गुजरात पोल्ट्री फार्म सहाय योजना: SC/ST को ₹8.15 लाख तक मदद, हर साल 78 परिवारों को लाभ
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के पशुपालन विभाग ने वर्ष 2024-25 में शुरू की गई पोल्ट्री फार्म सहाय योजना के ज़रिये राज्य के ग्रामीण परिवारों को मुर्गी पालन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के तहत 1000 ब्रायलर की क्षमता वाला पोल्ट्री फार्म स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रशिक्षण और विभागीय परामर्श एक साथ दिया जाता है।
योजना की संरचना और वित्तीय सहायता
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को दो किस्तों में सहायता राशि दी जाती है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लाभार्थियों को पहली किस्त में ₹3,60,000 और दूसरी किस्त में ₹4,55,000 — यानी कुल ₹8,15,000 की सहायता दी जाती है। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को पहली किस्त में ₹3,00,000 और दूसरी किस्त में ₹3,79,000 — यानी कुल ₹6,79,000 की सहायता मिलती है।
उप निदेशक (मुर्गा शाखा) धीरेंद्र कापड़िया के अनुसार, गुजरात में प्रतिवर्ष लगभग 78 लाभार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जाता है — जिनमें अनुसूचित जाति के 15, अनुसूचित जनजाति के 30 और सामान्य वर्ग के 33 लाभार्थी शामिल हैं।
ज़मीनी बदलाव: फखरुद्दीन की कहानी
अहमदाबाद की बावला तालुका के रूपाल गाँव के निवासी फखरुद्दीन इस योजना के लाभार्थियों में से एक हैं। उन्होंने बताया, 'मुझे अधिकारी से यह पता चला कि इस योजना में 1000 ब्रायलर का पोल्ट्री फार्म बनाने के लिए सहायता मिलती है। फिर मैंने फॉर्म भरा और मेरा फॉर्म पास हुआ। मुझे ₹6,79,500 की सहायता मिली और आज मैं खुद भी कमाता हूँ और दो लोगों को रोज़गार देता हूँ।'
उनके फार्म में काम करने वाली गंगाबेन ने बताया कि वे सुबह फार्म पर आती हैं और दिनभर मुर्गियों को दाना-पानी देती हैं। इस काम से उन्हें नियमित आमदनी मिलती है। यह उदाहरण दर्शाता है कि यह योजना सिर्फ फार्म संचालक तक नहीं, बल्कि आसपास के परिवारों तक भी आर्थिक अवसर पहुँचाती है।
तकनीकी प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग
पशुपालन विभाग योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को मुर्गियों के पालन-पोषण, खानपान, स्वच्छता, रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित समय-समय पर प्रशिक्षण देता है। नायब पशुपालन अधिकारी डॉ. एच.जी. पटेल ने बताया, 'लाभार्थियों से टेलीफोन के माध्यम से संपर्क में रहते हैं और उनको जब हमारी कोई ज़रूरत पड़े तो हम जानकारी देते रहते हैं। इसके अलावा दवाओं, बीमारी के प्रश्न या किसी गाइडलाइन के लिए भी हम मदद करते हैं।'
गौरतलब है कि पशुपालन क्षेत्र में प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का यह संयुक्त मॉडल ग्रामीण स्तर पर योजनाओं की विफलता के उस सामान्य कारण को दूर करता है जहाँ केवल पैसा मिलता है लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन नहीं।
आम जनता पर असर
यह योजना ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब ग्रामीण युवाओं में स्वरोज़गार की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। ₹6.79 लाख से लेकर ₹8.15 लाख तक की सहायता राशि एक छोटे पोल्ट्री व्यवसाय की बुनियाद रखने के लिए पर्याप्त मानी जाती है। प्रति वर्ष 78 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने के साथ-साथ उनके फार्म पर काम करने वाले अतिरिक्त श्रमिकों को भी रोज़गार मिलता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में एक छोटी किंतु स्थिर रोज़गार शृंखला बनती है।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में हर साल बड़ी संख्या में मुर्गी पालक इस योजना का लाभ उठा रहे हैं और आवेदनों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। यह योजना गुजरात सरकार के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है जिसमें ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विभागीय मार्गदर्शन के समन्वय से दीर्घकालिक आजीविका का आधार देना शामिल है।