नालंदा विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में 14 देशों के 219 छात्रों को उपाधि, 7 स्वर्ण पदक महिलाओं को

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नालंदा विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में 14 देशों के 219 छात्रों को उपाधि, 7 स्वर्ण पदक महिलाओं को

सारांश

राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह महज एक रस्म नहीं था — यह प्राचीन ज्ञान परंपरा के आधुनिक पुनर्जन्म का उत्सव था। 14 देशों के 219 छात्र, 8 स्वर्ण पदकों में 7 महिलाओं के नाम — यह संस्थान वैश्विक शिक्षा केंद्र बनने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

नालंदा विश्वविद्यालय ने 19 मई 2026 को राजगीर, बिहार में तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया।
14 देशों के 219 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और वियतनाम के छात्र शामिल।
8 स्वर्ण पदकों में से 7 महिला छात्राओं ने जीते, सभी विषयों में महिलाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के.
मिश्रा और राज्यपाल सैयद अता हसनैन समारोह में उपस्थित रहे।
'शास्त्रार्थ 2026' के विजेताओं को सम्मानित किया गया; कौटिल्य क्षमता निर्माण केंद्र का उद्घाटन किया गया।

नालंदा विश्वविद्यालय ने मंगलवार, 19 मई 2026 को बिहार के राजगीर स्थित अपने परिसर में तीसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया, जिसमें 14 देशों के 219 छात्रों को स्नातक उपाधियाँ प्रदान की गईं। राज्यपाल सैयद अता हसनैन, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुए इस समारोह ने संस्थान की वैश्विक पहचान को एक बार फिर रेखांकित किया।

मुख्य घटनाक्रम

विश्वमित्रालय सभागार में आयोजित इस समारोह में 219 छात्रों को उपाधियाँ दी गईं, जिनमें से 8 छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय बात यह रही कि 8 में से 7 स्वर्ण पदक महिला छात्राओं ने जीते, जो सभी विषयों में उनके असाधारण प्रदर्शन का प्रमाण है। यह 2024-26 बैच का दीक्षांत समारोह था और विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से तीसरा ऐसा आयोजन।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

इस वर्ष के समारोह में बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और वियतनाम सहित कुल 14 देशों के छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। यह विविधता नालंदा की उस ऐतिहासिक परंपरा की याद दिलाती है जब प्राचीन नालंदा में एशिया के कोने-कोने से विद्यार्थी ज्ञान अर्जन के लिए आते थे। गौरतलब है कि आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना उसी विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से की गई थी।

विशिष्ट अतिथियों की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने संस्थान की ऐतिहासिक विरासत की सराहना करते हुए कहा, 'नालंदा को देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ। नालंदा का लंबा इतिहास और समृद्ध विरासत है। यह शिक्षा के महान केंद्रों में से एक था। अब, हम फिर से विश्वभर से ऐसे ही शिक्षा केंद्र का निर्माण करने जा रहे हैं।' उनके इस वक्तव्य को उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और छात्रों ने सराहा।

शास्त्रार्थ 2026 और नए केंद्र का उद्घाटन

समारोह में हाल ही में संपन्न 'शास्त्रार्थ 2026' के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इसके साथ ही परीक्षाओं के ठीक नौ दिन बाद कौटिल्य क्षमता निर्माण केंद्र का उद्घाटन किया गया, जो संस्थान के शैक्षणिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छात्रों के अनुभव

पारिस्थितिकी और पर्यावरण अध्ययन की छात्रा कपिला स्वप्ना ने कहा, 'यह एक बेहद खूबसूरत कैंपस है। मैं मास्टर्स कोर्स कर रहे सभी छात्रों से अनुरोध करती हूँ कि वे यहाँ दाखिला लें और संकाय की उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त करें।' अन्य छात्रों ने भी संस्थान के उच्च शैक्षणिक मानकों की प्रशंसा की और कहा कि यहाँ की शिक्षा उन्हें अपने समकालीनों से एक कदम आगे रखती है। यह समारोह ज्ञान, संवाद और अंतःविषयक शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में नालंदा की भूमिका को नई ऊँचाई देने का संकल्प लेकर संपन्न हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह संस्थान एशिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में जगह बना पाता है। शोध उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी भर्ती और उद्योग-अकादमिक साझेदारी के मोर्चे पर अभी लंबा रास्ता तय करना है — केवल दीक्षांत समारोहों की भव्यता से वैश्विक शैक्षणिक केंद्र नहीं बनते।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालंदा विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह कब और कहाँ हुआ?
यह समारोह 19 मई 2026 को बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागार में आयोजित हुआ। यह 2024-26 बैच का दीक्षांत समारोह था।
इस समारोह में कितने और किन देशों के छात्रों को डिग्री मिली?
कुल 14 देशों के 219 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और वियतनाम के छात्र शामिल थे।
स्वर्ण पदक किन्हें मिले और महिलाओं का प्रदर्शन कैसा रहा?
कुल 8 स्वर्ण पदक दिए गए, जिनमें से 7 महिला छात्राओं ने जीते। महिलाओं ने सभी विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पुरुष छात्रों को पीछे छोड़ा।
कौटिल्य क्षमता निर्माण केंद्र क्या है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
कौटिल्य क्षमता निर्माण केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय की एक नई शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्घाटन परीक्षाओं के नौ दिन बाद इसी दीक्षांत समारोह के अवसर पर किया गया।
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना का उद्देश्य क्या है?
नालंदा विश्वविद्यालय को प्राचीन नालंदा की ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, ताकि यह एशिया और विश्व के लिए ज्ञान, संवाद और अंतःविषयक शिक्षा का वैश्विक केंद्र बन सके।
राष्ट्र प्रेस
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