गुजरात की पालक माता-पिता योजना: 22,224 अनाथ बच्चों को ₹41 करोड़ की सहायता, जानें कैसे मिलेगा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की पालक माता-पिता योजना (फोस्टर पेरेंट स्कीम) राज्य के अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 22,224 बच्चों को ₹41.11 करोड़ की आर्थिक सहायता दी गई, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21,881 लाभार्थियों को कुल ₹80.81 करोड़ प्रदान किए गए। यह योजना महज आर्थिक मदद तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित पारिवारिक माहौल में पालने-पोसने का एक व्यापक ढाँचा है।
योजना का स्वरूप और पात्रता
इस योजना के अंतर्गत 18 वर्ष तक के अनाथ बच्चों के करीबी रिश्तेदारों — जैसे मामा, चाचा, दादा-दादी — और पालक माता-पिता को शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। गांधीनगर के बाल सुरक्षा अधिकारी संजय पटेल के अनुसार, 'जो बच्चे अनाथ होते हैं, उनकी देखभाल उनके मामा, चाचा और दादा-दादी करते हैं, और यह स्कीम खास तौर पर ऐसे बच्चों की पढ़ाई के लिए है।'
योजना का लाभ उठाने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। आवेदन के बाद बाल कल्याण समिति बच्चे के लिए केयर प्लान और होम इंस्पेक्शन रिपोर्ट तैयार करती है, और तत्पश्चात लाभार्थी के खाते में मासिक सहायता राशि अंतरित की जाती है।
लाभार्थियों की आवाज़
लाभार्थी स्नेहा चौधरी ने बताया, 'पालक माता-पिता योजना के अंतर्गत हमें सरकार से हर महीने ₹3,000 मिलते हैं। इससे हमें शिक्षा में बहुत मदद मिली है, जिससे मैं ट्यूशन क्लास कर सकती हूं। इस सहायता से मैंने बहुत पढ़ाई की है।'
लाभार्थी मीत पटेल ने कहा, 'पालक माता-पिता स्कीम के तहत मुझे हर महीने सरकार से ₹3,000 मिलते हैं। मेरे खाते में जो ₹3,000 आते थे, उससे मेरी स्कूल फीस और ट्यूशन की फीस भर जाती थी। मैं अपना पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पूरा करने वाला हूं।' यह कहानियाँ दर्शाती हैं कि मामूली मासिक सहायता किस तरह बच्चों के शैक्षिक सफर को बदल सकती है।
बाल कल्याण समिति की भूमिका
अहमदाबाद की बाल कल्याण समिति की सदस्य अलकाबेन रावल ने बताया, 'आवेदन के बाद हम बच्चे के लिए केयर प्लान बनाते हैं, उसकी होम इंस्पेक्शन रिपोर्ट और सब कुछ तैयार करने के बाद हम आदेश देते हैं कि बच्चे को स्पॉन्सरशिप स्कीम का लाभ दिया जाए।' उनके अनुसार, पालक माता-पिता योजना और स्पॉन्सरशिप स्कीम दोनों का एकमात्र उद्देश्य यह है कि बच्चे की परवरिश बेहतर तरीके से पारिवारिक माहौल में हो।
गौरतलब है कि यह प्रक्रिया केवल वित्तीय अंतरण नहीं, बल्कि एक निगरानी तंत्र भी है जो बच्चे की प्रगति की समय-समय पर समीक्षा सुनिश्चित करती है।
व्यापक बाल कल्याण ढाँचा
पालक माता-पिता योजना गुजरात के व्यापक बाल कल्याण ढाँचे का एक हिस्सा है। राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा के लिए वाहली दीकरी योजना, मुख्यमंत्री अल्पाहार योजना, डिजिटल हेल्थ पासपोर्ट, नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना और नमो लक्ष्मी योजना जैसी कई योजनाएँ एक साथ संचालित हो रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में अनाथ और कमज़ोर वर्ग के बच्चों की देखभाल के लिए नीतिगत ढाँचे को मज़बूत करने की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
आगे की राह
आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 की तुलना में 2026 की पहली छमाही में लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि दर्ज हुई है, जो योजना की बढ़ती पहुँच का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाने और दूरदराज के ज़िलों में जागरूकता अभियान चलाने से लाभार्थियों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। यह योजना आत्मनिर्भर और सशक्त पीढ़ी गढ़ने की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।