व्हाट्सएप पर बॉस बनकर ₹3 करोड़ की साइबर ठगी, अहमदाबाद पुलिस ने 5 घंटे में ₹2.94 करोड़ फ्रीज किए
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद की चांगोदर स्थित दवा कंपनी 'प्योर एंड क्योर' के लेखाकार हार्दिक पटेल के साथ 18 अगस्त 2026 को ₹3 करोड़ की साइबर ठगी हुई, जिसमें जालसाजों ने व्हाट्सएप पर उनके वरिष्ठ अधिकारी का नाम, तस्वीर और प्रोफाइल इस्तेमाल कर उन्हें धोखे में रखा। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस और एलसीबी साइबर सेल के संयुक्त त्वरित हस्तक्षेप से मात्र 4 से 5 घंटों के भीतर ₹2.94 करोड़ फ्रीज कर लिए गए, और बाद में अदालती आदेश के बाद ₹2.88 करोड़ पीड़ित कंपनी को लौटा दिए गए।
कैसे हुई ठगी
18 अगस्त की सुबह हार्दिक पटेल को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए। उस अकाउंट की डिस्प्ले पिक्चर और प्रोफाइल विवरण उनके असली बॉस से हूबहू मिलते-जुलते थे। डीएसपी तपनसिंह डोडिया के अनुसार, 'नंबर अज्ञात था, लेकिन व्हाट्सएप की डिस्प्ले पिक्चर, प्रोफाइल डिटेल्स और बोलने का तरीका — सब उनके बॉस से मिलता-जुलता था, जिसके कारण हार्दिकभाई को लगा कि वे अपने असली वरिष्ठ से बात कर रहे हैं।'
नकली संदेश में पटेल को कंपनी के खाते से ₹3 करोड़ का वित्तीय लेनदेन करने का निर्देश दिया गया। डोडिया के मुताबिक, प्योर एंड क्योर नियमित रूप से कच्चे एपीआई और अन्य कच्चे माल की खरीद करती है, और इस तरह के उच्च मूल्य के लेनदेन कंपनी के सामान्य कारोबार का हिस्सा हैं — इसीलिए पटेल को तुरंत संदेह नहीं हुआ।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
लेनदेन पूरा होते ही पटेल ने अपने असली वरिष्ठ अधिकारी को फोन कर भुगतान की सूचना दी — और उसी बातचीत में उन्हें ठगी का अहसास हुआ। पुलिस को तत्काल सूचना दी गई। चांगोदर पुलिस स्टेशन और एलसीबी साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 4 से 5 घंटों के भीतर संबंधित खाते फ्रीज कर दिए। डोडिया ने बताया कि फ्रीज के लिए त्वरित कार्रवाई संभव इसलिए हो पाई क्योंकि दोनों इकाइयों ने समन्वय से काम किया।
धन का मार्ग और जांच
जांच में सामने आया कि शुरुआती ₹3 करोड़ सबसे पहले आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के गोकुल गुरुवर्धन नामक व्यक्ति के प्राथमिक खाते में स्थानांतरित हुए। उस खाते से ₹6-6 लाख के दो लेनदेन — कुल ₹12 लाख — दो अन्य खातों में किए गए। इनमें से एक खाता मध्य प्रदेश के उपदेश यादव का था और दूसरा जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति का।
डोडिया ने बताया कि पुलिस की एक टीम जांच के लिए दूसरे राज्य रवाना हो चुकी है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि गुंटूर का खाता जालसाजों का गुप्त (मनी म्यूल) खाता था या खाताधारक स्वयं इस अपराध में संलिप्त था। डोडिया ने कहा, 'पूरे लेनदेन की जांच होगी — क्या इतनी बड़ी राशि पहले भी उस खाते में आई थी, क्या लेनदेन संदिग्ध थे — यह सब तभी स्पष्ट होगा।'
वसूली की स्थिति
फ्रीज की गई ₹2.94 करोड़ की राशि में से ₹2.88 करोड़ अदालत के आदेश के बाद शिकायतकर्ता को लौटा दिए गए हैं। शेष ₹6 लाख अभी भी बकाया हैं, क्योंकि वे एसबीआई खाते में हैं और बैंक की आंतरिक प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। पुलिस के अनुसार, बैंकिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि भी वापस कर दी जाएगी।
व्यापक संदर्भ और सतर्कता
यह घटना ऐसे समय में आई है जब देशभर में व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए 'बॉस फ्रॉड' या 'सीईओ फ्रॉड' के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि साइबर अपराधी अब केवल अज्ञात नंबरों पर निर्भर नहीं रहते — वे असली अधिकारी की भाषाशैली, प्रोफाइल फोटो और पद का उपयोग कर कर्मचारियों को विश्वास दिलाते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले अनुरोध की पुष्टि सीधे फोन कॉल पर की जाए। अहमदाबाद पुलिस ने इस मामले में रिकॉर्ड त्वरित कार्रवाई कर ₹2.94 करोड़ बचाए, जो अन्य जिलों के लिए एक आदर्श उदाहरण है।