8 अक्टूबर 2026
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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: योगी, मनोहर लाल खट्टर सहित 10 नेताओं ने दी 'उपन्यास सम्राट' को श्रद्धांजलि

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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: योगी, मनोहर लाल खट्टर सहित 10 नेताओं ने दी 'उपन्यास सम्राट' को श्रद्धांजलि

सारांश

8 अक्टूबर को हिंदी साहित्य के 'उपन्यास सम्राट' मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर CM योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, राजस्थान CM भजनलाल शर्मा समेत 10 से अधिक नेताओं ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी — 1936 में इसी दिन उनका निधन हुआ था।

मुख्य बातें

8 अक्टूबर 1936 को हुए निधन की वर्षगांठ पर मुंशी प्रेमचंद को राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि दी गई।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गोदान, गबन, निर्मला, नमक का दारोगा और कर्मभूमि का विशेष उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेमचंद को 'कलम के सिपाही' कहकर नमन किया।
राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा , उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी और हरियाणा के CM नायब सैनी समेत कई मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी।
दिल्ली मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने भी सोशल मीडिया पर याद किया।

हिंदी साहित्य के 'उपन्यास सम्राट' मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर 8 अक्टूबर 2026 को देशभर के नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर तक, एक के बाद एक नेताओं ने सोशल मीडिया पर प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत को याद किया। गौरतलब है कि 8 अक्टूबर 1936 को प्रेमचंद का निधन हुआ था।

केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय आवास, शहरी मामलों और विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हिन्दी साहित्य को अपनी अनुपम कृतियों से धन्य करने वाले महान कथाकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।' उन्होंने गोदान, गबन, निर्मला, नमक का दारोगा और कर्मभूमि जैसी रचनाओं को साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर प्रेमचंद को 'कलम के सिपाही' की उपाधि से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी ने किसान, श्रमिक और आम जन के जीवन-संघर्षों को स्वर दिया तथा गाँव और समाज की वास्तविक तस्वीर को सजीवता से अभिव्यक्त किया।

उत्तर प्रदेश भाजपा और उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने गोदान, गबन और ईदगाह को कालजयी रचनाएं बताते हुए कहा कि प्रेमचंद ने समाज के वंचित वर्गों और ग्रामीण जीवन की सच्चाई को प्रभावी स्वर दिया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रेमचंद ने सामाजिक विषमता और कुप्रथाओं पर अपनी कलम से करारी चोट की और उनकी रचनाएं आज भी समाज के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती हैं।

अन्य राज्यों के नेताओं ने भी किया नमन

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को जनसरोकारों से जोड़ा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनकी लेखनी को आम जनजीवन की सच्चाइयों का प्रभावशाली दस्तावेज़ बताया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं सामाजिक चेतना और नैतिकता का दीप प्रज्ज्वलित करती रहेंगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उनकी लेखनी को हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर बताया।

दिल्ली और संसद से भी आई श्रद्धांजलि

दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गोदान, गबन, निर्मला और कफन जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कृतियाँ आज भी समाज को आईना दिखाती हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता का स्रोत बताया।

प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत

यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवनकाल में 14 से अधिक उपन्यास और लगभग 300 कहानियाँ लिखीं, जो आज भी पाठ्यक्रमों और साहित्यिक विमर्श का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। आने वाली पीढ़ियाँ उनकी यथार्थवादी दृष्टि और मानवीय संवेदना से निरंतर प्रेरणा लेती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या ये श्रद्धांजलि व्यावहारिक धरातल पर हिंदी साहित्य और लेखकों के उत्थान में परिवर्तित हो रही है। प्रेमचंद ने जिन किसानों, मज़दूरों और वंचितों की आवाज़ उठाई, उनकी स्थिति पर विमर्श इन पोस्टों में प्रायः अनुपस्थित रहता है। साहित्यिक विरासत को सम्मान देना तब अर्थपूर्ण होता है जब वह नीतिगत प्रतिबद्धता में भी दिखे — केवल वार्षिक उद्धरणों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि कब है?
मुंशी प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ था, इसलिए हर वर्ष 8 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि मनाई जाती है। इस अवसर पर साहित्यिक संस्थाएं और नेतागण उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
मुंशी प्रेमचंद को 'उपन्यास सम्राट' क्यों कहा जाता है?
मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी और उर्दू में 14 से अधिक उपन्यास और लगभग 300 कहानियाँ लिखीं, जिनमें गोदान, गबन, निर्मला और कर्मभूमि प्रमुख हैं। उनकी यथार्थवादी लेखनी और सामाजिक विषयों पर पकड़ के कारण उन्हें 'उपन्यास सम्राट' की उपाधि दी गई।
2026 की पुण्यतिथि पर किन प्रमुख नेताओं ने प्रेमचंद को श्रद्धांजलि दी?
8 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा, उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के CM नायब सैनी, UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, MP के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, UP BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी, दिल्ली मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने श्रद्धांजलि दी।
प्रेमचंद की कौन-सी रचनाओं का नेताओं ने विशेष उल्लेख किया?
नेताओं ने विशेष रूप से गोदान, गबन, निर्मला, कर्मभूमि, नमक का दारोगा, ईदगाह और कफन का उल्लेख किया। इन्हें हिंदी साहित्य की कालजयी रचनाएं बताया गया जो आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं।
मुंशी प्रेमचंद का हिंदी साहित्य में क्या योगदान है?
मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी गद्य साहित्य को आम जनजीवन, किसानों, मज़दूरों और वंचित वर्गों के संघर्षों से जोड़ा। उनकी रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और वे आज भी स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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