'मन की बात' के 134वें एपिसोड में PM मोदी ने बेंगलुरु से कच्छ तक खगोल विज्ञान आंदोलन की सराहना की
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में देशभर में उभर रहे खगोल विज्ञान आंदोलन को रेखांकित किया। उन्होंने बेंगलुरु से लेकर कच्छ के रण तक सक्रिय कई संस्थाओं और क्लबों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में खगोल विज्ञान के प्रति युवाओं का उत्साह तेज़ी से बढ़ रहा है।
भारत की खगोलीय विरासत और आधुनिक जिज्ञासा
मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हम भारतीयों में खगोल विज्ञान यानी एस्ट्रोनॉमी को लेकर हमेशा विशेष आकर्षण रहा है। हमारे देश में आज भी सदियों पुरानी वेधशालाएं मौजूद हैं। यहां अद्भुत गणितीय खोजें हुई हैं। नेविगेशन, पंचांग या हमारे पर्व-त्योहार हो, इन सबका संबंध आकाश और तारों से रहा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि खगोल विज्ञान ने हर पीढ़ी में कौतुहल जगाया है और आज के युवाओं में भी इसे लेकर उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
गौरतलब है कि भारत की खगोलीय परंपरा आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे प्राचीन गणितज्ञों से जुड़ी है, और आज देश में इसरो (ISRO) के नेतृत्व में अंतरिक्ष अन्वेषण का नया अध्याय लिखा जा रहा है। ऐसे में ज़मीनी स्तर पर खगोल विज्ञान क्लबों का उभरना इस परंपरा की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
बेंगलुरु एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी और खगोल मंडल
प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का विशेष उल्लेख किया, जो नियमित ऑब्जर्वेशन सेशन आयोजित करती है और ग्रामीण क्षेत्रों में खगोल विज्ञान को लोकप्रिय बनाने का मिशन चला रही है। उन्होंने बताया कि 'खगोल मंडल' नामक टीम ने 30 घंटे का एक अभिनव पाठ्यक्रम शुरू किया है। मोदी के अनुसार, 'रात में तारों का निहारना अपने आपमें अद्भुत अनुभव होता है।'
एस्ट्रो केरला और राजकोट का बिग बैंग क्लब
एस्ट्रो केरला संस्था का उल्लेख करते हुए मोदी ने बताया कि यह संगठन रात्रि ऑब्जर्वेशन कैंप और वर्कशॉप आयोजित करता है, जहाँ युवा टेलीस्कोप बनाना और तारा मानचित्र का उपयोग करना सीखते हैं। राजकोट के बिग बैंग एस्ट्रोनॉमी क्लब की भी सराहना की गई, जिसने गिर के जंगल से लेकर कच्छ के रण तक अनेक खगोल विज्ञान कार्यक्रम आयोजित किए हैं। यह उल्लेखनीय है कि कच्छ का रण प्रकाश प्रदूषण से दूर होने के कारण खगोलीय अवलोकन के लिए आदर्श स्थल माना जाता है।
ज्योतिर्विद्या संस्थान और ISAAC नेटवर्क
मोदी ने 'ज्योतिर्विद्या संस्थान' को खगोल विज्ञान के सबसे पुराने अनुयायियों में से एक बताया, जहाँ अवलोकन सुविधाओं के साथ-साथ किताबें, पुस्तकालय और दूरबीन पुस्तकालय भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा उन्होंने ISAAC — एक छात्र-नेतृत्व वाले राष्ट्रव्यापी नेटवर्क — का भी उल्लेख किया, जो खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी क्लबों को एक मंच पर जोड़ता है।
आम जनता और युवाओं पर असर
बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, स्कूलों से लेकर सार्वजनिक पार्कों तक एस्ट्रोनॉमी क्लबों की गतिविधियाँ तेज़ी से फैल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस उल्लेख से इन संगठनों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी और नए सदस्यों की भागीदारी बढ़ेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत चंद्रयान और गगनयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों के ज़रिए वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभर रहा है। आने वाले समय में इन ज़मीनी पहलों से वैज्ञानिक सोच और STEM रुचि को और बल मिलने की उम्मीद है।