नागालैंड में शिक्षा सुधार के लिए जिला विद्यालय नेताओं की पेशेवर सामुदायिक के गठन की घोषणा
सारांश
Key Takeaways
- डीएसएसएल पीएलसी की स्थापना से शिक्षा में सुधार होगा।
- विद्यालय नेतृत्व और पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
- नवाचार शिक्षा में आवश्यक है।
- सरकारी स्कूलों में लोगों का विश्वास बहाल करना प्राथमिकता है।
कोहिमा, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नागालैंड सरकार ने मंगलवार को ‘जिला विद्यालय एवं प्रणाली नेताओं की पेशेवर शिक्षण सामुदायिक’ (डीएसएसएल पीएलसी) की स्थापना की है, जिसे राज्य की शिक्षा प्रणाली को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्कूल शिक्षा और एससीईआरटी के सलाहकार केख्रिएलहौली योम ने कार्यक्रम में बताया कि एक मजबूत शिक्षा प्रणाली तीन मुख्य स्तंभों: विद्यालय नेतृत्व, पाठ्यक्रम, और प्रशासन पर आधारित होती है। उन्होंने बुनियादी ढांचे की कमी, कनेक्टिविटी की समस्याओं, मानव संसाधनों की कमी, और जमीनी स्तर पर चुनौतियों को दूर करने की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया।
उन्होंने सरकारी विद्यालयों में लोगों का विश्वास पुनर्स्थापित करने को प्राथमिकता बताया, यह कहते हुए कि इस प्रकार की पहलों से शिक्षा प्रणाली अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगी।
राज्य में २४९ विद्यालयों का बेसलाइन सर्वेक्षण किया गया है और विद्यालय गुणवत्ता मूल्यांकन एवं मान्यता ढांचे (एसक्यूएएएफ) का पायलट कार्यक्रम भी आरंभ किया गया है, जिससे मौजूदा स्थिति का आकलन और भविष्य की योजनाएं तैयार की जा सकें। इसके साथ ही, सुधारों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० (एनईपी-२०२०) के अनुरूप बनाने की कोशिश की जा रही है।
एससीईआरटी नागालैंड की उपनिदेशक बेनजुंग याडेन ने विद्यालय नेतृत्व विकास कार्यक्रम (एसएलडीपी) की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य स्कूलों में नेतृत्व क्षमता को मजबूत करना और सीखने के परिणामों में सुधार लाना है।
इस कार्यक्रम के तहत विद्यालय प्रमुखों और वरिष्ठ शिक्षकों के लिए एक महीने का प्रमाणपत्र कोर्स और अन्य अल्पकालिक प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार मॉड्यूल, अनुसंधान गतिविधियाँ, और श्रेष्ठ प्रथाओं का दस्तावेजीकरण शामिल है।
स्कूल शिक्षा सचिव मथातुंग तुंगो ने कहा कि बदलते शैक्षणिक परिदृश्य में नवाचार अत्यंत आवश्यक है और शिक्षा में उत्कृष्टता एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं, स्कूल शिक्षा के प्रधान निदेशक शशांक प्रताप सिंह ने बताया कि लगभग ३८५ शैक्षणिक नेताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एनईपी-२०२० के तहत शिक्षक प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है और विद्यालय प्रमुखों की भूमिका जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शिक्षकों को पदोन्नति से पहले ही प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि पेशेवर विकास को बढ़ावा मिल सके।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल शिक्षा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और बेहतर प्रशासन को बढ़ावा देगी, जिससे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।