जयपुर के आमेर में सीआरपीएफ कैंपस के पास मोर्टार शेल मिला, बम निरोधक दस्ते ने दोपहर 2 बजे किया निष्क्रिय
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर के आमेर इलाके में सोमवार, 17 अगस्त 2026 की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब सीआरपीएफ कैंपस के समीप ठकराला की ढाणी (वार्ड नंबर 148) के एक खेत में एक संदिग्ध वस्तु पाई गई। बम निरोधक दस्ते की जाँच में यह वस्तु मोर्टार शेल निकली, जिसे दोपहर करीब 2 बजे आबादी से दूर एक सुनसान स्थान पर नियंत्रित विस्फोट के ज़रिये सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया।
कैसे मिला मोर्टार शेल
सुबह करीब 10:30 बजे एक स्थानीय महिला खेत के पास से गुजर रही थी, तभी उसकी नज़र एक संदिग्ध वस्तु पर पड़ी। महिला ने तुरंत अपने परिवार को सूचित किया और स्थानीय लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को जानकारी दी। सूचना मिलते ही आमेर पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुँच गई और वहाँ जमा भीड़ को तत्काल हटा दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
सिविल डिफेंस के डिप्टी कंट्रोलर अमित शर्मा ने बताया कि कंट्रोल रूम को सुबह 11:05 बजे आधिकारिक सूचना मिली और सुरक्षाकर्मी मात्र आठ मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुँच गए। शुरुआती जाँच के बाद बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया, जिसने वस्तु की पहचान मोर्टार शेल के रूप में की। इसके बाद शेल को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाया गया।
शेल को एक गहरे गड्ढे में रखकर दोपहर करीब 2 बजे नियंत्रित विस्फोट से नष्ट किया गया। विस्फोट के दौरान जोरदार धमाका सुनाई दिया, जिससे आसपास के लोग क्षणभर के लिए सहम गए।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
आमेर स्टेशन हाउस ऑफिसर गौतम डोटासरा ने पुष्टि की कि मोर्टार शेल गाँव के खेत में कचरे के बीच मिला था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इस बात की जाँच शुरू कर दी है कि शेल कहाँ से आया और खेत तक कैसे पहुँचा। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि शेल कितने समय से वहाँ पड़ा था।
ऑपरेशन में शामिल टीम
सिविल डिफेंस के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व अमित शर्मा ने किया। इसमें सीडीई असरार अहमद, राजेश कुमार, यूनुस खान, मोहम्मद बिलाल, दीपक सैनी और घनश्याम शर्मा शामिल रहे। सभी जवानों की त्वरित कार्रवाई से किसी भी प्रकार की जनहानि टल गई।
आगे क्या होगा
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोर्टार शेल का स्रोत क्या था और यह सीआरपीएफ कैंपस के इतने नज़दीक कैसे पहुँचा। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जाँच के नतीजे सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।