30 जून 2026
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झारखंड लॉकडाउन वृक्ष कटाई मामला: हाईकोर्ट ने चार साल बाद भी जांच अधूरी रहने पर सरकार को घेरा

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झारखंड लॉकडाउन वृक्ष कटाई मामला: हाईकोर्ट ने चार साल बाद भी जांच अधूरी रहने पर सरकार को घेरा

सारांश

कोविड लॉकडाउन की आड़ में झारखंड के कई जिलों में सैकड़ों पेड़ काटकर 200 से अधिक ट्रकों से बाहर भेजने का आरोप है — और चार साल बाद भी सीआईडी जांच अधूरी है। हाईकोर्ट ने अब 'लार्जर कंस्पिरेसी' पर भी सरकार से जवाब माँगा है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को कोविड लॉकडाउन के दौरान हुई कथित अवैध वृक्ष कटाई की जांच चार साल बाद भी अधूरी रहने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
जांच पलामू जिले के पांकी क्षेत्र तक सीमित है, जबकि याचिका में जामताड़ा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम और रांची सहित कई जिलों का उल्लेख है।
आरोप है कि वर्ष 2020 के लॉकडाउन के दौरान सैकड़ों पेड़ काटकर 200 से अधिक ट्रकों से बाहर भेजे गए।
दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल; एक अन्य आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी।
अदालत ने कथित 'लार्जर कंस्पिरेसी' पर भी सरकार से विस्तृत जवाब माँगा; अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद ।

झारखंड हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान राज्य के कई जिलों में कथित तौर पर हुई बड़े पैमाने पर अवैध वृक्ष कटाई की जांच की सुस्त रफ़्तार पर कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि चार वर्ष बीत जाने के बाद भी सीआईडी की जांच किस चरण में है और इसे अब तक पूरा क्यों नहीं किया जा सका।

अदालत की मुख्य आपत्तियाँ

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि सीआईडी की जांच फ़िलहाल केवल पलामू जिले के पांकी क्षेत्र तक ही सीमित क्यों दिखती है। याचिका में जामताड़ा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) और रांची सहित कई जिलों में सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई का आरोप लगाया गया है। अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता के आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि मामला सामने आने के बाद सरकार ने जांच सीआईडी को सौंपी थी, लेकिन वह बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में शामिल लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर अदालत ने कथित 'लार्जर कंस्पिरेसी' के पहलू पर भी सरकार से विस्तृत जवाब माँगा है।

अब तक की जांच में क्या सामने आया

पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने स्वीकार किया था कि जांच के दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। सरकार ने यह भी माना था कि दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, जबकि एक अन्य आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। पलामू जिले में दर्ज दो प्राथमिकियों की जांच सीआईडी के पास है।

आरोपों की पृष्ठभूमि

याचिका के अनुसार, वर्ष 2020 के कोविड लॉकडाउन के दौरान जब देश भर में आवाजाही पर सख्त पाबंदी थी, उसी समय झारखंड के कई जिलों में सैकड़ों पेड़ों की कथित अवैध कटाई की गई। आरोप है कि कटे हुए पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजा गया। यह ऐसे समय में हुआ जब प्रशासनिक निगरानी तंत्र महामारी प्रबंधन में व्यस्त था, जिससे कथित तौर पर अपराधियों को अवसर मिला।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट पूर्व की सुनवाइयों में भी जांच में देरी पर कड़ा रुख अपना चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल दस्तावेजों की माँग का हवाला देकर देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित है, जब राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि चयनात्मक जांच की आशंका जगाता है। लॉकडाउन जैसे संकटकाल में जब नागरिक और प्रशासन दोनों असहाय थे, तब वन संपदा की कथित लूट और उसमें विभाग के अपने अधिकारियों की भूमिका इस मामले को रूटीन अपराध से परे ले जाती है। हाईकोर्ट का 'लार्जर कंस्पिरेसी' पर जवाब माँगना संकेत है कि न्यायपालिका इसे महज़ दो प्राथमिकियों का मामला नहीं मान रही। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार की जवाबदेही अदालती दबाव के बिना स्वतः सुनिश्चित हो सकती थी।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड लॉकडाउन वृक्ष कटाई मामला क्या है?
यह मामला वर्ष 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान झारखंड के जामताड़ा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम और रांची सहित कई जिलों में कथित तौर पर सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़ा है। आरोप है कि कटे पेड़ों को 200 से अधिक ट्रकों से बाहर भेजा गया और वन विभाग के अधिकारियों की इसमें संलिप्तता सामने आई है।
झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने 30 जून 2026 को राज्य सरकार को चार साल बाद भी जांच अधूरी रहने पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कथित 'लार्जर कंस्पिरेसी' पर भी स्पष्टीकरण माँगा है।
सीआईडी जांच में अब तक क्या हुआ है?
सीआईडी पलामू जिले में दर्ज दो प्राथमिकियों की जांच कर रही है। दो वन अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और एक अन्य आरोपी के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी है। हालाँकि, हाईकोर्ट ने जांच को पांकी क्षेत्र तक सीमित रखने पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है, जब राज्य सरकार को जांच की वर्तमान स्थिति और 'लार्जर कंस्पिरेसी' के पहलू पर विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
लॉकडाउन के दौरान पेड़ काटना इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?
लॉकडाउन के दौरान प्रशासनिक निगरानी महामारी प्रबंधन में व्यस्त थी, जिससे कथित तौर पर अपराधियों को वन संपदा लूटने का अवसर मिला। वन विभाग के अधिकारियों की कथित संलिप्तता और 200 से अधिक ट्रकों का इस्तेमाल इसे संगठित अपराध की श्रेणी में रखता है, जिसे हाईकोर्ट भी गंभीरता से ले रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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