11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नरेश गुजराल से ₹7.8 करोड़ की 'बॉस स्कैम' ठगी, दिल्ली पुलिस ने ₹4 करोड़ फ्रीज किए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नरेश गुजराल से ₹7.8 करोड़ की 'बॉस स्कैम' ठगी, दिल्ली पुलिस ने ₹4 करोड़ फ्रीज किए

सारांश

न हैकिंग, न तकनीकी जाल — बस एक वॉट्सऐप प्रोफाइल फोटो ने पूर्व PM इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल के कर्मचारी को धोखा दिया और ₹7.8 करोड़ उड़ा लिए। दिल्ली पुलिस ने ₹4 करोड़ फ्रीज किए, लेकिन 'बॉस स्कैम' का यह मामला बताता है कि साइबर अपराध के लिए अब तकनीक नहीं, भरोसा ही हथियार बन चुका है।

मुख्य बातें

पूर्व राज्यसभा सदस्य नरेश गुजराल के कर्मचारी से ₹7.8 करोड़ की साइबर ठगी, केवल वॉट्सऐप प्रोफाइल फोटो के दुरुपयोग से।
ठग ने अनजान नंबर पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगाकर खुद को उनका बॉस बताया और आरटीजीएस से रकम ट्रांसफर करवाई।
दिल्ली पुलिस ने 18 जून 2026 को ई-एफआईआर दर्ज कर विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 करोड़ फ्रीज कराए।
इस प्रकार की धोखाधड़ी को 'बॉस स्कैम' कहा जाता है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी बनकर कर्मचारियों से रकम ट्रांसफर करवाई जाती है।
पुलिस अब शेष ₹3.8 करोड़ की बरामदगी और पूरे ठगी नेटवर्क की पहचान में जुटी है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सदस्य नरेश गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गए, जब किसी अज्ञात ठग ने केवल उनकी वॉट्सऐप प्रोफाइल फोटो का दुरुपयोग कर उनके कर्मचारी से ₹7.8 करोड़ आरटीजीएस के ज़रिए ट्रांसफर करवा लिए। नई दिल्ली में 18 जून 2026 को दर्ज इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 करोड़ फ्रीज करा दिए हैं।

कैसे हुई ठगी

शिकायत के अनुसार, नरेश गुजराल के एक कर्मचारी को एक अनजान वॉट्सऐप नंबर से संदेश मिला। उस नंबर की प्रोफाइल फोटो पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगी थी, जिससे कर्मचारी को यह विश्वास हो गया कि निर्देश उनके वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आ रहे हैं। ठग ने खुद को नरेश गुजराल बताकर कर्मचारी को एक बैंक खाता नंबर भेजा और उसमें ₹7.8 करोड़ आरटीजीएस के माध्यम से तुरंत स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।

कर्मचारी ने बॉस की प्रोफाइल फोटो और परिचित नाम पर भरोसा करते हुए पूरी रकम उस खाते में ट्रांसफर कर दी। बाद में जब असली नरेश गुजराल से संपर्क हुआ, तब पता चला कि वह नंबर उनका था ही नहीं और पूरा संदेश किसी साइबर ठग ने भेजा था।

पुलिस की कार्रवाई

शिकायत मिलते ही दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को ई-एफआईआर दर्ज कर एक विशेष जाँच दल गठित किया। पुलिस ने ठग द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जाँच शुरू की और मनी ट्रेल का पीछा करते हुए विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 करोड़ फ्रीज करा दिए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

क्या होता है 'बॉस स्कैम'

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रकार की धोखाधड़ी को 'बॉस स्कैम' कहा जाता है। इसमें साइबर अपराधी किसी कंपनी या संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी का रूप धारण कर — अक्सर उनकी असली प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करके — कर्मचारियों को बड़ी रकम ट्रांसफर करने का झूठा निर्देश देते हैं। इस मामले में न कोई हैकिंग हुई, न कोई जटिल तकनीकी चाल — केवल एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीर ने करोड़ों का नुकसान करवा दिया।

