मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती: CM योगी, रेखा गुप्ता, भजनलाल सहित कई मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी साहित्य के उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर 31 जुलाई 2026 को देशभर में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी तक — कई राज्यों के शीर्ष नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस महान साहित्यकार को नमन किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय समाज की संवेदनाओं, संघर्षों और यथार्थ को सशक्त अभिव्यक्ति दी। उन्होंने कहा, 'उनकी रचनाएं मानवीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा का अक्षय स्रोत बनकर हम सभी का निरंतर मार्गदर्शन कर रही हैं।' गौरतलब है कि मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था — यानी उनकी जन्मभूमि उत्तर प्रदेश ही है।
दिल्ली और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों का नमन
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा कि प्रेमचंद ने अपनी लेखनी से समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन, संघर्ष और स्वाभिमान को स्वर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रेमचंद की अमर कृतियाँ भारतीय साहित्य को नई दिशा देने वाली हैं और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की प्रेरणा देती रहेंगी।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के नेताओं की प्रतिक्रिया
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर लिखा कि प्रेमचंद ने साहित्य को समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों, संवेदना और समानता पर आधारित समाज की रचना के लिए उनका साहित्य आज भी प्रेरणा प्रदान कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि प्रेमचंद की कालजयी रचनाएं भारतीय समाज की संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को सशक्त अभिव्यक्ति देती हैं, और उनका साहित्य सदैव समाज को सामाजिक चेतना का मार्ग दिखाता रहेगा।
मुंशी प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत
मुंशी प्रेमचंद ने 'गोदान', 'निर्मला', 'गबन' और 'सेवासदन' जैसी कालजयी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन, किसानों की पीड़ा और सामाजिक विषमताओं को हिंदी व उर्दू साहित्य में अमर कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की माँग लगातार बढ़ रही है।
आगे क्या
उनकी जन्मस्थली लमही (वाराणसी) सहित देशभर के साहित्यिक संस्थानों में जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रेमचंद की रचनाएं आज भी स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी पाठकों को सामाजिक न्याय की राह दिखाती रहेंगी।