1 अक्टूबर 2026
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ट्विशा शर्मा केस: MP हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज गिरिबाला की जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना संदर्भ हटाने का आदेश दिया

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ट्विशा शर्मा केस: MP हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज गिरिबाला की जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना संदर्भ हटाने का आदेश दिया

सारांश

ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले में बड़ा कानूनी मोड़ — MP हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना संदर्भ हटाने को कहा, क्योंकि CBI को इसके सबूत नहीं मिले। अब आत्महत्या उकसाने का आरोप (BNS धारा 108) बरकरार; अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को।

मुख्य बातें

MP हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना संदर्भ हटाने का निर्देश दिया।
सीबीआई को जाँच में दहेज प्रताड़ना के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं मिला; दहेज मृत्यु की धारा हटाकर BNS धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) लगाई गई।
33 वर्षीया ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में मृत पाई गई थीं।
गिरिबाला सिंह 27 मई से न्यायिक हिरासत में हैं; हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत उसी दिन रद्द की थी।
ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग पांडे के अनुसार परिवार अगली सुनवाई में पुनः जाँच की माँग कर सकता है।
संशोधित जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को होगी।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह के अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे उनकी नियमित जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना से संबंधित सभी संदर्भ हटाएँ। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीबीआई की जाँच के दौरान गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के आरोप को प्रमाणित करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला। 33 वर्षीया ट्विशा शर्मा की मृत्यु प्रकरण में यह एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को अपनी चार्जशीट और जाँच के परिणामों की विस्तृत जानकारी दी। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु (बीएनएस धारा 80(2)) का आरोप हटाकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा है।

गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका मूल रूप से तब दाखिल हुई थी जब उनके खिलाफ दहेज मृत्यु का मामला दर्ज था। सीबीआई चार्जशीट में आरोपों के बदलाव के बाद उनके वकील ने अदालत को अवगत कराया कि अब मामले की कानूनी प्रकृति बदल चुकी है। इसी के आधार पर हाई कोर्ट ने याचिका में संशोधन का निर्देश दिया।

सीबीआई चार्जशीट में क्या है

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर ट्विशा को ताने देकर और लगातार मानसिक रूप से परेशान करके उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। इसी आधार पर एजेंसी ने दहेज मृत्यु की धारा के स्थान पर BNS धारा 108 लगाई है, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।

गौरतलब है कि दहेज मृत्यु और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप कानूनी दृष्टि से भिन्न हैं — पहले में पीड़ित की मृत्यु सीधे दहेज माँग से जोड़नी होती है, जबकि दूसरे में मानसिक उत्पीड़न के ज़रिए आत्महत्या को उकसाने का साक्ष्य पर्याप्त होता है।

पूर्व पृष्ठभूमि

ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनके मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद सीबीआई को मामले की जाँच सौंपी गई। 15 मई को भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, किंतु राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी।

27 मई को हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी और तब से गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं। भोपाल की अदालत ने अलग-अलग मौकों पर उनकी हिरासत अवधि बढ़ाई है। हाई कोर्ट ने अभी तक नियमित जमानत नहीं दी है।

परिवार और बचाव पक्ष का रुख

गिरिबाला सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनकी जमानत याचिका में दावा किया गया है कि ट्विशा अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित थीं और दहेज से जुड़े आरोप निराधार हैं। वहीं, ट्विशा के पिता ने नियमित जमानत याचिका का विरोध किया है।

ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग पांडे के अनुसार, परिवार अगली सुनवाई में दहेज प्रताड़ना के विशेष बिंदु पर पुनः जाँच की माँग कर सकता है।

आगे क्या होगा

हाई कोर्ट संशोधित जमानत याचिका पर 8 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगा। गिरिबाला सिंह के वकीलों को तब तक याचिका से दहेज प्रताड़ना के संदर्भ हटाने होंगे। मामले का अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय संशोधित याचिका पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कानूनी परिणामों के लिहाज़ से यह बड़ा अंतर रखता है। BNS धारा 108 में सज़ा का प्रावधान दहेज मृत्यु की तुलना में कम कठोर है, जो परिवार पक्ष के लिए चिंता का विषय है। यह मामला एक बार फिर इस सवाल को उठाता है कि पारिवारिक उत्पीड़न के मामलों में साक्ष्य-संग्रह की सीमाएँ न्याय की राह में कितनी बड़ी बाधा बन सकती हैं। आलोचकों का कहना है कि पूर्व न्यायिक अधिकारियों से जुड़े मामलों में जाँच एजेंसियाँ अक्सर अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं — और यह सावधानी कभी-कभी पीड़ित परिवार के लिए प्रतिकूल साबित होती है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा मामले में MP हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
MP हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह के वकीलों को निर्देश दिया कि वे नियमित जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना से जुड़े सभी संदर्भ हटाएँ, क्योंकि सीबीआई को अपनी जाँच में इस आरोप के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं मिला। अदालत ने जमानत फिलहाल नहीं दी है।
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के खिलाफ कौन-से आरोप लगाए हैं?
सीबीआई ने दहेज मृत्यु की धारा (BNS धारा 80(2)) हटाकर भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। चार्जशीट में कहा गया है कि गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर ट्विशा को ताने देकर और मानसिक रूप से परेशान करके आत्महत्या के लिए प्रेरित किया।
ट्विशा शर्मा कौन थीं और उनकी मृत्यु कैसे हुई?
33 वर्षीया ट्विशा शर्मा रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू थीं। वे 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनके मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर आरोप लगाए, जिसके बाद सीबीआई जाँच शुरू हुई।
गिरिबाला सिंह अभी हिरासत में क्यों हैं?
भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने 15 मई को उन्हें अग्रिम जमानत दी थी, किंतु राज्य सरकार और ट्विशा के परिवार ने इसे चुनौती दी। हाई कोर्ट ने 27 मई को अग्रिम जमानत रद्द कर दी और तब से गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट संशोधित जमानत याचिका पर 8 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगा। गिरिबाला सिंह के वकीलों को तब तक याचिका से दहेज प्रताड़ना के संदर्भ हटाने होंगे। ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग पांडे के अनुसार, परिवार इस बिंदु पर पुनः जाँच की माँग कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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