17 अक्टूबर 2026
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मैसूरु फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कार्तिक को दी मौत की सजा, 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या का मामला

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मैसूरु फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कार्तिक को दी मौत की सजा, 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या का मामला

सारांश

मैसूरु की फास्ट ट्रैक अदालत ने दशहरा उत्सव के दौरान 9 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने वाले कार्तिक को मृत्युदंड सुनाया। न्यायाधीश अनिल पी. वाघाडे का यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बना है और बाल यौन अपराध मामलों में त्वरित न्याय की नई मिसाल पेश करता है।

मुख्य बातें

मैसूरु फास्ट ट्रैक अदालत ने 17 अक्टूबर 2026 को आरोपी कार्तिक को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
पीड़िता 9 वर्षीय बच्ची थी, जो अपने परिवार के साथ दशहरा उत्सव के दौरान मैसूरु आई थी।
बच्ची के शरीर पर चाकू से 19 वार के निशान पाए गए थे।
आरोपी को सीसीटीवी फुटेज की मदद से पहचाना और गिरफ्तार किया गया।
कार्तिक इससे पहले भी दुष्कर्म की कोशिश के मामले में दो साल जेल काट चुका था।
अभियोजन की पैरवी सरकारी वकील जयवंती ने की; आरोपी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प है।

कर्नाटक के मैसूरु की फास्ट ट्रैक अदालत ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या के मामले में दोषी कार्तिक को मृत्युदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश अनिल पी. वाघाडे ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो पिछले साल दशहरा उत्सव के दौरान हुई उस भयावह घटना में न्याय की एक निर्णायक कड़ी है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। अदालत ने एक दिन पूर्व ही आरोपी को दोषी करार दिया था।

घटना का विवरण

पीड़ित बच्ची का परिवार दशहरा प्रदर्शनी मैदान के सामने, मैसूरु महल के निकट एक अस्थायी तंबू में रहकर गुब्बारे बेचने का काम करता था। उत्सव के दौरान परिवार वहीं ठहरा हुआ था।

घटना वाले दिन तड़के आरोपी कार्तिक ने कथित तौर पर उस समय बच्ची को तंबू से बाहर खींच लिया, जब वह अपने माता-पिता के पास सो रही थी। इसके बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। पोस्टमॉर्टम में बच्ची के शरीर पर चाकू से 19 वार के निशान पाए गए थे।

जाँच और गिरफ्तारी

घटना की सूचना मिलते ही नजराबाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की। शुरुआत में जाँचकर्ताओं के पास कोई ठोस सुराग नहीं था। इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। एक फुटेज में एक व्यक्ति को ऑटो रिक्शा से उतरकर संदिग्ध तरीके से घूमते देखा गया, जो जाँच में निर्णायक सुराग साबित हुआ।

इस सुराग के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया। कार्तिक मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टनम तालुक के सिद्धलिंगपुरा गाँव का रहने वाला है। जाँच में सामने आया कि वह इससे पहले एक महिला से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में गिरफ्तार हो चुका था और दो साल जेल में रह चुका था। जमानत पर रिहा होने के बाद वह कथित तौर पर अपने परिवार के पास नहीं लौटा, शराब का आदी हो गया और विभिन्न स्थानों पर आवारा घूमता रहा।

पुलिस हिरासत में घटनाक्रम

पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमला कर भागने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिससे कार्तिक के पैर में चोट लगी। जाँच टीम ने अपराध से जुड़े सभी साक्ष्य आरोपपत्र में शामिल किए।

अदालत में अभियोजन पक्ष

अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील जयवंती ने पूरे मामले की पैरवी की और अदालत से आरोपी के लिए अधिकतम सजा की माँग की। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पहले आरोपी को दोषी ठहराया और अगले ही दिन मृत्युदंड सुनाया।

सामाजिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस घटना ने कर्नाटक सहित पूरे देश में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। फास्ट ट्रैक अदालत का यह फैसला बाल यौन अपराध मामलों में त्वरित न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में बच्चों के विरुद्ध अपराधों में कड़ी सजा की माँग लंबे समय से उठाई जा रही है। आरोपी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक विफलता पर भी सवाल उठाता है जिसमें पूर्व दोषी कार्तिक जमानत पर छूटकर फिर से अपराध की राह पर निकल गया। आपराधिक न्याय प्रणाली में पुनरावर्ती अपराधियों की निगरानी का अभाव एक गंभीर संरचनात्मक खामी है। बाल यौन अपराध के मामलों में POCSO के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का उद्देश्य ऐसी त्वरित सुनवाई था, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या रिहा हुए अपराधियों पर प्रभावी निगरानी और पुनर्वास तंत्र भी उतनी ही तेज़ी से काम करता है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूरु बच्ची दुष्कर्म-हत्या मामले में किसे और क्यों मौत की सजा मिली?
आरोपी कार्तिक को मैसूरु फास्ट ट्रैक अदालत ने 17 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड सुनाया, क्योंकि उसने दशहरा उत्सव के दौरान 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की थी। न्यायाधीश अनिल पी. वाघाडे ने एक दिन पहले दोषसिद्धि के बाद यह सजा सुनाई।
यह घटना कब और कहाँ हुई थी?
यह घटना मैसूरु में दशहरा उत्सव के दौरान हुई थी, जब पीड़िता का परिवार मैसूरु महल के सामने दशहरा प्रदर्शनी मैदान के पास एक अस्थायी तंबू में रहकर गुब्बारे बेच रहा था। आरोपी ने तड़के बच्ची को तंबू से बाहर ले जाकर अपराध को अंजाम दिया।
पुलिस ने आरोपी कार्तिक को कैसे पकड़ा?
नजराबाद पुलिस ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनमें से एक फुटेज में आरोपी को ऑटो रिक्शा से उतरकर संदिग्ध तरीके से घूमते देखा गया। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने कार्तिक की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया।
क्या आरोपी का पहले भी कोई आपराधिक इतिहास था?
हाँ, जाँच में सामने आया कि कार्तिक एक महिला से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में पहले भी गिरफ्तार हो चुका था और दो साल जेल में रह चुका था। जमानत पर बाहर आने के बाद वह कथित तौर पर अपने परिवार के पास नहीं लौटा और शराब का आदी हो गया था।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
फास्ट ट्रैक अदालत के मृत्युदंड के फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, जो भारतीय कानून के तहत आरोपी का अधिकार है। उच्च न्यायालय निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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