सीपीआई(एम) के गोविंदन का आरोप: 'सतीशन सरकार आरएसएस प्रायोजित, यूडीएफ में गहरी फूट'
सारांश
मुख्य बातें
सीपीआई(एम) के केरल प्रदेश सचिव एमवी गोविंदन ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को पलक्कड़ में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अनुकूल नीतियाँ अपना रहे हैं, और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर गहरी आंतरिक दरारें उभर आई हैं।
मुख्य आरोप और बयान
गोविंदन ने सीधे शब्दों में कहा, 'वीडी सतीशन सरकार आरएसएस प्रायोजित सरकार है।' उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और BJP कथित तौर पर सतीशन का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरल की राजनीति में विपक्षी दल सत्तारूढ़ गठबंधन की आंतरिक कलह को सार्वजनिक मंच पर उठाने की कोशिश कर रहा है।
गोविंदन ने कहा, 'केरल में पूरी यूडीएफ व्यवस्था अव्यवस्थित हो गई है। यहाँ तक कि यूडीएफ संयोजक अडूर प्रकाश खुद कह रहे हैं कि उन्हें कुछ नहीं पता।' उनका यह बयान गठबंधन में समन्वय की कमी को उजागर करने की कोशिश है।
यूडीएफ में आंतरिक विभाजन का दावा
सीपीआई(एम) नेता ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर भी मुख्यमंत्री सतीशन की तुलना में यूडीएफ संयोजक और कांग्रेस सांसद अडूर प्रकाश को अधिक समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस और यूडीएफ के भीतर बड़ा विभाजन है। ज़्यादा लोग अडूर प्रकाश का समर्थन कर रहे हैं, मुख्यमंत्री के पक्ष में बहुत कम लोग बोल रहे हैं।'
गोविंदन ने सवाल उठाया कि बिना आपसी विचार-विमर्श के यूडीएफ प्रभावी ढंग से कैसे काम कर सकता है। उन्होंने कहा, 'बिना विचार-विमर्श के यूडीएफ के मामलों को कैसे चलाया जा सकता है?' — यह सवाल गठबंधन की कार्यशैली पर सीधी चुनौती है।
IUML पर भी निशाना
गोविंदन ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) को भी नहीं बख्शा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने आरएसएस के बढ़ते प्रभाव के सामने समर्पण कर दिया है। हालाँकि, इस दावे को लेकर IUML की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
वाम मोर्चे की हार के बाद रणनीतिक हमला
गौरतलब है कि हाल के विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में वाम मोर्चे की सीटें 99 से घटकर महज 35 रह गई थीं — एक ऐतिहासिक पराजय। इस हार के बाद से सीपीआई(एम) यूडीएफ सरकार की आंतरिक कलह और कथित सांप्रदायिक झुकाव को अपना प्रमुख राजनीतिक हथियार बना रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, गोविंदन का यह बयान वाम दल की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें सत्तारूढ़ गठबंधन को विचारधारात्मक रूप से कमज़ोर दिखाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि यूडीएफ इन आरोपों का जवाब किस तरह देता है और क्या गठबंधन अपनी एकजुटता बनाए रख पाता है।