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मीरा-भायंदर को 'जैन नगरी' कहने पर विवाद, एमएनएस ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता को घेरा

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मीरा-भायंदर को 'जैन नगरी' कहने पर विवाद, एमएनएस ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता को घेरा

सारांश

भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता का मीरा-भायंदर को 'जैन नगरी' बताना एमएनएस को रास नहीं आया। एमएनएस ने इसे 'विभाजनकारी राजनीति' करार देते हुए पलटवार किया और क्षेत्र को कोली, आगरी व मराठी लोगों की भूमि बताया। मेहता पहले से ही स्कूल प्रतिबंध और 'दामोदर टावर' विवाद जैसे मामलों में घिरे रहे हैं।

मुख्य बातें

भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने ठाणे में एक कार्यक्रम के दौरान मीरा-भायंदर को 'जैन नगरी' और 'मिनी राजस्थान' बताया।
उन्होंने दावा किया कि मीरा-भायंदर में 33 से अधिक जैन मंदिर हैं और बड़ी संख्या में संत-मुनियों का आगमन होता है।
एमएनएस की मीरा-भायंदर इकाई के अध्यक्ष सचिन पोपले ने इसे 'विभाजनकारी राजनीति' करार देते हुए क्षेत्र को कोली, आगरी और मराठी लोगों की भूमि बताया।
इससे पहले सितंबर में मेहता के स्कूल सेवन स्क्वायर एकेडमी में पर्युषण के दौरान कंद-मूल प्रतिबंध विवाद हुआ था, जो बाद में वापस लिया गया।
'दामोदर टावर' ओसी मामले में मेहता पर 10% हिस्सेदारी और एक फ्लैट की माँग के आरोप लगे थे, जिन्हें उन्होंने नकारा था।
भायंदर ईस्ट भूमि विवाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मेहता से जुड़ी संस्था ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ा था।

महाराष्ट्र के भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीरा-भायंदर क्षेत्र को 'जैन नगरी' बताए जाने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एमएनएस का आरोप है कि यह बयान क्षेत्र में 'विभाजनकारी राजनीति' को बढ़ावा देता है।

मेहता ने क्या कहा

कार्यक्रम में नरेंद्र मेहता ने कहा कि वह ऐसे शहर से आते हैं, जिसे अक्सर 'मिनी राजस्थान' या 'जैन नगरी' कहा जाता है। उन्होंने दावा किया कि मीरा-भायंदर में 33 से अधिक जैन मंदिर हैं और यहाँ बड़ी संख्या में संत-मुनियों का आगमन होता है।

मेहता ने कहा, 'गुरुदेव का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है। पिछला चुनाव बेहद कठिन था, लेकिन उनका आशीर्वाद मुझे प्रेरणा देता है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मेरा जन्म जैन परिवार में हुआ। मीरा-भायंदर में जब भी जैन समुदाय से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, हम मज़बूती से उनके साथ खड़े रहते हैं।'

पुराने विवादों का संदर्भ

मेहता ने अपने भाषण में अपने स्कूल से जुड़े पुराने विवाद का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि जैन पर्व पर्युषण के दौरान उनके स्कूल में बच्चों के लंच बॉक्स में कंद-मूल सब्जियाँ न लाने का नियम लागू किया गया था। इस पर विवाद हुआ, लेकिन उनके अनुसार स्कूल ने अपने निर्णय से पीछे हटने से इनकार किया।

उन्होंने जैन मुनियों के नंगे पैर चलने के दौरान उनके पैरों को गर्मी से बचाने के लिए सड़कों पर सफेद पट्टियाँ बनाए जाने के पुराने विवाद का भी उल्लेख किया और कहा कि वह उस मुद्दे पर भी अपने रुख पर कायम रहे।

एमएनएस की प्रतिक्रिया

मेहता के बयान पर एमएनएस की मीरा-भायंदर विधानसभा इकाई के अध्यक्ष सचिन पोपले ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मेहता को 'विभाजनकारी राजनीति' बंद करनी चाहिए। पोपले ने तर्क दिया कि मीरा-भायंदर को केवल किसी एक समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है और उन्होंने इस क्षेत्र को कोली, आगरी तथा मराठी लोगों की भूमि बताया।

पोपले ने स्कूल में कंद-मूल पर लगाए गए प्रतिबंध पर भी मेहता पर निशाना साधा और दावा किया कि एमएनएस के विरोध के बाद स्कूल को यह निर्देश वापस लेना पड़ा था। उन्होंने मेहता पर धार्मिक मुद्दों को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। गौरतलब है कि ये सभी आरोप एमएनएस की ओर से लगाए गए हैं।

