गुजरात फॉरेन स्टडी लोन: आय सीमा ₹6 लाख से बढ़कर ₹10 लाख, 16,607 विद्यार्थी पहले ही उठा चुके लाभ
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 22 सितंबर 2026 को अपनी फॉरेन स्टडी लोन योजना के तहत पात्रता की वार्षिक आय सीमा ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी है, जिससे राज्य के मध्यमवर्गीय परिवारों के अधिक विद्यार्थी विदेश में उच्च शिक्षा के लिए ₹15 लाख तक की ऋण सहायता पाने के योग्य हो सकेंगे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार के इस फैसले से ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले अनारक्षित श्रेणी के छात्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
योजना का दायरा और ऋण की शर्तें
इस योजना के अंतर्गत 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले अनारक्षित श्रेणी के विद्यार्थियों को अधिकतम ₹15 लाख की स्टडी लोन सहायता प्रदान की जाती है। नई आय सीमा लागू होने के बाद अब वे परिवार भी इस योजना के दायरे में आ सकेंगे जिनकी वार्षिक आय ₹6 लाख से अधिक किंतु ₹10 लाख तक है — यानी मध्यमवर्ग का वह तबका जो अब तक योजना से बाहर था।
यह ऐसे समय में आया है जब विदेश में उच्च शिक्षा की लागत लगातार बढ़ रही है और भारतीय परिवारों के लिए बिना संस्थागत ऋण के इसे वहन करना कठिन होता जा रहा है।
योजना का अब तक का प्रदर्शन
गुजरात अनारक्षित शैक्षिक एवं आर्थिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक ए.के. जोशी के अनुसार, यह योजना 2018-19 में शुरू हुई थी और तब से अब तक 16,607 विद्यार्थी इसका लाभ उठा चुके हैं। राज्य सरकार इस योजना के माध्यम से अब तक कुल ₹2,450 करोड़ की ऋण सहायता वितरित कर चुकी है। गौरतलब है कि यह आँकड़ा योजना की व्यापक पहुँच और बढ़ती माँग को दर्शाता है।
लाभार्थी की आवाज़
योजना के एक लाभार्थी प्रवीण भाई ने बताया कि उनका बेटा ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहा है — एक वर्ष पूरा हो चुका है और एक वर्ष अभी शेष है। उनके परिवार को इस योजना के तहत ₹15 लाख की ऋण सहायता मिली है, जिसकी किस्तें नियमित रूप से चुकाई जा रही हैं।
एस्पायर स्क्वायर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मौलिक रावल के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल है — विद्यार्थियों को निर्धारित दस्तावेज़ जमा करने होते हैं, जिसके बाद ऋण के लिए आवेदन किया जा सकता है।
आम विद्यार्थियों पर असर
आय सीमा में यह वृद्धि विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्त्वपूर्ण है जो न तो आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग में आते हैं और न ही इतने सम्पन्न हैं कि विदेश में पढ़ाई का खर्च स्वयं वहन कर सकें। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में स्नातक या स्नातकोत्तर शिक्षा की वार्षिक लागत प्रायः ₹15 लाख से अधिक होती है, ऐसे में यह ऋण सहायता एक महत्त्वपूर्ण वित्तीय सेतु का काम कर सकती है।
आगे क्या
नई आय सीमा लागू होने के बाद योजना के संभावित लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक मध्यमवर्गीय परिवारों को वैश्विक उच्च शिक्षा के अवसरों से जोड़ना है। आने वाले शैक्षणिक सत्र में नए आवेदनों की संख्या इस नीतिगत बदलाव की वास्तविक सफलता का पैमाना होगी।