मुंबई: आदिवासी जेन-जी उल्गुलान मार्च को पुलिस ने नकारा, आजाद मैदान में 28 प्रदर्शन पहले से निर्धारित
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस ने सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति के 'आदिवासी जेन-जी उल्गुलान' मार्च को 5 अक्टूबर 2026 को आजाद मैदान में आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। संगठन ने नासिक से मुंबई तक लंबे मार्च के बाद आजाद मैदान में जन आक्रोश आंदोलन करने की अनुमति माँगी थी, जिसे पुलिस ने प्रक्रियागत आधार पर खारिज कर दिया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
28 सितंबर को नासिक के ईदगाह मैदान से यह आदिवासी छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी पिछले कई दिनों से वहाँ धरने पर बैठे हैं और शिक्षा तथा कल्याण से जुड़े कई अनसुलझे मुद्दों पर महाराष्ट्र सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
इनमें प्रमुख माँग आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे की है। इसके साथ ही आदिवासी विकास विभाग के सचिव और आयुक्त के तबादले की भी माँग उठाई जा रही है। इन्हीं माँगों को लेकर समिति ने मुंबई में आंदोलन का आह्वान किया था।
अनुमति क्यों नहीं मिली
समिति ने 3 अक्टूबर को ई-मेल के माध्यम से आजाद मैदान पुलिस स्टेशन को अनुमति के लिए आवेदन भेजा था। 4 अक्टूबर को पुलिस ने नोटिस जारी कर आंदोलन की अनुमति देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
पुलिस ने अपने नोटिस में कहा, 'नियमों के अनुसार अनुमति के लिए आवेदन कम से कम 7 दिन पहले जमा करना अनिवार्य है, जिसके साथ फॉर्म बी में एक शपथ-पत्र भी देना होता है। आप (सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति) इस आवश्यकता को पूरा करने में विफल रहे।'
आजाद मैदान में पहले से भरा हुआ कार्यक्रम
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि 5 अक्टूबर को आजाद मैदान में पहले से ही कुल 28 विरोध प्रदर्शन निर्धारित हैं। ऐसे में समिति के आयोजन के लिए कोई अतिरिक्त स्थान उपलब्ध नहीं था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यभर में आदिवासी अधिकारों को लेकर जन-असंतोष बढ़ता दिख रहा है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब आदिवासी छात्र संगठनों ने मुंबई में बड़े प्रदर्शन की कोशिश की हो। आदिवासी समुदाय से जुड़े शिक्षा और कल्याण के मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और इन पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर संगठन असंतुष्ट है। आने वाले दिनों में समिति अपनी अगली रणनीति की घोषणा कर सकती है।