मथुरा मुठभेड़: बावरिया गैंग के दो इनामी बदमाश ढेर, टैंटीगांव डकैती कांड में बड़ी कार्रवाई

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मथुरा मुठभेड़: बावरिया गैंग के दो इनामी बदमाश ढेर, टैंटीगांव डकैती कांड में बड़ी कार्रवाई

सारांश

मथुरा पुलिस ने 7 मई को टैंटीगांव में हुई मुठभेड़ में बावरिया गैंग के दो कुख्यात इनामी बदमाशों को ढेर कर दिया। 23 अप्रैल की ₹15 लाख से अधिक की डकैती के बाद 17 पुलिस टीमें लगाई गई थीं — यह मथुरा जिले में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी पुलिस सफलता मानी जा रही है।

मुख्य बातें

मथुरा पुलिस ने 7 मई 2026 को टैंटीगांव मुठभेड़ में बावरिया गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को मार गिराया।
मारे गए बदमाश धर्मवीर उर्फ लंबू (16 मामले) और राजेंद्र उर्फ पप्पू (11 मामले) — दोनों पर ₹50-50 हज़ार का इनाम था।
23 अप्रैल को व्यवसायी अजय अग्रवाल के घर से ₹3.22 लाख नकदी और ₹12 लाख के आभूषण लूटे गए थे।
मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी अजय वर्मा और कांस्टेबल दुर्विज सिंह भी घायल हुए।
पुलिस ने 17 टीमें लगाकर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की पहचान की थी।
पुलिस अब बावरिया गैंग के शेष नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

मथुरा पुलिस ने 7 मई 2026 को सुरीर थाना क्षेत्र के टैंटीगांव में हुई मुठभेड़ में कुख्यात बावरिया गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को मार गिराया। दोनों बदमाश 23 अप्रैल की रात हुई सनसनीखेज डकैती कांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे हैं, जिसमें एक व्यवसायी परिवार को बंधक बनाकर लाखों रुपए की लूट की गई थी।

मारे गए बदमाशों की पहचान

मुठभेड़ में मारे गए बदमाशों की पहचान राजस्थान निवासी धर्मवीर उर्फ लंबू और राजेंद्र उर्फ पप्पू के रूप में हुई है। दोनों पर डीआईजी स्तर से ₹50-50 हज़ार का इनाम घोषित था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार के अनुसार, दोनों अपराधी बेहद शातिर थे और अलग-अलग नाम-पतों से जेल जाते थे। धर्मवीर पर 16 और राजेंद्र पर 11 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं, जिनमें डकैती और हत्या जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

गुरुवार सुबह पुलिस को टैंटीगांव क्षेत्र में बदमाशों की मौजूदगी की सूचना मिली। घेराबंदी के दौरान बदमाशों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश गोली लगने से घायल हो गए और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी अजय वर्मा और कांस्टेबल दुर्विज सिंह भी घायल हुए हैं।

टैंटीगांव डकैती कांड की पृष्ठभूमि

एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि 23 अप्रैल की रात नकाबपोश बदमाशों ने व्यवसायी अजय अग्रवाल के घर में घुसकर पूरे परिवार को बंधक बना लिया था। बदमाश करीब दो घंटे तक घर में आतंक मचाते रहे और ₹3.22 लाख की नकदी तथा करीब ₹12 लाख के आभूषण लूट ले गए। जाते समय वे सीसीटीवी कैमरे तोड़कर डीवीआर भी अपने साथ ले गए ताकि पहचान न हो सके। गौरतलब है कि 25 अप्रैल को अलीगढ़ जिले के खैर क्षेत्र में भी इन्हीं बदमाशों ने एक व्यापारी के घर डकैती का प्रयास किया था।

जाँच और पुलिस की कार्रवाई

मामला सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और खुलासे के लिए 17 पुलिस टीमें लगाई गईं। सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए पुलिस अलीगढ़ जिले के खैर तक पहुँची, जहाँ से बदमाशों की पहचान की गई। पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से डकैती का माल, नकदी और अवैध हथियार भी बरामद किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बावरिया गैंग की आपराधिक गतिविधियाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तेज़ी से बढ़ रही थीं।

आगे क्या होगा

मथुरा पुलिस अब बावरिया गैंग के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश में जुट गई है। इस कार्रवाई को जिले में हाल के वर्षों की पुलिस की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। घायल पुलिसकर्मियों का उपचार जारी है और बावरिया गैंग के शेष सदस्यों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुठभेड़ों की बढ़ती संख्या के साथ स्वतंत्र जाँच की माँग भी उठती रही है — यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रक्रिया संवैधानिक मानकों के अनुरूप हो। गैंग के शेष सदस्यों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया ही इस कार्रवाई की दीर्घकालिक सफलता को परिभाषित करेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मथुरा मुठभेड़ में कौन से बदमाश मारे गए?
मथुरा के टैंटीगांव में हुई मुठभेड़ में राजस्थान निवासी धर्मवीर उर्फ लंबू और राजेंद्र उर्फ पप्पू मारे गए। दोनों बावरिया गैंग के सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं और दोनों पर डीआईजी स्तर से ₹50-50 हज़ार का इनाम घोषित था।
टैंटीगांव डकैती कांड क्या था?
23 अप्रैल 2026 की रात नकाबपोश बदमाशों ने मथुरा के सुरीर थाना क्षेत्र में व्यवसायी अजय अग्रवाल के घर घुसकर पूरे परिवार को करीब दो घंटे बंधक बनाए रखा। बदमाश ₹3.22 लाख नकदी और ₹12 लाख के आभूषण लूटकर सीसीटीवी डीवीआर भी ले गए।
बावरिया गैंग क्या है और यह कहाँ सक्रिय है?
बावरिया गैंग एक संगठित आपराधिक गिरोह है जो मुख्यतः राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डकैती व लूट की वारदातों के लिए कुख्यात है। इस गैंग के सदस्य अलग-अलग नाम-पतों का उपयोग करते हैं और कई राज्यों में आपराधिक मामलों में वांछित रहते हैं।
मुठभेड़ में पुलिस को कोई नुकसान हुआ?
हाँ, इस मुठभेड़ में स्वाट टीम प्रभारी अजय वर्मा और कांस्टेबल दुर्विज सिंह घायल हुए। दोनों का उपचार जारी है।
पुलिस ने बदमाशों की पहचान कैसे की?
मथुरा पुलिस ने 17 टीमें गठित कर सीसीटीवी फुटेज खंगाली और अलीगढ़ जिले के खैर क्षेत्र तक पहुँची, जहाँ 25 अप्रैल को भी इन्हीं बदमाशों ने डकैती का प्रयास किया था। फुटेज के आधार पर दोनों की पहचान सुनिश्चित की गई।
राष्ट्र प्रेस
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