9 अक्टूबर 2026
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एनसीसी कैडेट्स की 'हुगली संकल्प' अभियान: 410 किमी की नौकायन यात्रा पूरी कर कोलकाता पहुंचे

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एनसीसी कैडेट्स की 'हुगली संकल्प' अभियान: 410 किमी की नौकायन यात्रा पूरी कर कोलकाता पहुंचे

सारांश

'हुगली संकल्प' सिर्फ एक नदी यात्रा नहीं थी — यह एनसीसी की वह प्रयोगशाला थी जहाँ 60 कैडेट्स ने 410 किमी में साहस, सेवा और सामाजिक जागरूकता को एकसाथ साधा। फरक्का से कोलकाता तक हुगली की लहरों पर तैरता यह 'फ्लोटिंग क्लासरूम' युवा भारत की उस तस्वीर को उकेरता है जो कक्षाओं से नहीं, चप्पुओं से गढ़ी जाती है।

मुख्य बातें

एनसीसी के 60 नौसैनिक कैडेट्स ने 8 अक्टूबर 2026 को 410 किलोमीटर लंबी नौकायन यात्रा 'हुगली संकल्प- मेन्यू 2026' सफलतापूर्वक पूरी की।
यात्रा 25 सितंबर को फरक्का लॉक गेट से शुरू हुई और कोलकाता के मैन ओ' वार जेट्टी पर संपन्न हुई।
अभियान का नेतृत्व कमांडर संजीव शरण और कमांडर मृण्मय घोष ने किया; रवानगी मेजर जनरल ए.पी.एस.
'फ्लोटिंग क्लासरूम' के माध्यम से गंगा डॉल्फिन संरक्षण, एचपीवी जागरूकता, साइबर सुरक्षा और बाल विवाह विरोध पर समुदायों से संवाद किया गया।
जलमार्ग परिवहन सड़क की तुलना में 50-60% लागत बचाता है; अभियान ने राष्ट्रीय जलमार्ग-1 की संभावनाएँ उजागर कीं।
अभियान पश्चिम बंगाल और सिक्किम डायरेक्टरेट के कैडेट्स ने चलाया और बीएसएफ जवानों को राखी बाँधकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के 60 नौसैनिक कैडेट्स — लड़के और लड़कियाँ — ने 8 अक्टूबर 2026 को 410 किलोमीटर लंबी नौकायन यात्रा 'हुगली संकल्प- मेन्यू 2026' सफलतापूर्वक पूरी कर कोलकाता के मैन ओ' वार जेट्टी पर पहुंचकर इतिहास रचा। 25 सितंबर को फरक्का लॉक गेट से आरंभ हुई इस कठिन जलयात्रा को उत्साह भरी तालियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न किया गया।

अभियान का विवरण और नेतृत्व

इस अभियान की कमान एक्सपीडिशन कमांडर संजीव शरण और सुरक्षा अधिकारी कमांडर मृण्मय घोष ने संभाली। व्हेलर नौकाएँ, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) का एक पोत और विशेष सुरक्षा नौकाएँ मिलकर हुगली नदी के रास्ते कोलकाता पहुंचीं। अभियान को पश्चिम बंगाल और सिक्किम डायरेक्टरेट के एनसीसी एडीजी मेजर जनरल ए.पी.एस. चहल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

सैकड़ों दर्शकों के बीच जब कैडेट्स ने अपने चप्पू थामे और किनारे लगाए, तो वरिष्ठ अधिकारियों और गर्व से भरे परिजनों ने करतल ध्वनि से उनका भव्य स्वागत किया।

'फ्लोटिंग क्लासरूम' — सामाजिक जागरूकता की अनूठी पहल

एक अधिकारी ने बताया कि 'हुगली संकल्प' महज एक साहसिक मिशन नहीं था — यह नागरिक-सैन्य तालमेल और युवा सशक्तिकरण का प्रतीक था। यात्रा के दौरान कैडेट्स ने एक 'फ्लोटिंग क्लासरूम' के रूप में काम करते हुए समुदायों के बीच पर्यावरण और नदी स्वास्थ्य से जुड़े कार्य किए।

अभियान में गंगा डॉल्फिन संरक्षण को बढ़ावा देना, पानी की शुद्धता की लाइव जांच, वर्षाजल संग्रह और कम लागत वाले शुद्धिकरण मॉडल का व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल था। कैडेट्स ने रुकने के हर पड़ाव पर मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग को प्रोत्साहित किया और 'नशा मुक्त भारत अभियान' में सहभागिता की अपील की।

