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जर्मन राजदूत डॉ. विएक ने मझगांव डॉक का दौरा किया, पनडुब्बी और समुद्री तकनीक सहयोग पर चर्चा

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जर्मन राजदूत डॉ. विएक ने मझगांव डॉक का दौरा किया, पनडुब्बी और समुद्री तकनीक सहयोग पर चर्चा

सारांश

जर्मन राजदूत डॉ. विएक का मुंबई दौरा महज़ शिष्टाचार नहीं था — MDL की पनडुब्बी सुविधाओं का अवलोकन, TKMS के साथ तकनीकी साझेदारी पर चर्चा और शेंगेन वीजा टीम से संवाद — यह दौरा भारत-जर्मनी के 75 साल पुराने रिश्तों में रक्षा और जन-कूटनीति का नया अध्याय जोड़ता है।

मुख्य बातें

जॉन जैस्पर विएक ने 17 सितंबर 2026 को मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) का दौरा किया।
दौरे में MDL और TKMS के बीच पनडुब्बी निर्माण व समुद्री तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई।
राजदूत के साथ महावाणिज्यदूत क्रिस्टोफ हॉलियर और प्रथम सचिव सेबेस्टियन बोर्चमेयर भी मौजूद रहे।
भारत में हर साल 2 लाख जर्मन वीजा जारी होते हैं; शेंगेन वीजा टीम से भी बातचीत हुई।
इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IGCC) 2026 में अपनी 70वीं सालगिरह मना रहा है; भारत-जर्मनी राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी इसी वर्ष पूरे हुए।

भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. जॉन जैस्पर विएक ने बुधवार, 17 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) का दौरा किया और कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ पनडुब्बी निर्माण व समुद्री तकनीकी सहयोग पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस यात्रा को अपनी दिल्ली से बाहर की पहली यात्रा बताते हुए 'शानदार' करार दिया।

मुंबई दौरे का उद्देश्य

राजदूत विएक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'दिल्ली के बाहर अपनी पहली यात्रा में, मैं भारत-जर्मनी के 70 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए खूबसूरत और जीवंत मुंबई पहुंचा।' गौरतलब है कि इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IGCC) वर्ष 2026 में अपनी 70वीं सालगिरह मना रहा है, जबकि भारत और जर्मनी के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध मार्च 1951 में स्थापित हुए थे, जिनके 75 वर्ष भी इसी साल पूरे हो रहे हैं।

दौरे में राजदूत के साथ महावाणिज्यदूत क्रिस्टोफ एंड्रियास हेल्मुथ हॉलियर और जर्मन दूतावास में आर्थिक एवं वैश्विक मामलों के प्रथम सचिव सेबेस्टियन बोर्चमेयर भी शामिल थे।

MDL में क्या हुई चर्चा

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने MDL की जहाज निर्माण और पनडुब्बी निर्माण सुविधाओं का अवलोकन किया तथा कंपनी के सीएमडी और वरिष्ठ प्रबंधन से मुलाकात की। MDL द्वारा एक्स पर साझा किए गए अपडेट के अनुसार, बातचीत में भारत और जर्मनी की दीर्घकालिक साझेदारी, विशेष रूप से MDL और TKMS (ThyssenKrupp Marine Systems) के बीच पनडुब्बी निर्माण और प्रौद्योगिकी सहयोग के मज़बूत संबंधों पर विशेष ज़ोर दिया गया।

यह दौरा ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी नौसेना क्षमता विस्तार के लिए स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रमों को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है और TKMS जैसी जर्मन कंपनियाँ इसमें तकनीकी भागीदारी की दृष्टि से अहम मानी जाती हैं।

शेंगेन वीजा टीम से संवाद

राजदूत विएक ने इस दौरान शेंगेन वीजा टीम से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल 2 लाख जर्मन वीजा जारी किए जाते हैं, जिसे उन्होंने 'उत्साहवर्धक' बताया। शेंगेन वीजा यूरोप के 29 देशों में 180 दिनों की अवधि में अधिकतम 90 दिनों की यात्रा की अनुमति देता है।

द्विपक्षीय संबंधों का संदर्भ

यह यात्रा भारत-जर्मनी के बहुआयामी संबंधों को रेखांकित करती है — जिसमें रक्षा, व्यापार और जन-संपर्क तीनों आयाम एक साथ दिखे। व्यापार जगत के प्रतिनिधियों, MDL प्रबंधन और वीजा टीम के साथ एक ही दिन में इस संवाद ने राजदूत के पहले मुंबई दौरे को कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय बना दिया।

आगे MDL और TKMS के बीच एडवांस्ड समुद्री तकनीक में और अधिक सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

द्विपक्षीय व्यापार और वीजा कूटनीति एक साथ दिखती है। MDL और TKMS के बीच पनडुब्बी सहयोग ऐसे वक्त पर केंद्र में है जब भारत 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी नौसेना निर्माण को प्राथमिकता दे रहा है। यह यात्रा संकेत देती है कि जर्मनी भारत के रक्षा औद्योगिक आधार में गहरी भागीदारी चाहता है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये चर्चाएँ ठोस तकनीकी हस्तांतरण समझौतों में कितनी जल्दी तब्दील होती हैं।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जर्मन राजदूत डॉ. विएक ने मझगांव डॉक का दौरा क्यों किया?
राजदूत डॉ. जॉन जैस्पर विएक ने भारत-जर्मनी की दीर्घकालिक साझेदारी, विशेष रूप से MDL और TKMS के बीच पनडुब्बी निर्माण व तकनीकी सहयोग पर चर्चा के लिए यह दौरा किया। यह उनकी दिल्ली के बाहर पहली यात्रा थी और IGCC की 70वीं सालगिरह के उपलक्ष्य में भी आयोजित थी।
MDL और TKMS के बीच क्या सहयोग है?
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और जर्मन कंपनी ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) के बीच पनडुब्बी निर्माण और एडवांस्ड समुद्री तकनीक में लंबे समय से साझेदारी चली आ रही है। इस दौरे में भविष्य के सहयोग को और मज़बूत करने के विकल्पों पर विचार-विमर्श हुआ।
भारत-जर्मनी राजनयिक संबंध कब से हैं और 2026 में क्या खास है?
भारत और जर्मनी के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध मार्च 1951 में स्थापित हुए थे, जिनके 2026 में 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसके साथ ही इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IGCC) भी इसी वर्ष अपनी 70वीं सालगिरह मना रहा है।
शेंगेन वीजा क्या है और भारतीयों के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है?
शेंगेन वीजा एक दस्तावेज़ है जो धारक को यूरोप के 29 शेंगेन देशों में 180 दिनों की अवधि में अधिकतम 90 दिनों तक यात्रा करने की अनुमति देता है। भारत में हर साल 2 लाख जर्मन (शेंगेन) वीजा जारी किए जाते हैं, जिसे राजदूत विएक ने उत्साहवर्धक बताया।
इस दौरे में जर्मन प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे?
जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राजदूत डॉ. जॉन जैस्पर विएक के साथ महावाणिज्यदूत क्रिस्टोफ एंड्रियास हेल्मुथ हॉलियर और जर्मन दूतावास में आर्थिक एवं वैश्विक मामलों के प्रथम सचिव सेबेस्टियन बोर्चमेयर शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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