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एनसीसी गर्ल्स ने 'अपराजिता-परांग ला 2026' में 30 दिन, 250 किमी बर्फीला सफर तय कर लद्दाख फतह किया

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एनसीसी गर्ल्स ने 'अपराजिता-परांग ला 2026' में 30 दिन, 250 किमी बर्फीला सफर तय कर लद्दाख फतह किया

सारांश

महज 16 से 19 वर्ष की उम्र की 28 एनसीसी बेटियों ने 5,578 मीटर ऊँचे परांग ला दर्रे को फतह कर 250 किमी का बर्फीला सफर 30 दिनों में पूरा किया। स्पीति से लद्दाख तक का यह अभियान साहस, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रमाण बन गया।

मुख्य बातें

28 एनसीसी महिला कैडेट्स ने 'अपराजिता-परांग ला 2026' अभियान के तहत 250 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी सफर 30 दिनों में पूरा किया।
अभियान का सबसे कठिन पड़ाव परांग ला दर्रा था, जो समुद्र तल से 5,578 मीटर (18,300 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है।
कैडेट्स की औसत आयु 19 वर्ष ; सबसे कम उम्र की प्रतिभागी 16 वर्ष 6 महीने की थी।
अभियान को 18 अगस्त 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली से रवाना किया था।
नेतृत्व थल सेना, नौसेना और वायु सेना की तीन महिला अधिकारियों ने किया।
समापन 16 सितंबर 2026 को लद्दाख के करजोक में हुआ; लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स ने दल का स्वागत किया।

राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की 28 महिला कैडेट्स ने 'अपराजिता-परांग ला 2026' अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी से लद्दाख के करजोक तक लगभग 250 किलोमीटर का बर्फीला और दुर्गम पहाड़ी सफर 30 दिनों में पूरा किया। 16 सितंबर 2026 को करजोक में अभियान के सफल समापन के साथ इन युवा कैडेट्स ने साहस और राष्ट्रीय एकता की एक नई मिसाल कायम की।

अभियान का मार्ग और चुनौतियाँ

अभियान का सबसे कठिन और निर्णायक पड़ाव परांग ला दर्रा था, जो समुद्र तल से 5,578 मीटर (लगभग 18,300 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है और देश के सबसे कठिन उच्च-ऊँचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों में गिना जाता है।

कैडेट्स ने किब्बर से अपनी यात्रा शुरू की और डुमला, थलटक, बोंगरोजेन, परांग ला दर्रा, डाक करजोंग, नोरबू सुमदो, कियांगडोम और कोरजोक से होते हुए करजोक तक पहुँचीं। इस पूरे मार्ग में ऊँचे पहाड़, ग्लेशियर, बर्फीले मैदान और नदी घाटियाँ शामिल थीं।

कैडेट्स की प्रोफाइल

देशभर से चुनी गई इन 28 एनसीसी महिला कैडेट्स की औसत आयु लगभग 19 वर्ष है। अभियान की सबसे कम उम्र की प्रतिभागी महज 16 वर्ष 6 महीने की थी। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आई इन कैडेट्स में से 20 ने परांग ला दर्रा पार किया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कठिन ऊँचाई और लगातार बदलते भूभाग के बीच कैडेट्स ने पूरे अनुशासन और मनोबल के साथ अपनी यात्रा जारी रखी।

नेतृत्व और समर्थन दल

इस अभियान की एक विशेष बात यह रही कि इसका नेतृत्व थल सेना, नौसेना और वायु सेना की तीन महिला अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया। उनके साथ अधिकारी, चिकित्सा दल, प्रशिक्षक और अन्य सहायता कर्मी भी तैनात रहे।

अभियान को 18 अगस्त 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

समापन समारोह और सरकारी प्रतिक्रिया

करजोक में आयोजित समापन समारोह में राष्ट्रीय कैडेट कोर के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स और रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला ने अभियान दल का स्वागत किया।

लेफ्टिनेंट जनरल वात्स ने कैडेट्स को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और कठिन परिस्थितियों में धैर्य विकसित करने में सहायक होती हैं।

आम जनता और युवाओं पर असर

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान केवल एक पर्वतीय यात्रा तक सीमित नहीं रहा — इसका उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना और उन्हें अत्यंत चुनौतीपूर्ण ऊँचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव देना था।

गौरतलब है कि विभिन्न राज्यों से आई कैडेट्स के एक साथ कठिन परिस्थितियों का सामना करने से उनके बीच सहयोग और राष्ट्रीय एकता की भावना और मज़बूत हुई। यह अभियान भविष्य में और अधिक युवतियों को ऐसे साहसिक कार्यक्रमों की ओर आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संरचनात्मक बदलाव है। हालाँकि, असली परीक्षा यह होगी कि ऐसे अभियान नियमित संस्थागत कार्यक्रम बनते हैं या केवल एकबारगी सुर्खी — क्योंकि साहस को निरंतरता चाहिए, सिर्फ उत्सव नहीं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'अपराजिता-परांग ला 2026' अभियान क्या है?
यह राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की महिला कैडेट्स का एक उच्च-ऊँचाई साहसिक अभियान है, जिसमें 28 कैडेट्स ने हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी से लद्दाख के करजोक तक लगभग 250 किलोमीटर का सफर 30 दिनों में पूरा किया। इसका सबसे कठिन पड़ाव 5,578 मीटर ऊँचा परांग ला दर्रा था।
परांग ला दर्रा कहाँ स्थित है और यह इतना कठिन क्यों है?
परांग ला दर्रा समुद्र तल से 5,578 मीटर (18,300 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है और हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है। यह देश के सबसे कठिन उच्च-ऊँचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों में गिना जाता है क्योंकि यहाँ ग्लेशियर, बर्फीले मैदान और नदी घाटियाँ एक साथ पार करनी पड़ती हैं।
इस अभियान में कौन शामिल थीं और उनकी उम्र क्या थी?
देशभर से चुनी गई 28 एनसीसी महिला कैडेट्स इस अभियान में शामिल थीं, जिनकी औसत आयु लगभग 19 वर्ष थी। सबसे कम उम्र की प्रतिभागी महज 16 वर्ष 6 महीने की थी, और अभियान का नेतृत्व तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों ने किया।
अभियान को किसने रवाना किया और इसका समापन कहाँ हुआ?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से इस अभियान को हरी झंडी दिखाई थी। अभियान का समापन 16 सितंबर 2026 को लद्दाख के करजोक में हुआ, जहाँ NCC महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स और रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला ने दल का स्वागत किया।
इस अभियान का उद्देश्य क्या था?
अभियान का मुख्य उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें अत्यंत चुनौतीपूर्ण ऊँचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव देना था। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों की कैडेट्स के बीच सहयोग और राष्ट्रीय एकता की भावना को मज़बूत करना भी इसका लक्ष्य था।
राष्ट्र प्रेस
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