उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि: सीएम योगी, रेखा गुप्ता सहित कई नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
शहनाई को विश्वमंच पर अमर करने वाले भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि पर 21 अगस्त 2026 को देशभर के राजनेताओं और मुख्यमंत्रियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक — सभी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के इस महान साधक को याद किया।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'सुरों के महान आराधक, कला के सच्चे साधक एवं शहनाई के अद्भुत वादक, भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।'
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उस्ताद जी ने अपनी अनुपम साधना और शहनाई के सुरों से भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्वभर में प्रतिष्ठा दिलाई और उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका अतुलनीय योगदान आने वाली पीढ़ियों को कला, साधना एवं उत्कृष्टता के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अपनी पोस्ट में कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई की मधुर स्वर सदैव भारतीय संस्कृति और संगीत की समृद्ध विरासत की याद दिलाती रहेंगी।
मंत्रियों ने भी किया नमन
दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और शहनाई को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने लिखा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने अपना पूरा जीवन संगीत के प्रति समर्पित किया। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' ने भी उनकी अमर संगीत साधना को नमन किया और कहा कि शहनाई को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान: एक संगीत-युग का प्रतीक
गौरतलब है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान भारतीय शास्त्रीय संगीत के उन विरल कलाकारों में से थे जिन्होंने शहनाई — एक लोक वाद्य — को शास्त्रीय मंचों पर स्थापित किया। भारत रत्न सहित पद्म विभूषण और पद्म भूषण से सम्मानित खान साहब का वाराणसी से गहरा नाता था, जहाँ उनकी शहनाई काशी विश्वनाथ मंदिर के आँगन में गूँजती थी। यह ऐसे समय में उनकी स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर याद किया जा रहा है जब भारतीय शास्त्रीय संगीत की वैश्विक पहुँच लगातार बढ़ रही है।
विरासत और आगे की राह
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि हर वर्ष देशभर के संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए उनकी विरासत को जीवंत रखने का अवसर बनती है। उनके शिष्य और भारतीय शास्त्रीय संगीत की अगली पीढ़ी उनकी साधना को आगे बढ़ाने में जुटी है — यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।