मत्स्य-6000 का मानवरहित परीक्षण सफल, समुद्रयान परियोजना के लिए बड़ा मील का पत्थर
सारांश
मुख्य बातें
भारत की स्वदेशी गहरे समुद्री पनडुब्बी 'मत्स्य-6000' ने 6 नवंबर 2026 को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित एलएंडटी शिपयार्ड में अपने मानवरहित परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न कर लिए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित यह वाहन देश की महत्वाकांक्षी समुद्रयान परियोजना का केंद्रबिंदु है, जिसका लक्ष्य शोधकर्ताओं को 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाना है।
परीक्षण का विवरण
यह परीक्षण पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमईएस) के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्माला और एनआईओटी के निदेशक जी. ए. रामदास की उपस्थिति में आयोजित किया गया। इस दौरान वाहन की फ्लोटेशन क्षमता, पानी के भीतर स्थिरता, बैलास्ट सिस्टम और विभिन्न उप-घटकों का व्यवस्थित मूल्यांकन किया गया। मंत्रालय के अनुसार, मत्स्य-6000 ने निर्धारित परीक्षण प्रोटोकॉल के तहत सभी मानक पूरे किए, जिससे उन्नत परीक्षणों के अगले चरण का रास्ता साफ हो गया है।
मत्स्य-6000 की तकनीकी विशेषताएँ
एनआईओटी द्वारा डिजाइन यह भारत का चौथी पीढ़ी का मानव-युक्त सबमर्सिबल है। 2.1 मीटर व्यास के गोलाकार प्रेशर हल में यह तीन चालक दल के सदस्यों को ले जाने में सक्षम है।
इसमें स्वदेशी प्रणालियाँ शामिल हैं — मुख्य बैलास्ट सिस्टम, मल्टी-डायरेक्शनल थ्रस्टर्स, ऑनबोर्ड बैटरी बैंक और सिंथेटिक फोम-आधारित संरचनात्मक उछाल प्रणाली। संचार के लिए एकॉस्टिक मॉडेम, अंडरवाटर टेलीफोन और वीएचएफ रेडियो उपकरणों का उपयोग होता है, जबकि पोजिशनिंग के लिए अंडरवाटर एकॉस्टिक सिस्टम और सतह पर जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा है।
वाहन के बाहरी हिस्से में अंडरवाटर लाइटें, कैमरे और समुद्र विज्ञान से जुड़े विविध सेंसर लगे हैं, जो गहरे समुद्री खनिज संसाधनों और जैव विविधता के अन्वेषण में सहायक होंगे।
परीक्षण की पृष्ठभूमि
मत्स्य-6000 को 2025 में कट्टुपल्ली सुविधा केंद्र लाया गया था, जहाँ इसके 'वेट टेस्ट' किए गए। तब से मानव-युक्त और मानवरहित दोनों प्रकार के नियंत्रित परीक्षणों में पावर नेटवर्क की मजबूती, वाहन की स्थिरता, मानव सुरक्षा प्रणालियाँ, नेविगेशन, संचार और वैज्ञानिक पेलोड की जाँच की गई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरिक्ष के साथ-साथ गहरे समुद्र में भी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
सागर मंजूषा की मरम्मत का जायजा
इसी दौरे में एमईएस सचिव और एनआईओटी निदेशक ने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में अनुसंधान पोत 'सागर मंजूषा' के ड्राई-डॉक रिपेयर और रिफिट कार्यों का भी निरीक्षण किया। 2006 में निर्मित यह 60 मीटर लंबा और 11 मीटर चौड़ा बहु-विषयक महासागरीय अनुसंधान पोत 1,065 से 1,075 टन के सकल टनेज के साथ 11 वैज्ञानिकों, 8 अधिकारियों और 10 चालक दल सदस्यों को समायोजित करता है।
आगे क्या
मानवरहित परीक्षणों की सफलता के बाद परियोजना अपने उन्नत परीक्षण चरण की ओर बढ़ेगी। समुद्रयान परियोजना के तहत अंततः मानव-युक्त गहरे समुद्री अभियानों को संचालित करने का लक्ष्य है, जो भारत की पॉलीमेटैलिक नोड्यूल और हाइड्रोथर्मल वेंट्स से जुड़े खनिज अन्वेषण कार्यक्रम को नई गति देगा।