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रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में PM मोदी: 'राष्ट्र प्रथम' हर निर्णय का मूल, 12 वर्षों की उपलब्धियाँ गिनाईं

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रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में PM मोदी: 'राष्ट्र प्रथम' हर निर्णय का मूल, 12 वर्षों की उपलब्धियाँ गिनाईं

सारांश

रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में मोदी का संदेश सिर्फ उपलब्धियों की सूची नहीं थी — यह 12 साल के शासन का एक राजनीतिक आख्यान था। माओवाद उन्मूलन से लेकर 25 करोड़ की गरीबी मुक्ति तक, 'राष्ट्र प्रथम' को उन्होंने हर नीति की आत्मा बताया।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 22 जून 2026 को रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में 'राष्ट्र प्रथम' को सरकार के हर निर्णय का मूल सिद्धांत बताया।
2004-2014 के बीच माओवादी हिंसा में 17,000 से अधिक घटनाएँ और 7,000 से अधिक मौतें ; आज इन क्षेत्रों से माओवाद का उन्मूलन का दावा।
नक्सल प्रभावित जिलों में साढ़े 9 हज़ार मोबाइल टावर , 45 हज़ार गाँवों में कनेक्टिविटी और 6 हज़ार नए डाकघर ।
पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले; 100+ आकांक्षी जिलों की भूमिका अहम।
मेट्रो यात्री संख्या 2014 में 28 लाख प्रतिदिन से बढ़कर अब 1.28 करोड़ प्रतिदिन।
होम लोन ब्याज दर दोहरे अंकों से घटकर 7-8% पर आई; हवाई अड्डों की संख्या 12 वर्षों में दोगुनी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित रिपब्लिक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार के हर निर्णय, हर कदम और हर प्रयास के मूल में 'राष्ट्र प्रथम' की भावना केंद्र में रही है। उन्होंने भारत को एक ऐसे देश के रूप में रेखांकित किया जो क्षणिक घटनाओं पर उतावला नहीं होता, बल्कि युगों की स्मृति और दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ता है।

जी-7 से लौटकर दिया वैश्विक संदेश

मोदी ने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद उन्होंने पाया कि विश्व के हर नेता और हर देश इस बात को भलीभाँति समझते हैं कि आज के भारत के लिए 'नेशन फर्स्ट' सबसे बड़ा मंत्र और सबसे बड़ा सिद्धांत है। उन्होंने कहा, 'भारत न केवल एक तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति भी है।' उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख लगातार मज़बूत हो रही है और यही आने वाले 1,000 वर्षों का भविष्य लिखने की नींव है।

माओवाद-मुक्त आदिवासी क्षेत्र: एक बड़ी उपलब्धि

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच माओवादी आतंकवाद के कारण 17,000 से अधिक हिंसक घटनाएँ हुईं और 7,000 से अधिक लोगों की जान गई। दशकों तक आदिवासी इलाकों में एक सरकारी गाड़ी तक नहीं गुज़र सकती थी। उन्होंने कहा कि आज इन क्षेत्रों से माओवादी आतंकवाद का पूर्णतः उन्मूलन हो चुका है — जो उनके अनुसार एक उल्लेखनीय उपलब्धि है जिसे कम नहीं आँका जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब दशकों से कई सरकारें और पीढ़ियाँ इस समस्या को हल करने में असफल रही थीं।

आकांक्षी जिले और विकास की नई रोशनी

मोदी ने बताया कि पहले 100 से अधिक जिलों और 500 से अधिक ब्लॉकों को 'पिछड़ा क्षेत्र' घोषित किया गया था। उनकी सरकार ने इनका नाम बदलकर 'आकांक्षी जिले और ब्लॉक' रखा और इन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ गरीब लोगों ने गरीबी से मुक्ति पाई है, जिसमें आकांक्षी जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित जिलों में साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर लगाए गए हैं, करीब 45 हज़ार गाँवों में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुँची है, 75 हज़ार बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट तैनात किए गए हैं और 6 हज़ार से अधिक नए डाकघर खोले गए हैं।

