उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने दी भावभिनी श्रद्धांजलि, शहनाई के जादूगर को किया याद
सारांश
मुख्य बातें
भारत रत्न से सम्मानित महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की पुण्यतिथि पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। 21 अगस्त को उस्ताद की बरसी के अवसर पर जैकी ने इंस्टाग्राम पर शहनाई बजाते हुए उनकी एक तस्वीर साझा कर लिखा, 'बिस्मिल्लाह खान जी को उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी उनको याद करते हैं।' भारतीय शास्त्रीय संगीत की यह महान विभूति 21 अगस्त, 2006 को वाराणसी में इस दुनिया से विदा हो गई थी।
जैकी श्रॉफ की श्रद्धांजलि
अभिनेता जैकी श्रॉफ अपने सोशल मीडिया के माध्यम से सिनेमा, संगीत और अन्य क्षेत्रों की महान हस्तियों को उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर नियमित रूप से याद करते हैं। इस बार उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की शहनाई बजाते हुई एक भावपूर्ण तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की, जिसने संगीत प्रेमियों के दिलों को छू लिया।
शहनाई के जादूगर का जीवन परिचय
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म 21 मार्च, 1916 को बिहार के डुमरांव में एक संगीतकार परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने मामा अली बक्स 'विलायतु' से शहनाई की बारीकियाँ सीखीं, जो वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर से जुड़े प्रतिष्ठित शहनाई वादक थे। यह ऐसे समय में आया जब शहनाई को केवल धार्मिक और मांगलिक अवसरों का वाद्य माना जाता था — उस्ताद ने इसे कॉन्सर्ट के मंच तक पहुँचाकर इसकी पहचान को नई ऊँचाई दी।
ऐतिहासिक क्षण और उपलब्धियाँ
उनके करियर का सबसे स्मरणीय पल 15 अगस्त, 1947 को आया, जब उन्होंने दिल्ली के लाल किले से भारत की स्वतंत्रता के उत्सव में शहनाई की मधुर धुन से पूरे देश को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया और अनेक प्रतिष्ठित सम्मान अर्जित किए — जिनमें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तानसेन पुरस्कार और पद्म विभूषण शामिल हैं। 2001 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया।
भारतीय सिनेमा से जुड़ाव
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का भारतीय सिनेमा से भी गहरा नाता रहा। वह प्रख्यात निर्देशक सत्यजीत रे की चर्चित फिल्म 'जलसाघर' में नज़र आए और 1959 की फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' में उनकी शहनाई की स्वर-लहरियाँ गूँजीं। गौरतलब है कि यह वह दौर था जब शास्त्रीय संगीत और लोकप्रिय सिनेमा के बीच की दूरी बहुत कम कलाकार पाट पाते थे।
विदाई और राष्ट्रीय शोक
21 अगस्त, 2006 को 90 वर्ष की आयु में वाराणसी में कार्डियक अरेस्ट के कारण उस्ताद का निधन हो गया। उनके जाने के बाद सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। उन्हें वाराणसी में उनकी प्रिय शहनाई के साथ दफनाया गया और भारतीय सेना ने 21 तोपों की सलामी देकर इस महान कलाकार को अंतिम विदाई दी। उनकी विरासत आज भी शास्त्रीय संगीत के हर आयोजन में जीवंत है।