झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: चतरा बाईपास के लिए 13,681 पेड़ों की कटाई पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने चतरा शहर के प्रस्तावित बाईपास निर्माण के लिए चिह्नित 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ ने गुरुवार, 3 सितंबर को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में पूर्ण विकसित पेड़ों की कटाई से पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई महज नए पौधे लगाने से संभव नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला सुरेश साव की याचिका पर आधारित है, जिन्होंने बाईपास के मौजूदा एलाइनमेंट में बदलाव की माँग की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मार्ग में आंशिक परिवर्तन से उनकी भूमि पर स्थित करीब 300 पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जा सकता है। इससे पहले की सुनवाई में हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था, साथ ही उस क्षेत्र में सड़क निर्माण पर अंतरिम रोक भी लगाई गई थी।
सरकारी रिपोर्ट में चौंकाने वाले आँकड़े
सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि हजारीबाग एनएच डिवीजन के कार्यपालक अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा एलाइनमेंट में वन क्षेत्र सहित कुल 13,681 पूर्ण विकसित पेड़ काटने होंगे। इस आँकड़े ने अदालत की चिंता को और गहरा कर दिया। प्रस्तावित बाईपास चतरा शहर को एनएच-99 (नया एनएच-22) और एनएच-100 (नया एनएच-522) से जोड़ने के लिए बनाया जाना है।
अदालत का रुख और निर्देश
हाई कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को बाईपास के मौजूदा एलाइनमेंट की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर री-एलाइनमेंट की संभावना पर विचार करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण की आवश्यकता पूरी करते हुए अधिक से अधिक पूर्ण विकसित पेड़ों को बचाया जाए।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है। दोनों मंत्रालयों को छह सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव ने अदालत का नोटिस स्वीकार किया। फिलहाल दोनों मंत्रालयों की आधिकारिक स्थिति हलफनामे के माध्यम से सामने आएगी।
आगे क्या होगा
केंद्रीय मंत्रालयों के जवाबी हलफनामे और एलाइनमेंट की समीक्षा रिपोर्ट आने के बाद मामले में अगली सुनवाई होगी। तब तक 13,681 पेड़ों की कटाई पर रोक जारी रहेगी। यह मामला विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की उस बड़ी बहस का हिस्सा है जो देशभर की अदालतों में चल रही है।