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केलोंग में ICMR-CHAMP हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर का शिलान्यास करेंगे जेपी नड्डा, लाहौल-स्पीति को मिलेगी बड़ी सुविधा

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केलोंग में ICMR-CHAMP हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर का शिलान्यास करेंगे जेपी नड्डा, लाहौल-स्पीति को मिलेगी बड़ी सुविधा

सारांश

केलोंग में ICMR-CHAMP की स्थापना महज एक शोध केंद्र का उद्घाटन नहीं — यह हिमालयी क्षेत्र की दशकों पुरानी स्वास्थ्य अनुसंधान की खाई को पाटने की कोशिश है। दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन लॉजिस्टिक्स से लेकर जलवायु-संवेदनशील बीमारियों तक, यह सेंटर भारत को उच्च-ऊँचाई चिकित्सा शोध में वैश्विक मानचित्र पर लाने का दावा करता है।

मुख्य बातें

जेपी नड्डा सोमवार को केलोंग, लाहौल-स्पीति में ICMR-CHAMP की आधारशिला रखेंगे।
सेंटर ICMR द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत स्थापित होगा।
शोध में उच्च-ऊँचाई शरीर विज्ञान, जलवायु-संवेदनशील बीमारियाँ, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा शामिल होंगे।
टेलीमेडिसिन, ड्रोन-आधारित स्वास्थ्य लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम सर्विलांस पर भी काम होगा।
समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ , पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और सांसद कंगना रनौत भी उपस्थित रहेंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा सोमवार को हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के केलोंग में आईसीएमआर सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च (ICMR-CHAMP) की आधारशिला रखेंगे। यह केंद्र इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत स्थापित किया जा रहा है। यह देश के उच्च-हिमालयी और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों पर केंद्रित बहु-विषयक शोध और स्वास्थ्य सेवा नवाचार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

सेंटर की स्थापना का उद्देश्य

हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यधिक ऊँचाई, कठोर मौसम, दुर्गम भूगोल, भौगोलिक अलगाव और तेज़ी से बदलती जलवायु के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी विशेष चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। ये कारक बीमारियों के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, व्यावसायिक स्वास्थ्य और आपातकालीन प्रतिक्रिया पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

ICMR-CHAMP का उद्देश्य इन्हीं कठिन परिस्थितियों में रहने और काम करने वाले समुदायों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण एकत्र करना और अनुकूलनीय एवं व्यापक रूप से लागू किए जा सकने वाले स्वास्थ्य समाधान विकसित करना है।

शोध के प्रमुख क्षेत्र

सेंटर के अनुसंधान दायरे में अनेक महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। इनमें उच्च-ऊँचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली और अनुकूलन, पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु-संवेदनशील और उभरती संक्रामक-असंक्रामक बीमारियाँ, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं व्यावसायिक स्वास्थ्य, तथा आपदा चिकित्सा जैसे विषय प्रमुख हैं।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य जोखिम तेज़ी से बढ़ रहे हैं और इन क्षेत्रों पर केंद्रित समर्पित शोध संस्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

तकनीकी नवाचार पर ज़ोर

सेंटर दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, टेलीमेडिसिन, ड्रोन-आधारित हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम पब्लिक हेल्थ सर्विलांस के एकीकरण की संभावनाओं पर भी शोध करेगा। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र में उच्च-ऊँचाई और आदिवासी समुदायों के साथ निरंतर फील्ड रिसर्च के लिए एक अहम संस्थागत मंच भी बनेगा।

राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व

उम्मीद जताई जा रही है कि यह सेंटर आदिवासी स्वास्थ्य, आपदा तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य प्रणालियों से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देगा। साथ ही, उच्च-ऊँचाई चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक शोध समुदाय में भी भारत की भूमिका को सुदृढ़ करेगा।

समारोह में प्रमुख उपस्थिति

शिलान्यास समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद कंगना रनौत सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। यह सेंटर भविष्य में हिमालयी स्वास्थ्य शोध का एक राष्ट्रीय केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि दुनिया के सबसे दुर्गम भूगोल में एक पूर्ण शोध अवसंरचना खड़ी करना कितना व्यावहारिक और टिकाऊ होगा। हिमालयी क्षेत्र में पहले भी कई स्वास्थ्य पहलें घोषित हुईं जो क्रियान्वयन की जटिलताओं में उलझ गईं। ड्रोन लॉजिस्टिक्स और टेलीमेडिसिन की बात तो आकर्षक है, पर सीमावर्ती क्षेत्र में कनेक्टिविटी और मौसमी बाधाएँ ज़मीनी हकीकत हैं जिन्हें इस योजना को स्पष्ट रूप से संबोधित करना होगा। यह सेंटर आदिवासी और सैन्य स्वास्थ्य — दोनों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, इसलिए इसकी प्रगति पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ICMR-CHAMP क्या है और इसे कहाँ स्थापित किया जाएगा?
ICMR-CHAMP यानी 'आईसीएमआर सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च' हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के केलोंग में स्थापित होगा। यह ICMR द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत बनाया जाएगा।
इस सेंटर में किन विषयों पर शोध होगा?
सेंटर में उच्च-ऊँचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली, पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु-संवेदनशील और उभरती बीमारियाँ, संक्रामक-असंक्रामक रोग, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं व्यावसायिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा पर शोध होगा। साथ ही टेलीमेडिसिन, ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम सर्विलांस पर भी काम किया जाएगा।
जेपी नड्डा शिलान्यास समारोह में कब जाएंगे?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सोमवार, 13 अक्टूबर 2026 को केलोंग में ICMR-CHAMP की आधारशिला रखेंगे। समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और सांसद कंगना रनौत भी उपस्थित रहेंगे।
यह सेंटर लाहौल-स्पीति के लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
लाहौल-स्पीति देश के सबसे दुर्गम और अत्यधिक ऊँचाई वाले जिलों में से एक है, जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच हमेशा कठिन रही है। यह सेंटर स्थानीय और आदिवासी समुदायों की स्वास्थ्य चुनौतियों पर केंद्रित शोध करेगा और टेलीमेडिसिन व ड्रोन लॉजिस्टिक्स के ज़रिये दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के नए मार्ग तलाशेगा।
यह सेंटर वैश्विक स्तर पर भारत के लिए क्यों अहम है?
उच्च-ऊँचाई चिकित्सा शोध के क्षेत्र में भारत की वैश्विक उपस्थिति अभी तक सीमित रही है। ICMR-CHAMP के ज़रिये भारत इस विशेष क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय शोध समुदाय में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकेगा, जो जलवायु परिवर्तन के दौर में और भी प्रासंगिक हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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