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मोरनी के असरेवाली गांव में 3,500 पेड़ों की कथित अवैध कटाई, NGT में मामला लंबित; स्वतंत्र जांच की मांग

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मोरनी के असरेवाली गांव में 3,500 पेड़ों की कथित अवैध कटाई, NGT में मामला लंबित; स्वतंत्र जांच की मांग

सारांश

हरियाणा सरकार पौधरोपण का आह्वान कर रही है, पर मोरनी के असरेवाली गांव में कथित तौर पर 3,500 पेड़ काट दिए गए। निलंबित अधिकारियों की जल्द बहाली ने जाँच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। मामला NGT में लंबित है और सीएम नायब सैनी को ज्ञापन देने की तैयारी है।

मुख्य बातें

पंचकूला जिले के मोरनी इलाके के असरेवाली गांव में संरक्षित वन से कथित तौर पर 3,500 से अधिक पेड़ काटे गए।
कटाई में सफेदा के 2,000 और खैर के 1,500 पेड़ शामिल बताए गए हैं।
हरियाणा सरकार ने चार वन अधिकारियों को निलंबित किया, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें उन्हीं पदों पर बहाल कर दिया गया।
वकील संजीव चौधरी ने स्वतंत्र जाँच की माँग की और कहा कि बहाल अधिकारियों के रहते निष्पक्ष जाँच संभव नहीं।
मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में लंबित है; मुख्यमंत्री नायब सैनी को ज्ञापन सौंपने की तैयारी।

पंचकूला जिले के मोरनी इलाके के असरेवाली गांव में संरक्षित वन क्षेत्र से कथित तौर पर 3,500 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। वकील संजीव चौधरी ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की माँग करते हुए कहा कि निलंबित वन अधिकारियों को उन्हीं पदों पर बहाल किए जाने से निष्पक्ष जाँच संभव नहीं हो सकती। यह मामला फिलहाल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में लंबित है।

कितने पेड़ काटे गए और कहाँ

वकील संजीव चौधरी के अनुसार, असरेवाली गांव के संरक्षित वन क्षेत्र में सफेदा के लगभग 2,000 और खैर के 1,500 पेड़ काटे गए हैं। यह इलाका पूरी तरह वन्यजीव क्षेत्र है, जहाँ चारों तरफ हरियाली है। आलोचकों का कहना है कि यह कटाई उस समय हुई जब हरियाणा सरकार स्वयं आम जनता से पौधरोपण की अपील कर रही है — जो इस पूरे प्रकरण को और भी विरोधाभासी बनाता है।

सरकारी कार्रवाई और विवाद

जब यह मामला हरियाणा सरकार के संज्ञान में आया, तो संबंधित मंत्री ने चार वन अधिकारियों को निलंबित किया — एक कदम जिसे वकील संजीव चौधरी ने सराहनीय बताया। हालाँकि, कुछ ही दिनों बाद इन्हीं अधिकारियों को उन्हीं पदों पर बहाल कर दिया गया। वकील ने कहा कि यह स्थिति संदिग्ध है और इससे जाँच की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।

वकील की माँगें और अपील

वकील संजीव चौधरी ने सरकार से अपील की है कि जो अधिकारी अपने कार्यों से सरकार की छवि खराब करते हैं, उन्हें मोरनी जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में तैनात न किया जाए। उन्होंने माँग की कि यहाँ केवल उन्हीं अधिकारियों की पोस्टिंग हो जो वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के प्रति गंभीर हों। उन्होंने यह भी कहा कि निलंबित अधिकारियों की बहाली से पेड़ों की कटाई का सिलसिला थमना मुश्किल होगा।

मुख्यमंत्री से मिलने की तैयारी

वकील संजीव चौधरी ने बताया कि वे इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी से मुलाकात करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे। गौरतलब है कि यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में पहले से लंबित है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस कटाई के विरुद्ध विरोध दर्ज कराया है। यह देखना होगा कि NGT और राज्य सरकार मिलकर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की विफलता का है। निलंबन के बाद बहाली एक खतरनाक संकेत भेजती है — कि संरक्षित वन क्षेत्रों में उल्लंघन के बाद भी अधिकारी अपने पदों पर लौट सकते हैं। हरियाणा सरकार एक तरफ पौधरोपण अभियान चला रही है, दूसरी तरफ NGT में लंबित मामले में कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं। बिना स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही तंत्र के, मोरनी जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में हरित आवरण की रक्षा केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोरनी के असरेवाली गांव में कितने पेड़ काटे गए?
वकील संजीव चौधरी के अनुसार, असरेवाली गांव के संरक्षित वन क्षेत्र में कथित तौर पर 3,500 से अधिक पेड़ काटे गए — जिनमें सफेदा के लगभग 2,000 और खैर के 1,500 पेड़ शामिल हैं।
हरियाणा सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
मामला संज्ञान में आने पर हरियाणा सरकार के मंत्री ने चार वन अधिकारियों को निलंबित किया। हालाँकि, कुछ दिनों बाद इन्हीं अधिकारियों को उन्हीं पदों पर बहाल कर दिया गया, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
NGT में यह मामला क्यों लंबित है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) संरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध कटाई के मामलों की सुनवाई करता है। वकील संजीव चौधरी के अनुसार, असरेवाली गांव का यह मामला NGT में पहले से लंबित है और स्वतंत्र जाँच की माँग की जा रही है।
निलंबित अधिकारियों की बहाली से जाँच पर क्या असर पड़ेगा?
वकील संजीव चौधरी का मानना है कि जब तक निलंबित अधिकारी उन्हीं पदों पर बने रहेंगे, तब तक न तो निष्पक्ष जाँच हो सकती है और न ही पेड़ों की कटाई का सिलसिला रुक सकता है।
मोरनी इलाके के लिए आगे क्या कदम उठाए जाने की माँग है?
वकील संजीव चौधरी ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है। उन्होंने माँग की है कि मोरनी जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में केवल पर्यावरण के प्रति गंभीर अधिकारियों की ही तैनाती की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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