नक्सली कमांडर सीताराम सोनवानी का नया जीवन: आत्मसमर्पण के बाद PM आवास योजना से मिला पक्का घर
सारांश
मुख्य बातें
बलरामपुर जिले के पूर्व नक्सली कमांडर सीताराम सोनवानी की जिंदगी 26 फरवरी 2021 को आत्मसमर्पण के बाद पूरी तरह बदल गई है। छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान मिल चुका है, और अब वे अपने परिवार के साथ मुख्यधारा में सामान्य जीवन बिता रहे हैं। जंगल और हिंसा की राह छोड़कर सीताराम का पूरा ध्यान अब अपने बच्चों के भविष्य और पारिवारिक जीवन पर केंद्रित है।
नक्सल संगठन से जुड़ाव और कमांडर तक का सफर
सीताराम ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1998 में नक्सली संगठन में प्रवेश किया था। 2005 तक वे उत्तर सरगुजा क्षेत्र में कमांडर के पद पर थे, बाद में उनका कार्यक्षेत्र लुंड्रा हो गया। इसी दौरान उनकी मुलाकात अपनी पत्नी बिराजो से हुई, जिन्होंने उन्हें हिंसक जीवन छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
बिराजो ने उनसे साफ कहा कि उनके नाम से लोग डरते हैं और यह रास्ता उचित नहीं है। इस बात ने सीताराम के मन पर गहरा असर डाला और उन्होंने संगठन छोड़ने का निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण और पुनर्वास की प्रक्रिया
सीताराम ने बताया कि संगठन छोड़ने के बाद वे परिवार सहित असम चले गए। उस समय उनके पास संगठन का धन था, लेकिन उन्होंने उसका उपयोग करने से परहेज किया और परिवार की सहायता से जीवन यापन किया। जब उन्हें सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति की जानकारी मिली, तो उन्होंने मुख्यधारा में लौटने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का फैसला किया।
26 फरवरी 2021 को उन्होंने बलरामपुर जिले में तत्कालीन अधिकारी रामकृष्ण साहू के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें जेल भेजा गया, जहाँ वे करीब 14 महीने रहे। दो मामलों में वे जेल में रहते हुए बरी हुए, जबकि तीन मामलों में जमानत मिलने के बाद रिहा हुए।
पक्का मकान और परिवार का नया जीवन
पुनर्वास योजना के तहत सीताराम का प्रधानमंत्री आवास योजना का पक्का मकान अब बनकर तैयार हो चुका है। उनके बेटे की पढ़ाई में सरकारी मदद मिली है और उनकी पत्नी बिराजो को 10वीं की परीक्षा पूरी करने में भी सहयोग दिया गया। बिराजो ने बताया कि परिवार करीब 16 साल तक बाहर रहा और गांव लौटने के बाद पति को जेल जाना पड़ा, लेकिन अब सरकार की मदद से स्थिति बेहतर हुई है।
सीताराम ने नए घर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और बलरामपुर के पूर्व एसपी लाल उमेद सिंह का आभार जताया।
जिले में पुनर्वास योजना का विस्तार
बलरामपुर जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी के अनुसार, मुख्यधारा में लौटे लोगों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष पहल की जा रही है। इस योजना के तहत जिले में कुल 27 मकान स्वीकृत किए गए हैं — इनमें से 18 मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 9 मकानों का निर्माण अभी जारी है।
जमीन के पट्टे का इंतजार
सीताराम की एक बड़ी चिंता अभी भी बनी हुई है — उनके पास अपनी जमीन नहीं है। वे जिस भूमि पर रह रहे हैं वह वन भूमि है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण के करीब पाँच साल बाद भी जमीन के दस्तावेज अभी तक नहीं मिले हैं। वन विभाग की ओर से नक्शे से संबंधित प्रक्रिया पूरी कर दस्तावेज जनपद में जमा किए जा चुके हैं। सीताराम ने सरकार से जल्द वन भूमि पट्टा जारी करने का आग्रह किया है। पुनर्वास की यह अधूरी कड़ी उनके स्थायी पुनर्एकीकरण की राह में अहम बाधा बनी हुई है।