नरेंद्र मेहता के पुराने विवाद

सितंबर में सेवन-इलेवन ग्रुप द्वारा संचालित सेवन स्क्वायर एकेडमी में पर्युषण के दौरान छात्रों के टिफिन में प्याज, लहसुन, चुकंदर और आलू जैसी कंद-मूल सब्जियाँ न लाने के निर्देश को लेकर विवाद हुआ था। राजनीतिक विरोध और अभिभावकों की आपत्ति के बाद ये निर्देश वापस ले लिए गए थे। मेहता ने उस समय अपने स्कूल की नीति का बचाव किया था।

इसके अलावा, मीरा रोड-भायंदर इलाके में 'दामोदर टावर' परियोजना के ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) को लेकर भी मेहता पर आरोप लगे थे। जनहवी डेवलपर्स के साझेदार देवराम मांडोरा ने आरोप लगाया था कि ओसी जारी कराने के बदले उनसे परियोजना में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी और एक फ्लैट की माँग की गई थी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मामले में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी और पुलिस को ऑडियो रिकॉर्डिंग की जाँच के निर्देश दिए थे।

मेहता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें मनगढ़ंत बताया था और ऑडियो क्लिप को पुरानी तथा चुनिंदा तरीके से संपादित बताया था। बाद में बिल्डर को एक ठेकेदार की ओर से दर्ज ₹1.06 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के अलग मामले में मीरा रोड पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

भूमि विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई

मीरा-भायंदर में जमीन विवाद को लेकर भी मेहता से जुड़ी एक संस्था का नाम सामने आया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के परिचित बताए जाने वाले असगर अली वोहरा ने भायंदर ईस्ट में जमीन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद की शिकायत की थी और नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हुई और मेहता से जुड़ी संस्था ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ दिया तथा निर्माण संबंधी मंजूरियाँ वापस ले लीं।

यह ऐसे समय में आया है जब मीरा-भायंदर में सामुदायिक पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज़ होती जा रही है। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या यह विवाद क्षेत्र की राजनीति पर दीर्घकालिक असर छोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बहुलतावादी शहरी मतदाताओं में विभाजन की रेखाएँ खींच सकती है। एमएनएस की प्रतिक्रिया भले ही राजनीतिक रूप से प्रेरित हो, लेकिन उसका यह तर्क — कि मीरा-भायंदर केवल एक समुदाय की नगरी नहीं है — क्षेत्र की बहुजातीय और बहुधार्मिक वास्तविकता से मेल खाता है। मेहता के पिछले विवाद — स्कूल प्रतिबंध, ओसी घोटाला, भूमि विवाद — एक पैटर्न दिखाते हैं जो उनकी जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है, और मुख्यधारा की कवरेज इस पैटर्न को पर्याप्त रूप से नहीं उठा पाती।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेंद्र मेहता का 'जैन नगरी' वाला विवाद क्या है?
भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने ठाणे में एक कार्यक्रम के दौरान मीरा-भायंदर को 'जैन नगरी' और 'मिनी राजस्थान' बताया। उन्होंने दावा किया कि वहाँ 33 से अधिक जैन मंदिर हैं। इस बयान पर एमएनएस ने कड़ा विरोध जताया।
एमएनएस ने मेहता के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
एमएनएस की मीरा-भायंदर इकाई के अध्यक्ष सचिन पोपले ने इसे 'विभाजनकारी राजनीति' बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को केवल एक समुदाय से जोड़ना उचित नहीं और इसे कोली, आगरी व मराठी लोगों की भूमि बताया।
नरेंद्र मेहता के स्कूल से जुड़ा कंद-मूल विवाद क्या था?
सितंबर में मेहता के स्कूल सेवन स्क्वायर एकेडमी में पर्युषण के दौरान छात्रों के टिफिन में प्याज, लहसुन, चुकंदर और आलू जैसी सब्जियाँ न लाने का निर्देश जारी हुआ था। राजनीतिक विरोध और अभिभावकों की आपत्ति के बाद यह निर्देश वापस ले लिया गया।
'दामोदर टावर' ओसी मामले में मेहता पर क्या आरोप थे?
जनहवी डेवलपर्स के साझेदार देवराम मांडोरा ने आरोप लगाया था कि ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी कराने के बदले परियोजना में 10% हिस्सेदारी और एक फ्लैट की माँग की गई। मेहता ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताकर खारिज किया था।
मीरा-भायंदर भूमि विवाद में मेहता का नाम कैसे आया?
भायंदर ईस्ट में जमीन विवाद को लेकर असगर अली वोहरा ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर शिकायत की थी। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मेहता से जुड़ी संस्था ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ा और निर्माण संबंधी मंजूरियाँ वापस ले लीं।
राष्ट्र प्रेस
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