गुजरात आंगनवाड़ी भोजन बजट 67% बढ़ा: ₹5.10 से ₹8.50 प्रति बच्चे, 16.17 लाख बच्चों को फायदा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने राज्य की 53,065 आंगनवाड़ियों में 16.17 लाख से अधिक बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन की दैनिक दर में 67 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹5.10 से बढ़ाकर ₹8.50 प्रति बच्चे प्रतिदिन कर दिया है। 14 अक्टूबर 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई इस घोषणा से राज्य पर सालाना करीब ₹80 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। यह निर्णय एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के अंतर्गत तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों पर लागू होगा।
संशोधित वित्तीय व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत पहले से निर्धारित ₹5.10 प्रति लाभार्थी प्रतिदिन में केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी यथावत बनी रहेगी। अतिरिक्त ₹3.40 प्रति बच्चे का पूरा खर्च गुजरात सरकार स्वयं वहन करेगी, जिससे केंद्र सरकार के मौजूदा योगदान में कोई बदलाव नहीं होगा। इस प्रकार बढ़ी हुई राशि से स्थानीय स्तर पर खाद्य सामग्री की खरीद के लिए भी अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
नए मेन्यू में क्या-क्या शामिल
विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, प्रतिदिन की निर्धारित राशि में तुअर दाल के लिए ₹1.24, साबुत चने के लिए 85 पैसे, साबुत मूंग के लिए ₹1.30, गुड़ के लिए 52.5 पैसे, मौसमी हरी सब्जियों के लिए 83 पैसे और फलों के लिए ₹2 रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त मूंगफली या तिल के लिए 65 पैसे, मसालों के लिए 60 पैसे और स्थानीय परिवहन के लिए 50 पैसे का प्रावधान किया गया है।
साप्ताहिक मेन्यू में साबुत मूंग को विशेष रूप से शामिल किया गया है। बच्चों को सुबह 11 बजे गर्म नाश्ता और दोपहर 1:30 बजे गर्म भोजन दिया जाएगा। परोसे जाने वाले व्यंजनों में उबली हुई या अंकुरित मूंग, गाढ़ी तुअर दाल, सब्जियों वाला पुलाव, हरी सब्जियों से बनी मुठिया, मसालेदार चने, चावल के साथ मूंग और मौसमी फल शामिल हैं।
इसके अलावा शीरा, सुखड़ी, लौकी का ढेबरा, गुड़ का पुडला, भाखरी, ढोकला और इडली जैसे पारंपरिक गुजराती व्यंजन भी मेन्यू का हिस्सा होंगे — जो स्थानीय खान-पान की संस्कृति से बच्चों को जोड़ने का प्रयास है।
सरकार की प्राथमिकता और नेतृत्व
अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील के मार्गदर्शन में लिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संशोधित व्यवस्था के तहत न केवल वित्तीय सहायता बढ़ाई जाएगी, बल्कि मेन्यू में विविधता और खाद्य सामग्री की स्थानीय खरीद को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
आम जनता और बच्चों पर असर
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब बाल कुपोषण के आँकड़े देश के अनेक राज्यों में अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। गुजरात में 53,065 आंगनवाड़ियों के ज़रिए ICDS का विस्तृत नेटवर्क मौजूद है, और बढ़ी हुई दर से पोषण की गुणवत्ता में ठोस सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि पहले ₹5.10 की दर वर्षों से अपरिवर्तित थी, जिसके कारण वास्तविक बाज़ार भाव के सापेक्ष भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।
नई दर लागू होने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थानीय बाज़ार से ताज़ी और पोषक सामग्री खरीदने में आसानी होगी। आगे आने वाले महीनों में विभाग द्वारा कार्यान्वयन की निगरानी और परिणामों की समीक्षा अपेक्षित है।