मुरैना में अनियंत्रित ट्रक ने वन विभाग की चौकी को रौंदा, 1 वनरक्षक घायल, 11 जवानों ने भागकर बचाई जान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में 6 जून 2026 को उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 44 (दिल्ली–ग्वालियर मार्ग) पर स्थित वन विभाग की अस्थायी चौकी से एक तेज़ रफ़्तार अनियंत्रित ट्रक टकरा गया। इस दुर्घटना में ड्यूटी पर तैनात एक वनरक्षक घायल हो गया, जबकि 11 जवानों ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई। यह चौकी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चंबल के प्रतिबंधित रेत के अवैध परिवहन को रोकने के लिए बनाई गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार की सुबह वन विभाग और विशेष सशस्त्र बल (SAF) के कुल 12 जवान अस्थायी चेक पोस्ट पर नियमित ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान हरियाणा नंबर प्लेट वाला ट्रक (HR 38Z 0324) अनियंत्रित होकर सीधे चौकी की ओर मुड़ गया। जवानों को संभलने का मौका भी नहीं मिला — 11 जवान तत्काल भागकर सुरक्षित हो गए, लेकिन एक वनरक्षक ट्रक की चपेट में आ गया।
घायल जवान का उपचार
घायल वनरक्षक को तत्काल मुरैना जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है। सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना प्रभारी माता बसैया और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे। ट्रक को मार्ग से हटवाया गया और आगे की जाँच शुरू की गई।
चौकी क्यों बनाई गई थी
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मुरैना कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और वन विभाग के अधिकारियों ने मिलकर जिले में कई स्थानों पर चेक पोस्ट स्थापित किए हैं। इनका उद्देश्य चंबल नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र से होने वाले अवैध रेत खनन और उसके परिवहन को रोकना है। यह क्षेत्र लंबे समय से अवैध खनन माफिया की सक्रियता के लिए चर्चा में रहा है।
इससे पहले भी हो चुका है हादसा
यह ऐसे समय में आया है जब इसी जिले में 4 जून 2026 को दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर थाना पहाड़गढ़ क्षेत्र के कन्हार गाँव के पास भी एक ट्रक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। डायल-112 पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही आरक्षक अर्जुन जाट और पायलट राघवेंद्र धाकड़ मौके पर पहुँचे और घायल को तत्काल शासकीय अस्पताल पहाड़गढ़ पहुँचाया, जिससे उसकी जान बच सकी।
क्या होगा आगे
प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस हादसे के बाद चेक पोस्ट की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है। अनियंत्रित भारी वाहनों की बढ़ती घटनाएँ इस बात की ओर संकेत करती हैं कि खनन माफिया के दबाव में ट्रक चालक जोखिम भरे तरीके से वाहन चला रहे हैं। आने वाले दिनों में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई और तेज़ होने की संभावना है।