मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: योगी, मनोहर लाल खट्टर सहित 10 नेताओं ने दी 'उपन्यास सम्राट' को श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी साहित्य के 'उपन्यास सम्राट' मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर 8 अक्टूबर 2026 को देशभर के नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर तक, एक के बाद एक नेताओं ने सोशल मीडिया पर प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत को याद किया। गौरतलब है कि 8 अक्टूबर 1936 को प्रेमचंद का निधन हुआ था।
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय आवास, शहरी मामलों और विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हिन्दी साहित्य को अपनी अनुपम कृतियों से धन्य करने वाले महान कथाकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।' उन्होंने गोदान, गबन, निर्मला, नमक का दारोगा और कर्मभूमि जैसी रचनाओं को साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर बताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर प्रेमचंद को 'कलम के सिपाही' की उपाधि से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की लेखनी ने किसान, श्रमिक और आम जन के जीवन-संघर्षों को स्वर दिया तथा गाँव और समाज की वास्तविक तस्वीर को सजीवता से अभिव्यक्त किया।
उत्तर प्रदेश भाजपा और उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने गोदान, गबन और ईदगाह को कालजयी रचनाएं बताते हुए कहा कि प्रेमचंद ने समाज के वंचित वर्गों और ग्रामीण जीवन की सच्चाई को प्रभावी स्वर दिया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रेमचंद ने सामाजिक विषमता और कुप्रथाओं पर अपनी कलम से करारी चोट की और उनकी रचनाएं आज भी समाज के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देती हैं।
अन्य राज्यों के नेताओं ने भी किया नमन
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को जनसरोकारों से जोड़ा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनकी लेखनी को आम जनजीवन की सच्चाइयों का प्रभावशाली दस्तावेज़ बताया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं सामाजिक चेतना और नैतिकता का दीप प्रज्ज्वलित करती रहेंगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने उनकी लेखनी को हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर बताया।
दिल्ली और संसद से भी आई श्रद्धांजलि
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गोदान, गबन, निर्मला और कफन जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कृतियाँ आज भी समाज को आईना दिखाती हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता का स्रोत बताया।
प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवनकाल में 14 से अधिक उपन्यास और लगभग 300 कहानियाँ लिखीं, जो आज भी पाठ्यक्रमों और साहित्यिक विमर्श का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी रचनाओं का कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। आने वाली पीढ़ियाँ उनकी यथार्थवादी दृष्टि और मानवीय संवेदना से निरंतर प्रेरणा लेती रहेंगी।