ट्विशा शर्मा हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली ट्रायल का समर्थन किया, गवाह धमकाए जा सकते हैं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक प्रति-हलफनामे में कहा है कि पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह द्वारा मुकदमे को प्रभावित करने और गवाहों को डराने-धमकाने की पूरी आशंका है। एजेंसी ने भोपाल से नई दिल्ली में ट्रायल स्थानांतरित करने की याचिका का खुलकर समर्थन किया है।
सीबीआई का हलफनामा: मुख्य बिंदु
सीबीआई ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि गिरिबाला सिंह भोपाल में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं, जो भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत रह चुकी हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, उनका पद और संपर्क जाल भोपाल की सत्र अदालत में चल रही कार्यवाही की निष्पक्षता को खतरे में डाल सकता है।
हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया कि गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह — जो मृतका के पति और इस मामले में सह-आरोपी हैं — भोपाल में ही वकालत करते हैं, जिससे स्थानीय न्यायिक तंत्र पर उनके प्रभाव की आशंका और बढ़ जाती है।
सबूत छेड़छाड़ का गंभीर आरोप
सीबीआई ने जांच के हवाले से दावा किया कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत के बाद घटनास्थल से छेड़छाड़ करने और सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया। हलफनामे के अनुसार, उन्होंने एक तकनीशियन को बुलाकर संबंधित अवधि की सीसीटीवी फुटेज की प्रतियाँ हासिल कीं।
इसके अलावा, 13 मई 2026 को उन्होंने एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर के मालिक से संपर्क कर ट्विशा के अंतिम दिन के दौरे की जानकारी माँगी और कुछ व्यक्तियों के माध्यम से उस दिन की सीसीटीवी फुटेज एकट्ठा करने की व्यवस्था की। जांच एजेंसी के अनुसार, इन परिस्थितियों से यह संदेह और पुख्ता होता है कि निष्पक्ष ट्रायल के लिए मामले को भोपाल से बाहर ले जाना ज़रूरी है।
मामले की पृष्ठभूमि
12 मई 2026 की रात को ट्विशा शर्मा भोपाल स्थित अपने ससुराल में फाँसी पर लटकी हुई पाई गई और उन्हें एम्स भोपाल में मृत घोषित किया गया। इसके बाद कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत दहेज उत्पीड़न और क्रूरता का मामला दर्ज किया गया।
मध्य प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी, जिसने सर्वोच्च न्यायालय के स्वतः संज्ञान के बाद 25 मई 2026 को मामला पुनः दर्ज किया। सीबीआई ने 17 अगस्त 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत आरोपत्र दाखिल किया। दहेज हत्या और अन्य पहलुओं से जुड़ी आगे की जांच अभी जारी बताई जा रही है।
स्थानांतरण याचिका और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरण याचिका दाखिल की है, जिसमें भोपाल के दसवें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित मुकदमे को दिल्ली की किसी सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की माँग की गई है। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश में उनकी बेटी को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल सकती।
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 को भोपाल अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी और सीबीआई, गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह को नोटिस जारी किया। 30 अक्टूबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई संभावित रूप से 19 नवंबर 2026 को होगी।
आगे क्या होगा
निचली अदालत मामले का संज्ञान ले चुकी है और कार्यवाही आरोप तय करने पर बहस के चरण तक पहुँच गई है। सर्वोच्च न्यायालय के अगले आदेश तक भोपाल में ट्रायल पर रोक जारी रहेगी। 19 नवंबर 2026 की सुनवाई यह तय करेगी कि मुकदमा दिल्ली स्थानांतरित होगा या भोपाल में जारी रहेगा — जो इस पूरे मामले में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।