30 अक्टूबर 2026
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ट्विशा शर्मा हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली ट्रायल का समर्थन किया, गवाह धमकाए जा सकते हैं

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ट्विशा शर्मा हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली ट्रायल का समर्थन किया, गवाह धमकाए जा सकते हैं

सारांश

ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में पूर्व जज गिरिबाला सिंह पर गवाहों को डराने और सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। एजेंसी ने भोपाल से दिल्ली ट्रायल स्थानांतरण का समर्थन किया। अगली सुनवाई 19 नवंबर को संभावित।

मुख्य बातें

सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में ट्विशा शर्मा मामले का ट्रायल भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने का समर्थन किया।
पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर गवाहों को धमकाने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई।
सीबीआई के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने 13 मई 2026 को ब्यूटी पार्लर मालिक से संपर्क कर सीसीटीवी फुटेज एकत्र करने की व्यवस्था की।
सीबीआई ने 17 अगस्त 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 से भोपाल ट्रायल पर रोक लगा रखी है; अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को संभावित।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक प्रति-हलफनामे में कहा है कि पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह द्वारा मुकदमे को प्रभावित करने और गवाहों को डराने-धमकाने की पूरी आशंका है। एजेंसी ने भोपाल से नई दिल्ली में ट्रायल स्थानांतरित करने की याचिका का खुलकर समर्थन किया है।

सीबीआई का हलफनामा: मुख्य बिंदु

सीबीआई ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि गिरिबाला सिंह भोपाल में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं, जो भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत रह चुकी हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, उनका पद और संपर्क जाल भोपाल की सत्र अदालत में चल रही कार्यवाही की निष्पक्षता को खतरे में डाल सकता है।

हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया कि गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह — जो मृतका के पति और इस मामले में सह-आरोपी हैं — भोपाल में ही वकालत करते हैं, जिससे स्थानीय न्यायिक तंत्र पर उनके प्रभाव की आशंका और बढ़ जाती है।

सबूत छेड़छाड़ का गंभीर आरोप

सीबीआई ने जांच के हवाले से दावा किया कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत के बाद घटनास्थल से छेड़छाड़ करने और सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया। हलफनामे के अनुसार, उन्होंने एक तकनीशियन को बुलाकर संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज की प्रतियाँ हासिल कीं।

इसके अलावा, 13 मई 2026 को उन्होंने एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर के मालिक से संपर्क कर ट्विशा के अंतिम दिन के दौरे की जानकारी माँगी और कुछ व्यक्तियों के माध्यम से उस दिन की सीसीटीवी फुटेज एकट्ठा करने की व्यवस्था की। जांच एजेंसी के अनुसार, इन परिस्थितियों से यह संदेह और पुख्ता होता है कि निष्पक्ष ट्रायल के लिए मामले को भोपाल से बाहर ले जाना ज़रूरी है।

मामले की पृष्ठभूमि

12 मई 2026 की रात को ट्विशा शर्मा भोपाल स्थित अपने ससुराल में फाँसी पर लटकी हुई पाई गई और उन्हें एम्स भोपाल में मृत घोषित किया गया। इसके बाद कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत दहेज उत्पीड़न और क्रूरता का मामला दर्ज किया गया।

मध्य प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी, जिसने सर्वोच्च न्यायालय के स्वतः संज्ञान के बाद 25 मई 2026 को मामला पुनः दर्ज किया। सीबीआई ने 17 अगस्त 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत आरोपत्र दाखिल किया। दहेज हत्या और अन्य पहलुओं से जुड़ी आगे की जांच अभी जारी बताई जा रही है।

स्थानांतरण याचिका और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरण याचिका दाखिल की है, जिसमें भोपाल के दसवें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित मुकदमे को दिल्ली की किसी सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की माँग की गई है। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश में उनकी बेटी को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल सकती।

सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 को भोपाल अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी और सीबीआई, गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह को नोटिस जारी किया। 30 अक्टूबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई संभावित रूप से 19 नवंबर 2026 को होगी।

आगे क्या होगा

निचली अदालत मामले का संज्ञान ले चुकी है और कार्यवाही आरोप तय करने पर बहस के चरण तक पहुँच गई है। सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश तक भोपाल में ट्रायल पर रोक जारी रहेगी। 19 नवंबर 2026 की सुनवाई यह तय करेगी कि मुकदमा दिल्ली स्थानांतरित होगा या भोपाल में जारी रहेगा — जो इस पूरे मामले में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सीबीआई का हलफनामा दर्शाता है कि जांच एजेंसी को भी स्थानीय न्यायिक तंत्र पर पर्याप्त भरोसा नहीं है — यह स्वीकारोक्ति अपने आप में बेहद महत्त्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट का 19 नवंबर को फैसला यह तय करेगा कि संस्थागत प्रभाव के सामने न्याय की निष्पक्षता किस हद तक सुरक्षित रह सकती है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्विशा शर्मा कौन थीं और उनकी मौत कब हुई?
ट्विशा शर्मा एक पूर्व मॉडल और अभिनेत्री थीं, जो 12 मई 2026 की रात भोपाल स्थित अपने ससुराल में फाँसी पर लटकी हुई मिलीं और उन्हें एम्स भोपाल में मृत घोषित किया गया। उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप दर्ज हैं।
सीबीआई ने ट्रायल स्थानांतरण का समर्थन क्यों किया?
सीबीआई ने कहा कि सह-आरोपी गिरिबाला सिंह भोपाल में पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में प्रभावशाली हैं और वहाँ की सत्र अदालत में चल रहे मुकदमे को प्रभावित कर सकती हैं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को डराने का प्रयास किया।
गिरिबाला सिंह पर सबूतों से छेड़छाड़ का क्या आरोप है?
सीबीआई के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत के बाद एक तकनीशियन को बुलाकर सीसीटीवी फुटेज की प्रतियाँ हासिल कीं और 13 मई 2026 को एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर के मालिक से ट्विशा के अंतिम दिन के दौरे की जानकारी माँगी। जांच एजेंसी का दावा है कि यह घटनास्थल से छेड़छाड़ और सबूत नष्ट करने का प्रयास था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई कब है?
सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण याचिका की अगली सुनवाई संभावित रूप से 19 नवंबर 2026 को होगी। तब तक भोपाल अदालत में ट्रायल पर रोक जारी रहेगी।
सीबीआई ने इस मामले में आरोपपत्र कब और किन धाराओं में दाखिल किया?
सीबीआई ने 17 अगस्त 2026 को समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। दहेज हत्या और अन्य पहलुओं से जुड़ी आगे की जांच अभी भी जारी बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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