मन की बात के 135वें एपिसोड में PM मोदी ने मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज की तारीफ की, यूनेस्को विरासत दर्जे के लिए आवेदन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में मेघालय के विश्वप्रसिद्ध लिविंग रूट ब्रिज को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मेघालय की पहचान केवल बादलों और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है — ये जीवित पुल भी उसकी एक अनूठी और वैश्विक पहचान हैं। भारत सरकार ने इन रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।
क्या हैं लिविंग रूट ब्रिज
मोदी ने श्रोताओं को बताया कि ये पुल सामान्य निर्माण-सामग्री से नहीं बनते। रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा देकर जलधाराओं के पार ले जाया जाता है और कई दशकों की मेहनत व धैर्य के बाद ये मजबूत पुलों का रूप ले लेती हैं। उन्होंने इन्हें प्रकृति और मानव के बीच गहरे संबंध का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये 'जीवित पुल' समय के साथ और अधिक मजबूत होते जाते हैं — जो किसी भी कृत्रिम संरचना के विपरीत है। इनमें मेघालय के लोगों की सृजनशीलता, धैर्य और पर्यावरण के प्रति सम्मान की झलक मिलती है।
स्थानीय समुदायों की संरक्षण पहल
मोदी ने बताया कि पहले इन पुलों की सटीक संख्या का अनुमान लगाना भी कठिन था। लेकिन स्थानीय समुदायों ने स्वयं इनकी गिनती शुरू की और संरक्षण की व्यवस्था विकसित की। आज ये समुदाय 120 से अधिक रूट ब्रिजों की देखरेख कर रहे हैं।
कुछ समूह हर वर्ष इन पुलों की स्थिति का निरीक्षण करते हैं, जबकि कुछ लोग आसपास के क्षेत्रों में पौधों की नर्सरी तैयार कर पर्यावरण को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रकार एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो चुका है जो इन धरोहरों के संरक्षण में सहायक है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती
मोदी ने स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन के कारण इन रूट ब्रिजों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के पारिस्थितिकी तंत्र पर मानसून की अनिश्चितता और तापमान वृद्धि का दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने स्थानीय समुदायों की इस चुनौती से निपटने की क्षमता की सराहना की।
पद्म पुरस्कार विजेता हैली वार जी का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने हैली वार जी का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्हें इस वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष इन रूट ब्रिजों की देखभाल में समर्पित किए हैं। मोदी ने कहा कि उनका यह योगदान पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
देशवासियों से अपील
पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि यदि किसी ने मेघालय के इन रूट ब्रिजों का भ्रमण किया हो, तो अपनी तस्वीरें और अनुभव सोशल मीडिया पर साझा करें। उनका मानना है कि इससे अधिक से अधिक लोग इस अनूठी परंपरा से परिचित होंगे और यूनेस्को मान्यता की दिशा में जन-जागरूकता भी बढ़ेगी।