भावनगर में अवैध खनन नेटवर्क का पर्दाफाश: व्हाट्सएप ग्रुप से अधिकारियों की निगरानी करने वाले दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के भावनगर जिले में 29 अक्टूबर 2026 को भावनगर लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों की गतिविधियों पर नज़र रखकर अवैध खनन में लिप्त लोगों को ऑडियो अलर्ट भेजते थे। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी 'जय रामाधानी' नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप संचालित कर रहे थे और प्रत्येक सदस्य से इस 'सेवा' के बदले ₹1,000 प्रति माह वसूलते थे।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी भावनगर के पुराने कलेक्ट्रेट ऑफिस के प्रवेश द्वार के निकट बैठकर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और अन्य सरकारी अधिकारियों के वाहनों की आवाजाही पर नज़र रखते थे। जैसे ही कोई आधिकारिक दल निकलता, ये व्हाट्सएप ग्रुप में ऑडियो मैसेज भेजकर खनन गतिविधियों में शामिल सदस्यों को सतर्क कर देते थे, ताकि वे समय रहते कार्रवाई से बच सकें।
गौरतलब है कि यह नेटवर्क एक संगठित व्यावसायिक मॉडल पर चल रहा था — अलर्ट देने के बदले हर सदस्य से मासिक शुल्क वसूला जाता था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में अवैध खनन के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों ने विशेष अभियान छेड़ने के निर्देश दिए हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
भावनगर ग्रामीण के एसडीएम एमडी परमार को संदेह हुआ कि पुराने कलेक्ट्रेट ऑफिस के बाहर बैठे दो व्यक्ति उन पर और अन्य अधिकारियों पर नज़र रख रहे हैं। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद एलसीबी की एक टीम मौके पर पहुँची और दोनों को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप संचालित करने और अधिकारियों की जानकारी सदस्यों के साथ साझा करने की बात स्वीकार की। परमार ने नीलांबाग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद औपचारिक मामला दर्ज किया गया।
आरोपियों की पहचान और बरामदगी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भागीरथसिंह वाला — निवासी श्रमजीवी सोसाइटी, शिवाजी सर्कल के निकट, भावनगर — और रोहित राठौड़ — निवासी रुवा गांव, एयरपोर्ट रोड, भावनगर — के रूप में की गई है। पुलिस ने उनके पास से एक मोटरसाइकिल और एक मोबाइल फोन ज़ब्त किया है।
पुलिस टीम और कार्रवाई का आधार
यह कार्रवाई एलसीबी के इंस्पेक्टर एच. बी. चौहान के नेतृत्व में की गई। इसमें सब-इंस्पेक्टर आर. ए. वढेर, वी. सी. जडेजा, पी. डी. झाला और वी. बी. चौधरी सहित अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई वरिष्ठ स्तर के उन निर्देशों के अनुपालन में हुई, जिनमें अवैध खनन नेटवर्क में शामिल और अधिकारियों की कार्रवाई से उन्हें बचाने वाले लोगों की पहचान करने को कहा गया था।
आगे की जाँच
दोनों आरोपियों को आगे की जाँच के लिए पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है। जाँच एजेंसियाँ इस व्हाट्सएप ग्रुप के अन्य सदस्यों की पहचान और अवैध खनन के व्यापक नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं। यह देखना अहम होगा कि आगामी जाँच में इस ऑपरेशन के कितने और सूत्र सामने आते हैं।