5 अक्टूबर 2026
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मुंबई: आदिवासी जेन-जी उल्गुलान मार्च को पुलिस ने नकारा, आजाद मैदान में 28 प्रदर्शन पहले से निर्धारित

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मुंबई: आदिवासी जेन-जी उल्गुलान मार्च को पुलिस ने नकारा, आजाद मैदान में 28 प्रदर्शन पहले से निर्धारित

सारांश

नासिक से मुंबई तक मार्च करने वाले आदिवासी छात्र संगठन को 5 अक्टूबर को आजाद मैदान में आंदोलन करने की अनुमति नहीं मिली। पुलिस ने 7 दिन पहले आवेदन न करने और मैदान में 28 प्रदर्शन पहले से बुक होने का हवाला दिया। आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे समेत कई माँगें अब भी अनसुलझी हैं।

मुख्य बातें

मुंबई पुलिस ने सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति के 'आदिवासी जेन-जी उल्गुलान' मार्च को 5 अक्टूबर 2026 को अनुमति देने से इनकार किया।
समिति ने 3 अक्टूबर को ई-मेल से आवेदन भेजा था, जबकि नियमानुसार कम से कम 7 दिन पहले आवेदन और फॉर्म बी में शपथ-पत्र अनिवार्य है।
5 अक्टूबर को आजाद मैदान में पहले से 28 विरोध प्रदर्शन निर्धारित थे।
आंदोलन 28 सितंबर को नासिक के ईदगाह मैदान से शुरू हुआ था।
प्रमुख माँगों में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके का इस्तीफा और विभाग के सचिव व आयुक्त का तबादला शामिल है।

मुंबई पुलिस ने सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति के 'आदिवासी जेन-जी उल्गुलान' मार्च को 5 अक्टूबर 2026 को आजाद मैदान में आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। संगठन ने नासिक से मुंबई तक लंबे मार्च के बाद आजाद मैदान में जन आक्रोश आंदोलन करने की अनुमति माँगी थी, जिसे पुलिस ने प्रक्रियागत आधार पर खारिज कर दिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

28 सितंबर को नासिक के ईदगाह मैदान से यह आदिवासी छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से वहाँ धरने पर बैठे हैं और शिक्षा तथा कल्याण से जुड़े कई अनसुलझे मुद्दों पर महाराष्ट्र सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इनमें प्रमुख माँग आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे की है। इसके साथ ही आदिवासी विकास विभाग के सचिव और आयुक्त के तबादले की भी माँग उठाई जा रही है। इन्हीं माँगों को लेकर समिति ने मुंबई में आंदोलन का आह्वान किया था।

अनुमति क्यों नहीं मिली

समिति ने 3 अक्टूबर को ई-मेल के माध्यम से आजाद मैदान पुलिस स्टेशन को अनुमति के लिए आवेदन भेजा था। 4 अक्टूबर को पुलिस ने नोटिस जारी कर आंदोलन की अनुमति देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

पुलिस ने अपने नोटिस में कहा, 'नियमों के अनुसार अनुमति के लिए आवेदन कम से कम 7 दिन पहले जमा करना अनिवार्य है, जिसके साथ फॉर्म बी में एक शपथ-पत्र भी देना होता है। आप (सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति) इस आवश्यकता को पूरा करने में विफल रहे।'

आजाद मैदान में पहले से भरा हुआ कार्यक्रम

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि 5 अक्टूबर को आजाद मैदान में पहले से ही कुल 28 विरोध प्रदर्शन निर्धारित हैं। ऐसे में समिति के आयोजन के लिए कोई अतिरिक्त स्थान उपलब्ध नहीं था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यभर में आदिवासी अधिकारों को लेकर जन-असंतोष बढ़ता दिख रहा है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब आदिवासी छात्र संगठनों ने मुंबई में बड़े प्रदर्शन की कोशिश की हो। आदिवासी समुदाय से जुड़े शिक्षा और कल्याण के मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और इन पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर संगठन असंतुष्ट है। आने वाले दिनों में समिति अपनी अगली रणनीति की घोषणा कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक तस्वीर को नहीं छिपाता जिसमें आदिवासी छात्रों की शिक्षा और कल्याण से जुड़ी माँगें वर्षों से सरकारी फाइलों में दबी हैं। 7 दिन की अग्रिम सूचना की शर्त एक न्यायसंगत नियम है, परंतु जब असंतोष उफान पर हो तो आंदोलन 'कार्यक्रम की प्रतीक्षा' में नहीं बैठता। असली सवाल यह है कि नासिक से मुंबई तक मार्च करने की नौबत क्यों आई — और महाराष्ट्र सरकार उन माँगों पर मौन क्यों है जिनका जवाब किसी अनुमति-पत्र का मोहताज नहीं है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'आदिवासी जेन-जी उल्गुलान' मार्च क्या है?
यह सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति द्वारा आयोजित एक आंदोलन है, जिसे नासिक के ईदगाह मैदान से 28 सितंबर को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा और कल्याण से जुड़ी लंबित माँगों पर महाराष्ट्र सरकार से ठोस कार्रवाई कराना है।
मुंबई पुलिस ने अनुमति क्यों नहीं दी?
पुलिस ने दो कारण बताए: पहला, समिति ने अनिवार्य 7 दिन पहले के बजाय मात्र 2 दिन पहले (3 अक्टूबर को) आवेदन किया था और फॉर्म बी में शपथ-पत्र नहीं दिया। दूसरा, 5 अक्टूबर को आजाद मैदान में पहले से 28 विरोध प्रदर्शन निर्धारित थे।
आदिवासी छात्रों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे और आदिवासी विकास विभाग के सचिव व आयुक्त के तबादले की माँग कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा और कल्याण से जुड़े कई अनसुलझे मुद्दों पर राज्य सरकार से कार्रवाई माँगी जा रही है।
यह आंदोलन कब और कहाँ से शुरू हुआ?
यह आंदोलन 28 सितंबर 2026 को नासिक के ईदगाह मैदान से शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी तब से वहाँ धरने पर बैठे हैं और इसी कड़ी में 5 अक्टूबर को मुंबई के आजाद मैदान में बड़े आंदोलन का आह्वान किया गया था।
अब आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?
अनुमति मिलने से इनकार के बाद समिति की अगली रणनीति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। हालाँकि, आदिवासी माँगें अनसुलझी होने के कारण समिति द्वारा वैकल्पिक कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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