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व्हाट्सएप पर बॉस बनकर ₹3 करोड़ की साइबर ठगी, अहमदाबाद पुलिस ने 5 घंटे में ₹2.94 करोड़ फ्रीज किए

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व्हाट्सएप पर बॉस बनकर ₹3 करोड़ की साइबर ठगी, अहमदाबाद पुलिस ने 5 घंटे में ₹2.94 करोड़ फ्रीज किए

सारांश

व्हाट्सएप पर बॉस का हमशक्ल बनकर ₹3 करोड़ उड़ा लिए — लेकिन अहमदाबाद पुलिस ने 5 घंटे में ₹2.94 करोड़ फ्रीज कर साइबर ठगी के खिलाफ एक मिसाल कायम की। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक फैले ट्रेल की जांच जारी है।

मुख्य बातें

18 अगस्त 2026 को चांगोदर, अहमदाबाद स्थित दवा कंपनी 'प्योर एंड क्योर' के लेखाकार हार्दिक पटेल से व्हाट्सएप पर बॉस का रूप धारण कर ₹3 करोड़ की ठगी हुई।
जालसाजों ने वरिष्ठ अधिकारी की व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो, नाम और भाषाशैली का हूबहू उपयोग किया।
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस और एलसीबी साइबर सेल ने मात्र 4–5 घंटों में ₹2.94 करोड़ फ्रीज किए।
अदालत के आदेश के बाद ₹2.88 करोड़ पीड़ित कंपनी को वापस किए गए; ₹6 लाख की वसूली प्रक्रिया जारी।
धन का ट्रेल आंध्र प्रदेश (गुंटूर) , मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक फैला; पुलिस टीम जांच के लिए रवाना।
डीएसपी तपनसिंह डोडिया के अनुसार, यह जांचा जा रहा है कि गुंटूर खाता 'मनी म्यूल' था या खाताधारक स्वयं आरोपी।

अहमदाबाद की चांगोदर स्थित दवा कंपनी 'प्योर एंड क्योर' के लेखाकार हार्दिक पटेल के साथ 18 अगस्त 2026 को ₹3 करोड़ की साइबर ठगी हुई, जिसमें जालसाजों ने व्हाट्सएप पर उनके वरिष्ठ अधिकारी का नाम, तस्वीर और प्रोफाइल इस्तेमाल कर उन्हें धोखे में रखा। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस और एलसीबी साइबर सेल के संयुक्त त्वरित हस्तक्षेप से मात्र 4 से 5 घंटों के भीतर ₹2.94 करोड़ फ्रीज कर लिए गए, और बाद में अदालती आदेश के बाद ₹2.88 करोड़ पीड़ित कंपनी को लौटा दिए गए।

कैसे हुई ठगी

18 अगस्त की सुबह हार्दिक पटेल को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए। उस अकाउंट की डिस्प्ले पिक्चर और प्रोफाइल विवरण उनके असली बॉस से हूबहू मिलते-जुलते थे। डीएसपी तपनसिंह डोडिया के अनुसार, 'नंबर अज्ञात था, लेकिन व्हाट्सएप की डिस्प्ले पिक्चर, प्रोफाइल डिटेल्स और बोलने का तरीका — सब उनके बॉस से मिलता-जुलता था, जिसके कारण हार्दिकभाई को लगा कि वे अपने असली वरिष्ठ से बात कर रहे हैं।'

नकली संदेश में पटेल को कंपनी के खाते से ₹3 करोड़ का वित्तीय लेनदेन करने का निर्देश दिया गया। डोडिया के मुताबिक, प्योर एंड क्योर नियमित रूप से कच्चे एपीआई और अन्य कच्चे माल की खरीद करती है, और इस तरह के उच्च मूल्य के लेनदेन कंपनी के सामान्य कारोबार का हिस्सा हैं — इसीलिए पटेल को तुरंत संदेह नहीं हुआ।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

लेनदेन पूरा होते ही पटेल ने अपने असली वरिष्ठ अधिकारी को फोन कर भुगतान की सूचना दी — और उसी बातचीत में उन्हें ठगी का अहसास हुआ। पुलिस को तत्काल सूचना दी गई। चांगोदर पुलिस स्टेशन और एलसीबी साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 4 से 5 घंटों के भीतर संबंधित खाते फ्रीज कर दिए। डोडिया ने बताया कि फ्रीज के लिए त्वरित कार्रवाई संभव इसलिए हो पाई क्योंकि दोनों इकाइयों ने समन्वय से काम किया।

