नरेश गुजराल से ₹7.8 करोड़ की 'बॉस स्कैम' ठगी, दिल्ली पुलिस ने ₹4 करोड़ फ्रीज किए
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सदस्य नरेश गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गए, जब किसी अज्ञात ठग ने केवल उनकी वॉट्सऐप प्रोफाइल फोटो का दुरुपयोग कर उनके कर्मचारी से ₹7.8 करोड़ आरटीजीएस के ज़रिए ट्रांसफर करवा लिए। नई दिल्ली में 18 जून 2026 को दर्ज इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 करोड़ फ्रीज करा दिए हैं।
कैसे हुई ठगी
शिकायत के अनुसार, नरेश गुजराल के एक कर्मचारी को एक अनजान वॉट्सऐप नंबर से संदेश मिला। उस नंबर की प्रोफाइल फोटो पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगी थी, जिससे कर्मचारी को यह विश्वास हो गया कि निर्देश उनके वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आ रहे हैं। ठग ने खुद को नरेश गुजराल बताकर कर्मचारी को एक बैंक खाता नंबर भेजा और उसमें ₹7.8 करोड़ आरटीजीएस के माध्यम से तुरंत स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
कर्मचारी ने बॉस की प्रोफाइल फोटो और परिचित नाम पर भरोसा करते हुए पूरी रकम उस खाते में ट्रांसफर कर दी। बाद में जब असली नरेश गुजराल से संपर्क हुआ, तब पता चला कि वह नंबर उनका था ही नहीं और पूरा संदेश किसी साइबर ठग ने भेजा था।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत मिलते ही दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को ई-एफआईआर दर्ज कर एक विशेष जाँच दल गठित किया। पुलिस ने ठग द्वारा उपयोग किए गए मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जाँच शुरू की और मनी ट्रेल का पीछा करते हुए विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹4 करोड़ फ्रीज करा दिए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
क्या होता है 'बॉस स्कैम'
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रकार की धोखाधड़ी को 'बॉस स्कैम' कहा जाता है। इसमें साइबर अपराधी किसी कंपनी या संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी का रूप धारण कर — अक्सर उनकी असली प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करके — कर्मचारियों को बड़ी रकम ट्रांसफर करने का झूठा निर्देश देते हैं। इस मामले में न कोई हैकिंग हुई, न कोई जटिल तकनीकी चाल — केवल एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीर ने करोड़ों का नुकसान करवा दिया।
गौरतलब है कि आरटीजीएस (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित एक तत्काल और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक बैंक ट्रांसफर प्रणाली है। इसके ज़रिए हस्तांतरित धनराशि तुरंत प्राप्तकर्ता के खाते में पहुँच जाती है, जिससे धोखाधड़ी होने पर रकम वापस पाना अत्यंत कठिन हो जाता है।
आम जनता पर असर और सावधानी
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पीड़ित एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से हैं, और ठगी के लिए किसी परिष्कृत तकनीक की ज़रूरत नहीं पड़ी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले वरिष्ठ अधिकारी से सीधे फोन पर पुष्टि करना अनिवार्य होना चाहिए, चाहे संदेश कितना भी विश्वसनीय क्यों न लगे।
दिल्ली पुलिस अब शेष ₹3.8 करोड़ की बरामदगी और ठगी के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करने में जुटी है। जाँच के नतीजे आने वाले दिनों में सामने आने की उम्मीद है।