स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता

अधिकारी के अनुसार, कैडेट्स ने स्थानीय समुदायों के साथ साइबर सुरक्षा के महत्व पर संवाद किया और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के तरीके साझा किए। उन्होंने ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) और उससे जुड़े सर्वाइकल कैंसर के खतरे पर भी जागरूकता फैलाई, तथा युवा लड़कियों के लिए टीकाकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

कैडेट्स ने बाल विवाह विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी की। भारत-बांग्लादेश सीमा पर जाकर कैडेट्स ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवानों से मुलाकात की और उनकी कलाइयों पर राखियाँ बाँधकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

जलमार्गों की संभावनाएँ और राष्ट्रीय महत्व

इस अभियान ने आईडब्ल्यूएआई के सहयोग से नेशनल वॉटरवे-1 (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) की व्यापक संभावनाओं को उजागर किया। आंकड़ों के अनुसार, जलमार्ग परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लागत में 50-60 प्रतिशत की बचत करता है, जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी है। गौरतलब है कि सरकार कार्गो ढुलाई के लिए जलमार्गों के विस्तार पर सक्रियता से विचार कर रही है।

कैडेट्स ने एनटीपीसी पावर प्लांट सहित कई ऐतिहासिक स्थलों का भी दौरा किया। यह अभियान इस मायने में उल्लेखनीय है कि इसने एनसीसी के साहसिक प्रशिक्षण को सामाजिक दायित्व और पर्यावरण चेतना से सफलतापूर्वक जोड़ा — एक ऐसा प्रयोग जो भविष्य के युवा नेतृत्व के लिए प्रेरणा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा यह है कि ये युवा सीमाओं पर राखी बाँधने और जलमार्गों की तस्वीरें खिंचवाने से आगे बढ़कर नदी पुनरुद्धार और डिजिटल साक्षरता जैसे मुद्दों पर दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ पाते हैं या नहीं। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 की 50-60% लागत बचत का आँकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन नीति-स्तर पर इसका रूपांतरण अभी भी धीमा है — इस अभियान की असली सफलता तब होगी जब यह सुर्खियों से आगे जाकर नीति-संवाद का हिस्सा बने।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'हुगली संकल्प- मेन्यू 2026' अभियान क्या था?
यह एनसीसी के 60 नौसैनिक कैडेट्स द्वारा चलाया गया 410 किलोमीटर लंबा नौकायन अभियान था, जो फरक्का से कोलकाता तक हुगली नदी के रास्ते पूरा किया गया। यह पश्चिम बंगाल और सिक्किम डायरेक्टरेट के कैडेट्स ने 25 सितंबर 2026 को शुरू किया और 8 अक्टूबर को संपन्न हुआ।
अभियान के दौरान कैडेट्स ने कौन-से सामाजिक कार्य किए?
कैडेट्स ने गंगा डॉल्फिन संरक्षण, पानी की शुद्धता जांच, साइबर सुरक्षा जागरूकता, एचपीवी टीकाकरण प्रचार और बाल विवाह विरोधी अभियानों में भाग लिया। उन्होंने मिलेट्स को बढ़ावा देने के साथ 'नशा मुक्त भारत अभियान' का भी प्रचार किया।
अभियान का नेतृत्व किसने किया?
अभियान की कमान एक्सपीडिशन कमांडर संजीव शरण और सुरक्षा अधिकारी कमांडर मृण्मय घोष ने संभाली। अभियान को एनसीसी एडीजी मेजर जनरल ए.पी.एस. चहल ने फरक्का से हरी झंडी दिखाई थी।
जलमार्गों से परिवहन में कितनी लागत बचती है?
आंकड़ों के अनुसार, जलमार्ग परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में 50-60 प्रतिशत तक लागत बचाता है। इस अभियान ने आईडब्ल्यूएआई के सहयोग से राष्ट्रीय जलमार्ग-1 की सतत परिवहन क्षमता को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई।
कैडेट्स ने बीएसएफ जवानों से कैसे संबंध बनाए?
कैडेट्स ने भारत-बांग्लादेश सीमा का दौरा किया और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवानों की कलाइयों पर राखियाँ बाँधीं। इस प्रतीकात्मक कदम के जरिए उन्होंने नागरिक-सैन्य एकता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
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