ट्विशा शर्मा केस: MP हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज गिरिबाला की जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना संदर्भ हटाने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे उनकी नियमित जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना से संबंधित सभी संदर्भ हटाएँ। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीबीआई की जाँच के दौरान गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के आरोप को प्रमाणित करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला। 33 वर्षीया ट्विशा शर्मा की मृत्यु प्रकरण में यह एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को अपनी चार्जशीट और जाँच के परिणामों की विस्तृत जानकारी दी। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु (बीएनएस धारा 80(2)) का आरोप हटाकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा है।
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका मूल रूप से तब दाखिल हुई थी जब उनके खिलाफ दहेज मृत्यु का मामला दर्ज था। सीबीआई चार्जशीट में आरोपों के बदलाव के बाद उनके वकील ने अदालत को अवगत कराया कि अब मामले की कानूनी प्रकृति बदल चुकी है। इसी के आधार पर हाई कोर्ट ने याचिका में संशोधन का निर्देश दिया।
सीबीआई चार्जशीट में क्या है
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर ट्विशा को ताने देकर और लगातार मानसिक रूप से परेशान करके उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। इसी आधार पर एजेंसी ने दहेज मृत्यु की धारा के स्थान पर BNS धारा 108 लगाई है, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।
गौरतलब है कि दहेज मृत्यु और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप कानूनी दृष्टि से भिन्न हैं — पहले में पीड़ित की मृत्यु सीधे दहेज माँग से जोड़नी होती है, जबकि दूसरे में मानसिक उत्पीड़न के ज़रिए आत्महत्या को उकसाने का साक्ष्य पर्याप्त होता है।
पूर्व पृष्ठभूमि
ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनके मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद सीबीआई को मामले की जाँच सौंपी गई। 15 मई को भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, किंतु राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी।
27 मई को हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी और तब से गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। भोपाल की अदालत ने अलग-अलग मौकों पर उनकी हिरासत अवधि बढ़ाई है। हाई कोर्ट ने अभी तक नियमित जमानत नहीं दी है।
परिवार और बचाव पक्ष का रुख
गिरिबाला सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनकी जमानत याचिका में दावा किया गया है कि ट्विशा अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित थीं और दहेज से जुड़े आरोप निराधार हैं। वहीं, ट्विशा के पिता ने नियमित जमानत याचिका का विरोध किया है।
ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग पांडे के अनुसार, परिवार अगली सुनवाई में दहेज प्रताड़ना के विशेष बिंदु पर पुनः जाँच की माँग कर सकता है।
आगे क्या होगा
हाई कोर्ट संशोधित जमानत याचिका पर 8 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगा। गिरिबाला सिंह के वकीलों को तब तक याचिका से दहेज प्रताड़ना के संदर्भ हटाने होंगे। मामले का अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय संशोधित याचिका पर क्या रुख अपनाता है।