मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन: ऑनलाइन लोन ऐप ठगी गिरोह के 6 गिरफ्तार, पीड़ित से ₹7 लाख से अधिक वसूले
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच ने 25 मई 2026 को ऑनलाइन लोन ऐप के ज़रिए मानसिक उत्पीड़न और जबरन वसूली करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 6 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने एक पीड़ित को 18 अलग-अलग ऑनलाइन लोन ऐप्स से कुल ₹7 लाख 5 हजार 570 रुपए का कर्ज़ लेने पर मजबूर किया। यह मामला डिजिटल ऋण धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जिसमें साइबर अपराधी एपीके फाइलों के ज़रिए मोबाइल डेटा चुराकर पीड़ितों को जाल में फँसाते हैं।
मामले का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 25 मई 2025 को एक ऑनलाइन लोन ऐप से ₹22,050 का ऋण लिया था। लोन प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने एक एपीके (APK) फाइल के माध्यम से शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन का डेटा — जिसमें संपर्क सूची और व्यक्तिगत जानकारी शामिल थी — अपने कब्ज़े में ले लिया। शिकायतकर्ता ने ब्याज सहित पूरा ऋण चुका दिया, फिर भी आरोपियों ने फोन और संदेशों के ज़रिए उत्पीड़न जारी रखा।
इसके बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता के रिश्तेदारों, मित्रों और कार्यस्थल पर फोन कर बदनामी का अभियान चलाया। धमकी दी गई कि यदि इन कॉल्स को बंद करवाना है, तो अन्य ऐप्स से नए ऋण लेकर ब्याज चुकाना होगा। मानसिक दबाव और भय के कारण पीड़ित को 18 अलग-अलग ऑनलाइन लोन ऐप्स से कुल ₹7,05,570 का ऋण लेने पर विवश किया गया।
जबरन वसूली का तरीका
सभी ऋण और ब्याज चुकाने के बाद भी आरोपी 'वन टाइम सेटलमेंट' के नाम पर अतिरिक्त रकम की माँग करते रहे। लगातार धमकी भरे फोन कॉल, सार्वजनिक बदनामी और मानसिक प्रताड़ना के चलते शिकायतकर्ता की मानसिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो गई। गौरतलब है कि यह तरीका — जहाँ कर्ज़ चुकाने के बाद भी वसूली जारी रहती है — देशभर में ऑनलाइन लोन ऐप घोटालों की एक सामान्य कार्यशैली बन चुकी है।
गिरफ्तारी और आरोपी
शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाया और 25 मई 2026 को वसूली की रकम लेने पहुँचे सभी छह आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
सुदेश चंद्रकांत वाघरे (27), पवेश नारायण गोरीवले (28), प्रविण पांडुरंग जाधव (49), प्रविण सुखदेव थोरात (28), रवि मदनलाल जैवाल (28) और वाल्मिकी गेनालाल गुप्ता (21)।
सभी छह आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ न्यायालय ने उन्हें 30 मई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश में जुटी है। जाँच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने ऑनलाइन लोन ऐप्स के ज़रिए कई अन्य पीड़ितों को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर भारी रकम वसूली है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार अनधिकृत डिजिटल ऋण ऐप्स के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ कर रहे हैं।