गुजरात में किसानों को बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर मिलेगा बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा, एकमुश्त भुगतान की नई नीति लागू
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 3 जुलाई 2026 को बिजली पारेषण (पावर ट्रांसमिशन) अवसंरचना से प्रभावित कृषि भूमि के मुआवजे में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की। नई नीति के तहत अब किसानों को उनकी जमीन के प्रचलित बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा — पुरानी जंत्री (सरकारी मूल्यांकन) आधारित व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह निर्णय गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में किसान संगठनों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लिया गया।
नई मुआवजा नीति में क्या बदला
अब तक कृषि भूमि से गुजरने वाली बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए जंत्री कीमत का 200 प्रतिशत मुआवजा दिया जाता था। नई व्यवस्था में यह मुआवजा जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का दोगुना होगा। गौरतलब है कि जंत्री मूल्य प्रायः बाजार कीमत से काफी कम होता है, इसलिए यह बदलाव किसानों के लिए वास्तविक अर्थों में बड़ी राहत है।
भुगतान प्रक्रिया में भी आमूल परिवर्तन किया गया है। पहले मुआवजा तीन किस्तों में दिया जाता था — टावर की नींव बनने पर 40 प्रतिशत, टावर खड़ा होने पर 40 प्रतिशत और बिजली तार बिछाने के बाद शेष 20 प्रतिशत। नई नीति के तहत पात्र भूमि मालिकों को 100 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा।
टावर क्षेत्रफल गणना में बदलाव
बिजली ट्रांसमिशन टावरों से प्रभावित भूमि की गणना में भी संशोधन किया गया है। पहले केवल टावर की नींव (फाउंडेशन) के वास्तविक क्षेत्रफल पर मुआवजा मिलता था। नई नीति में टावर के आधार क्षेत्र के चारों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को भी मुआवजा योग्य माना जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन के एक टावर के लिए पहले 625 वर्गमीटर पर मुआवजा मिलता था। अब चारों तरफ एक-एक मीटर जोड़ने के बाद 729 वर्गमीटर क्षेत्र पर मुआवजा देय होगा।
मार्केट रेट कमेटी और पारदर्शिता
बाजार मूल्य के निष्पक्ष निर्धारण के लिए मार्केट रेट कमेटी (एमआरसी) का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रभावित किसानों और अधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा। सरकार के अनुसार इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
ट्रांसमिशन लाइन के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के लिए भी एमआरसी द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा तय किया गया है — ग्रामीण क्षेत्रों में 30 प्रतिशत, नगरपालिका क्षेत्रों में 45 प्रतिशत और नगर निगम क्षेत्रों में 60 प्रतिशत।
सरकार की प्रतिक्रिया और नेतृत्व
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में किसानों के साथ हुई चर्चा के बाद लिया गया। इस प्रक्रिया में कृषि मंत्री जीतू वाघानी, ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल और ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया भी शामिल रहे।
विभिन्न किसान संगठनों की ओर से लंबे समय से मुआवजे के लिए अधिक व्यावहारिक आधार अपनाने की मांग की जा रही थी, जिसके बाद यह बदलाव किया गया।
निर्माणाधीन परियोजनाओं पर भी लागू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों को पुरानी नीति के तहत पहले ही मुआवजा मिल चुका है, लेकिन जिनकी परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं, वे भी संशोधित नीति का लाभ पाने के पात्र होंगे। यह संशोधित नीति गुजरात में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों से जुड़ी सभी परियोजनाओं पर लागू होगी। यह नीति उन किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है जो वर्षों से उचित मुआवजे की प्रतीक्षा में थे।