व्हाट्सऐप 'पंप-एंड-डंप' शेयर घोटाले में ईडी की कार्रवाई, छह शहरों में 29 ठिकानों पर छापे; ₹200 करोड़ के खाते फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 अक्टूबर 2026 को व्हाट्सऐप के जरिए कथित तौर पर संचालित 'पंप-एंड-डंप' शेयर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र और गुजरात के छह शहरों में 29 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की। जांच के दायरे में आए व्यक्तियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के लगभग ₹200 करोड़ मूल्य के ट्रेडिंग खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।
कहाँ-कहाँ हुई छापेमारी
यह कार्रवाई ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय-1 ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की। छापे मुंबई और नासिक (महाराष्ट्र) तथा अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर (गुजरात) में पड़े। तलाशी ली गई परिसरों में दोनों संबद्ध कंपनियों के दफ्तर, उनके प्रमोटरों के आवास, कम कीमत पर शेयर पाने वाले लोगों के ठिकाने, स्टॉक ब्रोकिंग और फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय, तथा व्हाट्सऐप प्रचार समूह चलाने के संदेह वाले व्यक्तियों से जुड़े परिसर शामिल हैं।
घोटाले का तरीका और संबद्ध कंपनियाँ
जांच का केंद्र सूचीबद्ध कंपनियों आर एम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड (आरएमडीएसएसएल) और आर एंड बी डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में कथित हेरफेर है। ईडी के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच इन दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और परिवर्तनीय वारंट जारी किए थे।
एजेंसी का आरोप है कि इन शेयरों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई बड़ी रकम कुछ आपस में जुड़े व्यक्तियों, कंपनियों और उधारदाताओं के एक छोटे समूह से आई थी। बाद में शेयरों की कीमतें कथित तौर पर कृत्रिम रूप से बढ़ाई गईं, जबकि बड़ी संख्या में शेयर पहले से ही उन्हीं लोगों के पास बने रहे।
व्हाट्सऐप ग्रुप्स का इस्तेमाल और खुदरा निवेशकों को नुकसान
जांच के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच 'मल्टीबैगर स्टॉक्स' जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए रोजाना खुदरा निवेशकों को इन शेयरों को खरीदने की सलाह दी जाती थी। ईडी ने कहा कि ये व्हाट्सऐप समूह हरियाणा और मुंबई के अन्य लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड का उपयोग कर चलाए जा रहे थे, जबकि इनके संचालन का केंद्र कथित तौर पर भावनगर था।
गौरतलब है कि इस प्रचार अभियान के कारण खरीदारों की संख्या, ट्रेडिंग वॉल्यूम और शेयरों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। इसके बाद प्राथमिक आवंटन पाने वाले लोगों ने बढ़ती मांग का फायदा उठाकर अपने शेयर बड़ी संख्या में आम निवेशकों को बेच दिए — यही 'पंप-एंड-डंप' रणनीति का मूल है। प्रचार के लिए व्हाट्सऐप के अलावा एक्स (पूर्व में ट्विटर), एसएमएस और अन्य माध्यमों का भी उपयोग किया गया।
चिह्नित लाभार्थी और जब्त सामग्री
तलाशी के दौरान ईडी ने कई आपस में जुड़े पारिवारिक लाभार्थियों की पहचान की, जिनमें एफ्लुएंस जेम्स, कावा एचयूएफ और कोमाले कंसल्टेंसी से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, इन लाभार्थियों ने कम कीमत पर प्राथमिक वारंट के जरिए शेयर हासिल किए थे।
छापेमारी में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, शेयर लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्तियों से संबंधित कागजात जब्त किए गए हैं। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी संभव है।