरण प्रणाली की समग्र ईमानदारी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने चेताया कि साक्ष्यों के कुप्रबंधन से आपराधिक मामलों में अभियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे कानूनी जटिलताएँ, संस्थागत जवाबदेही और जन-विश्वास में कमी आती है।
आगे की राह
फिलहाल यह प्रणाली इरिलबुंग पुलिस स्टेशन में पायलट आधार पर लागू की गई है। यदि यह पहल सफल रही, तो इसे मणिपुर के अन्य पुलिस स्टेशनों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में पुलिस सुधारों और डिजिटल गवर्नेंस को लेकर चर्चा तेज़ हो रही है।