गुजरात में खेत बाड़बंदी सब्सिडी ₹300 प्रति मीटर, न्यूनतम भूमि सीमा घटाकर 1 हेक्टेयर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 27 मई 2026 को कांटेदार तार बाड़बंदी योजना के तहत वित्तीय सहायता ₹200 प्रति मीटर से बढ़ाकर ₹300 प्रति मीटर कर दी है, साथ ही पात्रता के लिए न्यूनतम भूमि समूह की सीमा दो हेक्टेयर से घटाकर एक हेक्टेयर कर दी गई है। यह निर्णय मानसून से पहले आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।
कैबिनेट का फैसला और नई शर्तें
यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। राज्य के कृषि मंत्री एवं सरकारी प्रवक्ता जीतू वाघानी ने बताया कि किसानों को अब ₹300 प्रति मीटर या वास्तविक खर्च का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो, सहायता राशि दी जाएगी।
वाघानी ने संशोधन का कारण स्पष्ट करते हुए कहा कि सामग्री और श्रम की बाजार लागत में वृद्धि के चलते किसानों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया था, इसलिए सहायता राशि में इजाफा किया गया है।
छोटे किसानों को राहत: पात्रता में बदलाव
पहले इस योजना के अंतर्गत लाभ लेने के लिए सभी श्रेणियों के किसानों को कम से कम दो हेक्टेयर का समूह बनाना अनिवार्य था। अब यह सीमा घटाकर एक हेक्टेयर कर दी गई है।
वाघानी ने बताया कि छोटे किसान अक्सर इस योजना से वंचित रह जाते थे, क्योंकि समूह में किसी एक किसान की असहमति से दो हेक्टेयर का समूह बनाए रखना संभव नहीं होता था। नई सीमा से ऐसे किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
आवेदन प्रक्रिया और बजट आवंटन
मंत्री के अनुसार, आई-खेदुत पोर्टल के माध्यम से अब तक लगभग 1 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए ₹240 करोड़ आवंटित किए हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धनराशि की भी व्यवस्था की जाएगी।
सभी आवेदनों को मानसून से पहले चरणबद्ध तरीके से स्वीकृत किया जाएगा, ताकि किसान कृषि कार्यों में जुटने से पहले बाड़ लगाने का काम पूरा कर सकें।
पोर्टल दोबारा खोलने की सुविधा
पहले इस योजना के लिए आवेदन पोर्टल साल में केवल एक बार खोला जाता था। इस वर्ष अधिकतम किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए, आवश्यकता पड़ने पर पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। यह कदम योजना की पहुँच को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे की राह
गुजरात सरकार का यह फैसला मानसून पूर्व तैयारियों का हिस्सा है। बढ़ी हुई सब्सिडी और सरल पात्रता मानदंडों के साथ, यह देखना होगा कि क्या 1 लाख से अधिक लंबित आवेदनों को मानसून की शुरुआत से पहले निपटाया जा सकता है।