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'बॉस स्कैम': डायरेक्टर बनकर WhatsApp पर ₹10.40 करोड़ की ठगी, मुंबई क्राइम ब्रांच ने 8 गिरफ्तार किए

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'बॉस स्कैम': डायरेक्टर बनकर WhatsApp पर ₹10.40 करोड़ की ठगी, मुंबई क्राइम ब्रांच ने 8 गिरफ्तार किए

सारांश

डायरेक्टर की फर्जी WhatsApp प्रोफाइल, एक मैसेज और देखते-देखते ₹10.40 करोड़ गायब — मुंबई क्राइम ब्रांच ने इसे 'बॉस स्कैम' नाम दिया। तीन राज्यों में एक साथ छापेमारी, 8 गिरफ्तार, ₹5.63 करोड़ फ्रीज — लेकिन मास्टरमाइंड अभी भी फरार है।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 'बॉस स्कैम' नामक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का 20 जुलाई 2026 को भंडाफोड़ किया।
ठगों ने कंपनी के डायरेक्टर की फर्जी WhatsApp प्रोफाइल बनाकर वरिष्ठ अधिकारी से ₹10 करोड़ 40 लाख से अधिक ट्रांसफर करवाए।
महाराष्ट्र के जालना, बिहार के सीवान और दिल्ली में छापेमारी कर अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार।
पुलिस ने ₹5 करोड़ 63 लाख 98 हजार से अधिक रकम बैंक खातों में फ्रीज कराई।
ठगी की रकम से UP, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र में सोना खरीदकर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी; जाँच में अन्य कंपनियों के शिकार होने की भी संभावना।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 20 जुलाई 2026 को एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसने किसी कंपनी के डायरेक्टर की फर्जी WhatsApp प्रोफाइल बनाकर उसके वरिष्ठ अधिकारी को धोखा दिया और ₹10 करोड़ 40 लाख से अधिक की राशि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली। इस नए साइबर फ्रॉड को पुलिस ने 'बॉस स्कैम' नाम दिया है, जिसमें महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली में एक साथ छापेमारी कर अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

कैसे हुई ठगी: मॉडस ऑपरेंडी

देश के कई शहरों में शाखाएँ रखने वाली एक बड़ी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के मोबाइल पर WhatsApp पर एक संदेश आया। संदेश भेजने वाले की प्रोफाइल फोटो कंपनी के असली डायरेक्टर की थी, जिससे संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रही। संदेश में लिखा था — 'मैं मीटिंग में हूँ… कुछ जरूरी पेमेंट करनी है… तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दो।'

अधिकारी ने बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। जब तक असली डायरेक्टर से संपर्क हो पाया, तब तक ठग ₹10 करोड़ 40 लाख से अधिक की रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करवा चुके थे। इसी मॉडस ऑपरेंडी के कारण मुंबई पुलिस ने इस फ्रॉड को 'बॉस स्कैम' नाम दिया।

तीन राज्यों में एक साथ कार्रवाई

मुंबई क्राइम ब्रांच की दक्षिण साइबर पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें उघाड़ीं। इसके बाद महाराष्ट्र के जालना, बिहार के सीवान और दिल्ली में एक साथ छापेमारी की गई। अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह फर्जी बैंक खातों का इंतजाम करता था, ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया जाता था और फिर मनी ट्रेल मिटाने के लिए उस रकम से सोना खरीदा जाता था।

पुलिस ने आरोपियों से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। जाँच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र के नामी ज्वेलर्स से सोना खरीदा गया।

₹5.63 करोड़ से अधिक फ्रीज

समय रहते कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ₹5 करोड़ 63 लाख 98 हजार से अधिक की राशि विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज करा दी है। यह ठगी की कुल रकम का लगभग आधा हिस्सा है। शेष राशि की बरामदगी के लिए जाँच जारी है।

नेटवर्क की परतें और मास्टरमाइंड की तलाश

जाँच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम करता था — जिसमें फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, नकदी निकालने वाले, सोना खरीदने वाले और फर्जी पहचान बनाने वाले अलग-अलग सदस्य शामिल थे। अभी भी कई आरोपी फरार हैं। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

मुंबई पुलिस अब इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुँचने की कोशिश में है। साथ ही यह भी जाँचा जा रहा है कि क्या इसी 'बॉस स्कैम' के ज़रिए देश की अन्य बड़ी कंपनियों को भी निशाना बनाया गया है। यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमज़ोरियों को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कॉर्पोरेट संस्कृति की उस कमज़ोरी का शोषण है जहाँ 'बॉस के आदेश' पर बिना सत्यापन के काम होता है — और यही इस ठगी की असली ताकत है। यह मामला इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि ठगों ने सोने की खरीद के ज़रिए मनी ट्रेल को कई राज्यों में बिखेर दिया, जो एक परिष्कृत वित्तीय अपराध की ओर इशारा करता है। देश में साइबर फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन कॉर्पोरेट कंपनियों में 'दो-स्तरीय सत्यापन' (dual verification) की अनिवार्य नीति अभी भी अपवाद है, नियम नहीं। जब तक कंपनियाँ आंतरिक वित्तीय प्रक्रियाओं में कठोर प्रोटोकॉल नहीं अपनातीं, ऐसे गिरोह नए रूपों में सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बॉस स्कैम' क्या है और यह कैसे काम करता है?
'बॉस स्कैम' एक साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग किसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी या डायरेक्टर की नकली WhatsApp प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को तत्काल पेमेंट के लिए मैसेज करते हैं। कर्मचारी प्रोफाइल फोटो देखकर असली समझ लेता है और बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर कर देता है।
इस मामले में कितनी रकम की ठगी हुई और कितनी वापस मिली?
इस मामले में एक बड़ी कंपनी से ₹10 करोड़ 40 लाख से अधिक की ठगी हुई। मुंबई क्राइम ब्रांच ने समय रहते कार्रवाई करते हुए ₹5 करोड़ 63 लाख 98 हजार से अधिक रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज करा दी है।
मुंबई पुलिस ने किन राज्यों में छापेमारी की और कितने लोग गिरफ्तार हुए?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र के जालना, बिहार के सीवान और दिल्ली में एक साथ छापेमारी की। अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
ठगी की रकम को छिपाने के लिए गिरोह ने क्या तरीका अपनाया?
जाँच में सामने आया है कि गिरोह ने ठगी की रकम को पहले अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया और फिर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र के नामी ज्वेलर्स से सोना खरीदकर मनी ट्रेल मिटाने की कोशिश की।
कंपनियाँ 'बॉस स्कैम' से खुद को कैसे बचा सकती हैं?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वित्तीय लेन-देन से पहले अधिकारी से सीधे फोन कॉल पर पुष्टि करना अनिवार्य होना चाहिए। कंपनियों को आंतरिक नीति में 'दो-स्तरीय सत्यापन' लागू करना चाहिए और कर्मचारियों को WhatsApp पर मिले पेमेंट अनुरोधों के प्रति सतर्क रहने का प्रशिक्षण देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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