बुनियादी ढाँचे और मध्यम वर्ग पर असर

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में मेट्रो से प्रतिदिन लगभग 28 लाख लोग यात्रा करते थे, जो आज बढ़कर 1.28 करोड़ दैनिक यात्री हो गए हैं। नमो भारत, वंदे भारत और अमृत भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनें देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ रही हैं। पिछले 12 वर्षों में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है। होम लोन की ब्याज दर, जो 2014 में दोहरे अंकों में थी, आज 7-8 प्रतिशत पर आ गई है। मोदी ने इसे मध्यम वर्ग के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक ठोस बदलाव बताया।

नागरिकों को सलाम

मोदी ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया, खादी और स्थानीय वस्तुओं को बढ़ावा देने तक — ये सभी पहलें इसलिए सफल हुईं क्योंकि देश की जनता ने राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। उन्होंने कहा, 'इसके लिए मैं देश के नागरिकों को सलाम करता हूँ।' आगे चलकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन घोषित उपलब्धियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक किस हद तक पहुँच पाया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्वतंत्र सत्यापन और ज़मीनी रिपोर्टें इस तस्वीर को पूरी तरह पुष्ट नहीं करतीं। 25 करोड़ की गरीबी मुक्ति का आँकड़ा सरकारी पद्धति पर आधारित है, जिसे अर्थशास्त्री अलग-अलग तरीके से व्याख्यायित करते हैं। असली कसौटी यह होगी कि आकांक्षी जिलों में रोज़गार, स्वास्थ्य और शिक्षा के स्वतंत्र संकेतक क्या कहते हैं — जो इस भाषण में अनुपस्थित रहे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में क्या कहा?
PM मोदी ने 22 जून 2026 को रिपब्लिक शिखर सम्मेलन में कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार के हर निर्णय के मूल में 'राष्ट्र प्रथम' की भावना रही है। उन्होंने माओवाद उन्मूलन, 25 करोड़ लोगों की गरीबी मुक्ति और बुनियादी ढाँचे में सुधार को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में गिनाया।
माओवाद उन्मूलन पर मोदी ने क्या दावा किया?
मोदी ने कहा कि 2004-2014 के बीच माओवादी हिंसा में 17,000 से अधिक घटनाएँ हुईं और 7,000 से अधिक लोगों की जान गई। उनके अनुसार आज इन आदिवासी क्षेत्रों से माओवादी आतंकवाद का पूर्णतः उन्मूलन हो चुका है, जिसे उन्होंने एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।
आकांक्षी जिले क्या हैं और इनसे क्या बदला?
पहले 100 से अधिक जिलों और 500 से अधिक ब्लॉकों को 'पिछड़ा क्षेत्र' घोषित किया गया था। मोदी सरकार ने इनका नाम बदलकर 'आकांक्षी जिले और ब्लॉक' रखा और विकास की प्राथमिकता दी। सरकार के अनुसार इन क्षेत्रों ने 25 करोड़ लोगों की गरीबी मुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मेट्रो यात्रियों और हवाई अड्डों में क्या बदलाव आया?
2014 में मेट्रो से प्रतिदिन लगभग 28 लाख लोग यात्रा करते थे, जो अब बढ़कर 1.28 करोड़ दैनिक यात्री हो गए हैं। इसके साथ ही पिछले 12 वर्षों में हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे मध्यम वर्ग को हवाई यात्रा के अधिक अवसर मिले हैं।
होम लोन की ब्याज दरों में क्या बदलाव आया है?
मोदी के अनुसार 2014 में होम लोन दोहरे अंकों की ब्याज दर पर मिलता था, जबकि आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 प्रतिशत की दर पर उपलब्ध है। उन्होंने इसे मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना आसान बनाने वाला बड़ा बदलाव बताया।
राष्ट्र प्रेस
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