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डिजिटल इंडिया के 11 साल: भागलपुर SSP प्रमोद कुमार यादव बोले — AI से पुलिसिंग हुई स्मार्ट, अपराधी पहचान अब आसान

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डिजिटल इंडिया के 11 साल: भागलपुर SSP प्रमोद कुमार यादव बोले — AI से पुलिसिंग हुई स्मार्ट, अपराधी पहचान अब आसान

सारांश

डिजिटल इंडिया के 11 साल — भागलपुर पुलिस के लिए यह महज़ एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि ज़मीनी बदलाव की कहानी है। AI, CCTNS और ई-ऑफिस ने अपराधी पहचान से लेकर जन-शिकायत निवारण तक की रफ़्तार बदल दी है।

मुख्य बातें

भागलपुर SSP प्रमोद कुमार यादव ने 1 जुलाई 2025 को डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष पूरे होने पर पुलिसिंग में तकनीकी बदलावों की जानकारी दी।
ई-ऑफिस प्रणाली एसपी से एसएचओ स्तर तक विस्तारित; HRMS और CCTNS पोर्टल से प्रशासनिक व अपराध डेटा प्रबंधन ऑनलाइन।
भागलपुर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बड़ी संख्या में कैमरे लगाए गए; AI जनरेटेड कैमरा तकनीक पर काम जारी।
डिजिटल ऐप्स से देशभर में पकड़े अपराधियों की तत्काल पहचान और अन्य राज्यों से ऑनलाइन सत्यापन संभव।
एसपी कार्यालय के 30 से 40 प्रतिशत कर्मियों को कंप्यूटर व ई-ऑफिस प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
बिहार सरकार के सहयोग पोर्टल से नागरिकों की शिकायतों का ऑनलाइन निवारण।

भागलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने 1 जुलाई 2025 को कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के 11 वर्ष पूरे होने पर पुलिसिंग और अपराध अनुसंधान में तकनीक की भूमिका गुणात्मक रूप से बदल चुकी है। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑनलाइन पोर्टलों के व्यापक उपयोग से भागलपुर पुलिस की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

पुलिस विभाग में डिजिटल बदलाव

SSP यादव ने बताया कि पुलिस विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली तेज़ी से पाँव पसार रही है। एसपी कार्यालय से लेकर एसडीपीओ और एसएचओ स्तर तक अनेक प्रकार के आवेदन और कार्यालयी कार्य अब ऑनलाइन निपटाए जा रहे हैं। HRMS (मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली) सहित विभाग के कई प्रशासनिक काम डिजिटल हो चुके हैं। इसके अलावा, CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) और अन्य पोर्टलों के ज़रिए अपराध संबंधी डेटा का प्रबंधन निरंतर किया जा रहा है।

AI और स्मार्ट कैमरों से अपराध नियंत्रण

SSP ने बताया कि भागलपुर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बड़ी संख्या में कैमरे स्थापित किए गए हैं, जो अपराध की रोकथाम में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। AI जनरेटेड कैमरा तकनीक पर भी काम जारी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऐप्स के माध्यम से यदि कोई अपराधी देश के किसी भी हिस्से में पकड़ा जाए और उसका रिकॉर्ड व फोटो उपलब्ध हो, तो उसे स्कैन कर तत्काल पहचाना जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों से भी ऑनलाइन सत्यापन कराया जा सकता है।

पेपरलेस कार्यप्रणाली और जन-शिकायत निवारण

यादव ने कहा कि डिजिटल इंडिया का मूल उद्देश्य नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से मुक्ति दिलाना है। ई-ऑफिस से पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिला है, जिससे कागज की बचत के साथ-साथ पर्यावरण को भी लाभ हो रहा है। बिहार सरकार के सहयोग पोर्टल जैसी पहल के ज़रिए नागरिकों की शिकायतों का ऑनलाइन निवारण किया जा रहा है।

कर्मियों को प्रशिक्षण, भविष्य की योजनाएँ

SSP यादव ने जानकारी दी कि एसपी कार्यालय में कार्यरत लगभग 30 से 40 प्रतिशत कर्मियों को अब कंप्यूटर और ई-ऑफिस पर काम करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। भविष्य में यह संख्या और बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जहाँ-जहाँ डिजिटल तकनीक के उपयोग की संभावनाएँ होंगी, वहाँ इसे और आगे बढ़ाया जाएगा। तकनीक का लक्ष्य लोगों के जीवन को सरल, सरकारी कार्यों को प्रभावी और विभिन्न सेवाओं को सुगम बनाना है — और डिजिटल इंडिया इसी दिशा में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 30 से 40 प्रतिशत प्रशिक्षित कर्मियों का आँकड़ा उन बाकी 60 से 70 प्रतिशत की कहानी भी कहता है जो अभी डिजिटल दायरे से बाहर हैं। CCTNS जैसी प्रणालियाँ वर्षों से चल रही हैं, फिर भी ज़िला स्तर पर उनकी पहुँच और डेटा गुणवत्ता असमान रही है। स्मार्ट कैमरे और AI तकनीक तब तक अधूरे हैं जब तक उन्हें चलाने वाले कर्मी पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित न हों। डिजिटल इंडिया की असली परीक्षा अब हार्डवेयर और पोर्टल की संख्या नहीं, बल्कि ज़मीनी उपयोग और जवाबदेही का ढाँचा है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भागलपुर पुलिस में डिजिटल इंडिया से क्या बदलाव आया है?
SSP प्रमोद कुमार यादव के अनुसार, ई-ऑफिस, HRMS और CCTNS जैसी प्रणालियों से एसपी से एसएचओ स्तर तक कार्यालयी कार्य ऑनलाइन हो गए हैं। अपराध अनुसंधान, अपराधी पहचान और नागरिक शिकायत निवारण की प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज़ और सुविधाजनक हुई है।
AI से पुलिस की अपराधी पहचान कैसे आसान हुई है?
डिजिटल ऐप्स के ज़रिए किसी भी राज्य में पकड़े गए अपराधी के फोटो और रिकॉर्ड को स्कैन कर तत्काल पहचाना जा सकता है। ज़रूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से भी ऑनलाइन सत्यापन कराया जा सकता है।
भागलपुर में स्मार्ट सिटी कैमरों की क्या भूमिका है?
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भागलपुर शहर में बड़ी संख्या में कैमरे लगाए गए हैं, जो अपराध नियंत्रण में सहायता कर रहे हैं। AI जनरेटेड कैमरा तकनीक पर भी काम जारी है और सरकार इस दिशा में और पहल करने की योजना रखती है।
बिहार का सहयोग पोर्टल क्या है और इसका पुलिसिंग से क्या संबंध है?
बिहार सरकार का सहयोग पोर्टल एक ऑनलाइन जनसुनवाई मंच है जिसके माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का निवारण किया जाता है। SSP यादव ने इसे डिजिटल इंडिया अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जो लोगों को कार्यालयों के चक्कर से मुक्त करता है।
भागलपुर पुलिस में कितने कर्मियों को डिजिटल प्रशिक्षण मिला है?
SSP यादव के अनुसार, एसपी कार्यालय में कार्यरत लगभग 30 से 40 प्रतिशत कर्मियों को अब तक कंप्यूटर और ई-ऑफिस पर काम करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। भविष्य में यह संख्या और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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