एनसीसी कैडेट्स की 'हुगली संकल्प' अभियान: 410 किमी की नौकायन यात्रा पूरी कर कोलकाता पहुंचे
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के 60 नौसैनिक कैडेट्स — लड़के और लड़कियाँ — ने 8 अक्टूबर 2026 को 410 किलोमीटर लंबी नौकायन यात्रा 'हुगली संकल्प- मेन्यू 2026' सफलतापूर्वक पूरी कर कोलकाता के मैन ओ' वार जेट्टी पर पहुंचकर इतिहास रचा। 25 सितंबर को फरक्का लॉक गेट से आरंभ हुई इस कठिन जलयात्रा को उत्साह भरी तालियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न किया गया।
अभियान का विवरण और नेतृत्व
इस अभियान की कमान एक्सपीडिशन कमांडर संजीव शरण और सुरक्षा अधिकारी कमांडर मृण्मय घोष ने संभाली। व्हेलर नौकाएँ, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) का एक पोत और विशेष सुरक्षा नौकाएँ मिलकर हुगली नदी के रास्ते कोलकाता पहुंचीं। अभियान को पश्चिम बंगाल और सिक्किम डायरेक्टरेट के एनसीसी एडीजी मेजर जनरल ए.पी.एस. चहल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
सैकड़ों दर्शकों के बीच जब कैडेट्स ने अपने चप्पू थामे और किनारे लगाए, तो वरिष्ठ अधिकारियों और गर्व से भरे परिजनों ने करतल ध्वनि से उनका भव्य स्वागत किया।
'फ्लोटिंग क्लासरूम' — सामाजिक जागरूकता की अनूठी पहल
एक अधिकारी ने बताया कि 'हुगली संकल्प' महज एक साहसिक मिशन नहीं था — यह नागरिक-सैन्य तालमेल और युवा सशक्तिकरण का प्रतीक था। यात्रा के दौरान कैडेट्स ने एक 'फ्लोटिंग क्लासरूम' के रूप में काम करते हुए समुदायों के बीच पर्यावरण और नदी स्वास्थ्य से जुड़े कार्य किए।
अभियान में गंगा डॉल्फिन संरक्षण को बढ़ावा देना, पानी की शुद्धता की लाइव जांच, वर्षाजल संग्रह और कम लागत वाले शुद्धिकरण मॉडल का व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल था। कैडेट्स ने रुकने के हर पड़ाव पर मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग को प्रोत्साहित किया और 'नशा मुक्त भारत अभियान' में सहभागिता की अपील की।
स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता
अधिकारी के अनुसार, कैडेट्स ने स्थानीय समुदायों के साथ साइबर सुरक्षा के महत्व पर संवाद किया और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के तरीके साझा किए। उन्होंने ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) और उससे जुड़े सर्वाइकल कैंसर के खतरे पर भी जागरूकता फैलाई, तथा युवा लड़कियों के लिए टीकाकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
कैडेट्स ने बाल विवाह विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी की। भारत-बांग्लादेश सीमा पर जाकर कैडेट्स ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के जवानों से मुलाकात की और उनकी कलाइयों पर राखियाँ बाँधकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
जलमार्गों की संभावनाएँ और राष्ट्रीय महत्व
इस अभियान ने आईडब्ल्यूएआई के सहयोग से नेशनल वॉटरवे-1 (राष्ट्रीय जलमार्ग-1) की व्यापक संभावनाओं को उजागर किया। आंकड़ों के अनुसार, जलमार्ग परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में लागत में 50-60 प्रतिशत की बचत करता है, जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी है। गौरतलब है कि सरकार कार्गो ढुलाई के लिए जलमार्गों के विस्तार पर सक्रियता से विचार कर रही है।
कैडेट्स ने एनटीपीसी पावर प्लांट सहित कई ऐतिहासिक स्थलों का भी दौरा किया। यह अभियान इस मायने में उल्लेखनीय है कि इसने एनसीसी के साहसिक प्रशिक्षण को सामाजिक दायित्व और पर्यावरण चेतना से सफलतापूर्वक जोड़ा — एक ऐसा प्रयोग जो भविष्य के युवा नेतृत्व के लिए प्रेरणा बन सकता है।