गौरतलब है कि आरटीजीएस (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित एक तत्काल और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक बैंक ट्रांसफर प्रणाली है। इसके ज़रिए हस्तांतरित धनराशि तुरंत प्राप्तकर्ता के खाते में पहुँच जाती है, जिससे धोखाधड़ी होने पर रकम वापस पाना अत्यंत कठिन हो जाता है।

आम जनता पर असर और सावधानी

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पीड़ित एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से हैं, और ठगी के लिए किसी परिष्कृत तकनीक की ज़रूरत नहीं पड़ी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले वरिष्ठ अधिकारी से सीधे फोन पर पुष्टि करना अनिवार्य होना चाहिए, चाहे संदेश कितना भी विश्वसनीय क्यों न लगे।

दिल्ली पुलिस अब शेष ₹3.8 करोड़ की बरामदगी और ठगी के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करने में जुटी है। जाँच के नतीजे आने वाले दिनों में सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मानवीय भरोसे की कमज़ोरी का फायदा उठाया गया — और निशाना एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार बना। 'बॉस स्कैम' भारत में तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कॉर्पोरेट और राजनीतिक कार्यालयों में वित्तीय लेनदेन के लिए दोहरी-पुष्टि प्रणाली अभी भी अपवाद है, नियम नहीं। ₹4 करोड़ फ्रीज करना सराहनीय है, पर शेष ₹3.8 करोड़ की बरामदगी और ठगों की गिरफ्तारी ही असली परीक्षा होगी। जब तक साइबर अपराध में सज़ा की दर नहीं बढ़ती, ऐसे स्कैम की संख्या घटने की उम्मीद कम है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नरेश गुजराल के साथ वॉट्सऐप 'बॉस स्कैम' में क्या हुआ?
एक साइबर ठग ने अनजान वॉट्सऐप नंबर पर नरेश गुजराल की प्रोफाइल फोटो लगाकर उनके कर्मचारी को संदेश भेजा और खुद को उनका बॉस बताते हुए एक बैंक खाते में ₹7.8 करोड़ आरटीजीएस से ट्रांसफर करवा लिए। कर्मचारी को बाद में पता चला कि वह नंबर नरेश गुजराल का नहीं था।
'बॉस स्कैम' क्या होता है?
'बॉस स्कैम' एक साइबर धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी किसी कंपनी या संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी का रूप धारण कर — अक्सर उनकी असली प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करके — कर्मचारियों को बड़ी रकम ट्रांसफर करने का झूठा निर्देश देते हैं। इसमें हैकिंग की ज़रूरत नहीं होती; केवल भरोसे का दुरुपयोग होता है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
दिल्ली पुलिस ने 18 जून 2026 को ई-एफआईआर दर्ज कर एक विशेष टीम गठित की। मनी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस ने विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 करोड़ फ्रीज करा दिए और शेष रकम की बरामदगी व पूरे नेटवर्क की पहचान के लिए जाँच जारी है।
आरटीजीएस के ज़रिए ठगी होने पर रकम वापस मिलना क्यों मुश्किल होता है?
आरटीजीएस (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) RBI द्वारा संचालित एक तत्काल बैंक ट्रांसफर प्रणाली है जिसमें धनराशि तुरंत प्राप्तकर्ता के खाते में पहुँच जाती है। एक बार ट्रांसफर होने के बाद रकम को रोकना या वापस करना बेहद कठिन होता है, इसलिए ठग इसी माध्यम का चुनाव करते हैं।
इस तरह के 'बॉस स्कैम' से कैसे बचा जा सकता है?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले वरिष्ठ अधिकारी से सीधे फोन पर पुष्टि करना अनिवार्य है, भले ही वॉट्सऐप संदेश कितना भी विश्वसनीय लगे। केवल प्रोफाइल फोटो या नाम के आधार पर किसी की पहचान सत्यापित न करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले