31 जुलाई 2026
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मुंशी प्रेमचंद जयंती 2026: PM मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह ने 'कथा सम्राट' को दी श्रद्धांजलि

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मुंशी प्रेमचंद जयंती 2026: PM मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह ने 'कथा सम्राट' को दी श्रद्धांजलि

सारांश

31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। मोदी ने काशी से प्रेमचंद के जुड़ाव और उनके यथार्थवादी साहित्य को सदा प्रेरणादायी बताया।

मुख्य बातें

31 जुलाई 2026 को मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर PM नरेंद्र मोदी ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मोदी ने प्रेमचंद की जन्मभूमि व कर्मभूमि काशी की साहित्यिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में उनके योगदान को रेखांकित किया।
गृह मंत्री अमित शाह ने प्रेमचंद को 'कथा सम्राट' बताते हुए उनके सामाजिक और बाल साहित्य की सराहना की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य अपने समय के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का सशक्त दस्तावेज़ है।
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गोदान , गबन , निर्मला , नमक का दरोगा सहित प्रमुख कृतियों का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 जुलाई को हिंदी साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उन्हें आदरपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि प्रेमचंद की कालजयी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी लिखे जाने के समय थीं। उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी एक्स पर पोस्ट कर 'उपन्यास सम्राट' को नमन किया।

PM मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने मानवीय संवेदनाओं को ऐसी सशक्त अभिव्यक्ति दी, जो आज भी प्रासंगिक है।' मोदी ने विशेष रूप से काशी — प्रेमचंद की जन्मभूमि और कर्मभूमि — का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इस नगर की साहित्यिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यथार्थ और सामाजिक समानता पर आधारित प्रेमचंद का साहित्य देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

गृह मंत्री और रक्षा मंत्री की श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि 'कथा सम्राट' के रूप में विख्यात प्रेमचंद ने अपने साहित्य में घटनाओं का ऐसा सजीव चित्रण किया कि उनकी रचनाएँ आज भी जीवंत प्रतीत होती हैं। शाह ने रेखांकित किया कि प्रेमचंद ने एक ओर समाज की पीड़ा, विषमताओं और शोषण को स्वर दिया, तो दूसरी ओर बाल कहानियों के ज़रिए बच्चों की संवेदनाओं का अत्यंत सरल व प्रभावी चित्रण किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेमचंद को 'हिंदी साहित्य का महान शिल्पकार' बताते हुए कहा कि उनका साहित्य केवल कथा-साहित्य नहीं, बल्कि अपने समय के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का सशक्त दस्तावेज़ है। राजनाथ ने कहा कि प्रेमचंद की कालजयी रचनाएँ आज भी समानता, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देती हैं।

जेपी नड्डा ने गिनाईं अमर कृतियाँ

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर प्रेमचंद को 'युगद्रष्टा साहित्यकार' कहते हुए उनकी कृतियों — गोदान, गबन, निर्मला, पंच परमेश्वर, नमक का दरोगा और बूढ़ी काकी — का विशेष उल्लेख किया। नड्डा ने कहा कि इन रचनाओं ने समाज की कुरीतियों, विषमताओं और अन्याय पर सशक्त प्रहार किया और स्वतंत्र चेतना व सामाजिक जागरण को नई दिशा दी।

प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत

गौरतलब है कि 31 जुलाई 1880 को वाराणसी (तत्कालीन काशी) के निकट लमही गाँव में जन्मे मुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं के कालजयी कथाकार माने जाते हैं। उनकी रचनाएँ ग्रामीण भारत की पीड़ा, जातिगत भेदभाव, स्त्री-शोषण और आर्थिक विषमता को इतनी सच्चाई से उकेरती हैं कि वे आज भी पाठ्यक्रमों और साहित्यिक विमर्श का केंद्र हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

प्रेमचंद जयंती पर केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं का एकसाथ श्रद्धांजलि देना इस बात का संकेत है कि साहित्यिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान के साथ जोड़ने की कोशिश सरकारी स्तर पर भी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज़मींदारी और सामाजिक विषमता। ऐसे में उनकी विरासत को 'राष्ट्रीय प्रेरणा' के रूप में प्रस्तुत करना एक चयनात्मक पाठ है। मुख्यधारा की कवरेज श्रद्धांजलि के शब्दों पर रुक जाती है; असली सवाल यह है कि क्या प्रेमचंद की रचनाओं में उठाए गए सवाल — भूमि, ऋण, जाति, स्त्री-स्वतंत्रता — आज की नीति-निर्माण में भी उतनी ही जगह पाते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंशी प्रेमचंद की जयंती कब मनाई जाती है?
मुंशी प्रेमचंद की जयंती प्रतिवर्ष 31 जुलाई को मनाई जाती है। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था।
PM मोदी ने प्रेमचंद जयंती पर क्या कहा?
PM मोदी ने एक्स पर लिखा कि प्रेमचंद की कालजयी रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने काशी की साहित्यिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रेमचंद के अमूल्य योगदान को भी रेखांकित किया।
मुंशी प्रेमचंद को 'कथा सम्राट' क्यों कहा जाता है?
मुंशी प्रेमचंद को 'कथा सम्राट' इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हिंदी और उर्दू में सैकड़ों कहानियाँ और दर्जनों उपन्यास लिखे जो ग्रामीण भारत की पीड़ा, सामाजिक विषमता और मानवीय संघर्ष को बेजोड़ ढंग से चित्रित करते हैं। गोदान, गबन और निर्मला जैसी उनकी कृतियाँ आज भी साहित्यिक विमर्श का केंद्र हैं।
जेपी नड्डा ने प्रेमचंद की किन रचनाओं का उल्लेख किया?
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपनी एक्स पोस्ट में गोदान , गबन , निर्मला , पंच परमेश्वर , नमक का दरोगा और बूढ़ी काकी का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन रचनाओं ने समाज की कुरीतियों और अन्याय पर सशक्त प्रहार किया।
प्रेमचंद का काशी से क्या संबंध था?
काशी (वाराणसी) मुंशी प्रेमचंद की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों रही है। PM मोदी ने इसी संदर्भ में रेखांकित किया कि प्रेमचंद ने काशी की साहित्यिक परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान दिया।
राष्ट्र प्रेस
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