धन का मार्ग और जांच

जांच में सामने आया कि शुरुआती ₹3 करोड़ सबसे पहले आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के गोकुल गुरुवर्धन नामक व्यक्ति के प्राथमिक खाते में स्थानांतरित हुए। उस खाते से ₹6-6 लाख के दो लेनदेन — कुल ₹12 लाख — दो अन्य खातों में किए गए। इनमें से एक खाता मध्य प्रदेश के उपदेश यादव का था और दूसरा जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति का।

डोडिया ने बताया कि पुलिस की एक टीम जांच के लिए दूसरे राज्य रवाना हो चुकी है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि गुंटूर का खाता जालसाजों का गुप्त (मनी म्यूल) खाता था या खाताधारक स्वयं इस अपराध में संलिप्त था। डोडिया ने कहा, 'पूरे लेनदेन की जांच होगी — क्या इतनी बड़ी राशि पहले भी उस खाते में आई थी, क्या लेनदेन संदिग्ध थे — यह सब तभी स्पष्ट होगा।'

वसूली की स्थिति

फ्रीज की गई ₹2.94 करोड़ की राशि में से ₹2.88 करोड़ अदालत के आदेश के बाद शिकायतकर्ता को लौटा दिए गए हैं। शेष ₹6 लाख अभी भी बकाया हैं, क्योंकि वे एसबीआई खाते में हैं और बैंक की आंतरिक प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। पुलिस के अनुसार, बैंकिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि भी वापस कर दी जाएगी।

व्यापक संदर्भ और सतर्कता

यह घटना ऐसे समय में आई है जब देशभर में व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए 'बॉस फ्रॉड' या 'सीईओ फ्रॉड' के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि साइबर अपराधी अब केवल अज्ञात नंबरों पर निर्भर नहीं रहते — वे असली अधिकारी की भाषाशैली, प्रोफाइल फोटो और पद का उपयोग कर कर्मचारियों को विश्वास दिलाते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले अनुरोध की पुष्टि सीधे फोन कॉल पर की जाए। अहमदाबाद पुलिस ने इस मामले में रिकॉर्ड त्वरित कार्रवाई कर ₹2.94 करोड़ बचाए, जो अन्य जिलों के लिए एक आदर्श उदाहरण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अधिकांश कंपनियों में वित्तीय लेनदेन के लिए 'दो-चरणीय सत्यापन' प्रोटोकॉल नहीं है। जब तक कंपनियाँ आंतरिक प्रक्रियाएँ नहीं बदलतीं, पुलिस की तेज़ी पर्याप्त नहीं होगी।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में व्हाट्सएप बॉस फ्रॉड क्या था?
18 अगस्त 2026 को अहमदाबाद की दवा कंपनी 'प्योर एंड क्योर' के लेखाकार हार्दिक पटेल को व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आए, जिसमें उनके बॉस की प्रोफाइल फोटो और भाषाशैली का उपयोग किया गया था। भरोसे में आकर उन्होंने कंपनी के खाते से ₹3 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने कितनी रकम वापस दिलाई?
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस और एलसीबी साइबर सेल ने 4–5 घंटों में ₹2.94 करोड़ फ्रीज किए। इसमें से अदालत के आदेश के बाद ₹2.88 करोड़ पीड़ित कंपनी को वापस किए गए। शेष ₹6 लाख की वसूली प्रक्रिया जारी है।
ठगी का पैसा कहाँ गया?
जांच के अनुसार, ₹3 करोड़ सबसे पहले आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के गोकुल गुरुवर्धन के खाते में गए। वहाँ से ₹6-6 लाख के दो लेनदेन मध्य प्रदेश के उपदेश यादव और जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति के खाते में किए गए।
क्या किसी को गिरफ्तार किया गया?
अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की एक टीम आंध्र प्रदेश में गोकुल गुरुवर्धन की जांच के लिए रवाना हो चुकी है। डीएसपी तपनसिंह डोडिया के अनुसार, यह स्पष्ट होना बाकी है कि वह स्वयं आरोपी है या उसका खाता 'मनी म्यूल' के रूप में इस्तेमाल हुआ।
व्हाट्सएप बॉस फ्रॉड से कैसे बचें?
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले अनुरोध की पुष्टि सीधे फोन कॉल पर करें — केवल व्हाट्सएप संदेश पर भरोसा न करें। कंपनियों को बड़े ट्रांसफर के लिए 'दो-चरणीय सत्यापन' प्रोटोकॉल लागू करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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