10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईसीएमआर का हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर: जेपी नड्डा 11 जुलाई को केलोंग में रखेंगे आधारशिला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईसीएमआर का हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर: जेपी नड्डा 11 जुलाई को केलोंग में रखेंगे आधारशिला

सारांश

हिमालयी क्षेत्र के स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी है। आईसीएमआर का यह सेंटर केलोंग के मौजूदा फील्ड स्टेशन को एक बहु-विषयक हब में बदलेगा — जो माउंटेन मेडिसिन से लेकर ड्रोन-सक्षम स्वास्थ्य सेवा तक, सीमावर्ती और आदिवासी आबादी के लिए वर्षभर काम करेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 11 जुलाई 2025 को केलोंग, लाहौल और स्पीति में आईसीएमआर के हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखेंगे।
यह सेंटर केलोंग के मौजूदा आईसीएमआर फील्ड स्टेशन को मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च हब में अपग्रेड करेगा।
अनुसंधान के क्षेत्रों में माउंटेन मेडिसिन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, आपदा चिकित्सा और जलवायु-संवेदनशील बीमारियाँ शामिल हैं।
सेंटर टेलीमेडिसिन, ड्रोन-सक्षम लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम हेल्थ सर्विलांस को एकीकृत करेगा।
AFMS, DRDO, हिमाचल प्रदेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ संस्थागत सहयोग प्रस्तावित है।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 11 जुलाई 2025 को हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के केलोंग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के 'हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च सेंटर' की आधारशिला रखेंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 9 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

सेंटर की परिकल्पना और उद्देश्य

यह सेंटर केलोंग में आईसीएमआर के मौजूदा फील्ड स्टेशन को एक पूर्ण, बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) हब में रूपांतरित करेगा। मंत्रालय के अनुसार, इसका प्राथमिक ध्यान भारत के अधिक ऊंचाई वाले और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में शोध, नवाचार और क्षमता निर्माण पर होगा। यह सेंटर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत आईसीएमआर द्वारा स्थापित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र अत्यधिक ऊंचाई, कठोर जलवायु, दुर्गम भूभाग और तेज़ी से बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए विशेष चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है — जो बीमारी के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और आपातकालीन प्रतिक्रिया को सीधे प्रभावित करती हैं।

अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र

मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह सेंटर निम्नलिखित विषयों पर वैज्ञानिक प्रमाण और समाधान विकसित करेगा:

उच्च-ऊंचाई शरीर-क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) और अनुकूलन (एक्लिमेटाइजेशन), माउंटेन मेडिसिन, जलवायु-संवेदनशील और उभरती बीमारियाँ, संक्रामक और गैर-संचारी रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और व्यावसायिक स्वास्थ्य तथा आपदा चिकित्सा। यह व्यापक दायरा इसे देश के किसी भी अन्य पर्वतीय स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई से अलग बनाता है।

डिजिटल स्वास्थ्य और तकनीकी एकीकरण

दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए सेंटर डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, टेलीमेडिसिन, ड्रोन-सक्षम हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम पब्लिक हेल्थ सर्विलांस को एकीकृत करेगा। यह तकनीकी ढाँचा उन समुदायों तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने में सहायक होगा जहाँ पारंपरिक आपूर्ति श्रृंखला बाधित रहती है।

सेंटर की पहुँच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र में अधिक ऊंचाई पर निवास करने वाली और आदिवासी आबादी तक वर्ष भर बनाए रखी जाएगी, जिससे दीर्घकालिक कोहोर्ट अध्ययन और फील्ड रिसर्च संभव हो सकेंगे।

संस्थागत सहयोग और वैश्विक महत्व

बयान के अनुसार, यह सेंटर आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (AFMS), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), हिमाचल प्रदेश सरकार तथा देश-विदेश के शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ संस्थागत सहयोग स्थापित करेगा। इससे ट्रांसलेशनल रिसर्च और नीतिगत समर्थन के लिए एक समग्र इकोसिस्टम तैयार होगा। यह सेंटर आदिवासी स्वास्थ्य, आपदा तैयारी और डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन पर वैश्विक शोध में भी भारत की भागीदारी सुनिश्चित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी — विशेषकर तब जब लाहौल-स्पीति जैसे दुर्गम जिलों में बुनियादी ढाँचा और मानव संसाधन दोनों की ऐतिहासिक कमी रही है। DRDO और AFMS के साथ सहयोग का ढाँचा सेना की ज़रूरतों को नागरिक स्वास्थ्य अनुसंधान से जोड़ने का अवसर देता है, जो अब तक अलग-अलग पटरियों पर चलते रहे हैं। ड्रोन-सक्षम लॉजिस्टिक्स और टेलीमेडिसिन का उल्लेख महत्वाकांक्षी है, परंतु इन तकनीकों की सफलता स्थानीय कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित जनशक्ति पर निर्भर करेगी — जिसका ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीएमआर का हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर क्या है और यह कहाँ बनेगा?
यह केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के केलोंग में स्थापित किया जाएगा। यह आईसीएमआर के मौजूदा फील्ड स्टेशन को एक बहु-विषयक अनुसंधान हब में अपग्रेड करेगा, जो उच्च-ऊंचाई वाले और जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों के स्वास्थ्य पर केंद्रित होगा।
इस सेंटर की आधारशिला कब और कौन रखेगा?
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा 11 जुलाई 2025 को केलोंग में इस सेंटर की आधारशिला रखेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 जुलाई को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।
यह सेंटर किन विषयों पर शोध करेगा?
सेंटर उच्च-ऊंचाई शरीर-क्रिया विज्ञान, माउंटेन मेडिसिन, जलवायु-संवेदनशील बीमारियाँ, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, संक्रामक और गैर-संचारी रोग, पर्यावरण स्वास्थ्य तथा आपदा चिकित्सा पर वैज्ञानिक प्रमाण और समाधान विकसित करेगा।
इस सेंटर से सीमावर्ती और आदिवासी आबादी को क्या फायदा होगा?
सेंटर की पहुँच सीमावर्ती और आदिवासी आबादी तक वर्ष भर बनाए रखी जाएगी। टेलीमेडिसिन, ड्रोन-सक्षम हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम सर्विलांस के ज़रिए दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी बेहतर होगी।
इस सेंटर में कौन-कौन से संस्थान सहयोग करेंगे?
आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (AFMS), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), हिमाचल प्रदेश सरकार तथा भारत और विदेशों के शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान इस सेंटर के साथ संस्थागत सहयोग स्थापित करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले