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आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा 2026: 39 दिनों में 36,776 परमिट, पिछले पूरे सत्र का रिकॉर्ड टूटा

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आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा 2026: 39 दिनों में 36,776 परमिट, पिछले पूरे सत्र का रिकॉर्ड टूटा

सारांश

पिथौरागढ़ की आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा ने इस बार इतिहास रच दिया — मात्र 39 दिनों में 36,776 इनर लाइन परमिट जारी होकर पूरे 2025 सत्र का रिकॉर्ड टूट गया। बेहतर बुनियादी ढाँचे, सरल परमिट प्रक्रिया और PM मोदी के 2023 भ्रमण के बाद मिली राष्ट्रीय पहचान ने इस सुदूर सीमांत क्षेत्र को देश के प्रमुख आध्यात्मिक-पर्यटन गंतव्यों में स्थापित कर दिया है।

मुख्य बातें

आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा में मात्र 39 दिनों में 36,776 इनर लाइन परमिट (ILP) जारी हुए।
यह आँकड़ा वर्ष 2025 के पूरे यात्रा सत्र में जारी 36,526 परमिट के रिकॉर्ड को पार कर गया।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क, सरल परमिट प्रक्रिया और आवासीय सुधार इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
PM नरेंद्र मोदी का 2023 का आदि कैलाश भ्रमण, CM पुष्कर सिंह धामी का 2024 का योग कार्यक्रम और 2025 की अल्ट्रा मैराथन ने क्षेत्र की राष्ट्रीय पहचान बढ़ाई।
बढ़ती यात्री संख्या से स्थानीय होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और स्वरोज़गार को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश एवं ओम पर्वत यात्रा इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है — यात्रा आरंभ होने के मात्र 39 दिनों के भीतर ही इनर लाइन परमिट (ILP) जारी होने का आँकड़ा 36,776 तक पहुँच गया, जो वर्ष 2025 के पूरे यात्रा सत्र में जारी 36,526 परमिट के रिकॉर्ड को पार कर गया है। जिला प्रशासन के आँकड़ों के अनुसार यह वृद्धि देशभर के श्रद्धालुओं, पर्यटकों, ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों में इस तीर्थ-मार्ग के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

मुख्य घटनाक्रम

जिला प्रशासन के अनुसार, वर्ष 2025 के पूरे यात्रा सत्र में 36,526 ILP जारी हुए थे, जबकि इस वर्ष केवल 39 दिनों में ही 36,776 परमिट जारी हो चुके हैं। यह अंतर भले ही संख्यात्मक रूप से छोटा दिखे, परंतु तुलनात्मक समय-सीमा की दृष्टि से यह असाधारण उपलब्धि है — पिछले वर्ष का पूरा सत्र कई महीनों तक चला था।

गौरतलब है कि यह यात्रा उत्तराखंड के सुदूर सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से होकर गुज़रती है, जो भारत-चीन सीमा के निकट स्थित है। इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए ILP अनिवार्य है, जो इसे अन्य तीर्थ यात्राओं से अलग बनाता है।

बेहतर बुनियादी ढाँचे की भूमिका

जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने बताया कि बेहतर सड़क संपर्क, यात्री सुविधाओं के विस्तार, सरल परमिट प्रक्रिया तथा आवासीय व्यवस्थाओं में सुधार के कारण यात्रा में यह अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यात्रा में बढ़ती सहभागिता से स्थानीय व्यापार, परिवहन, होमस्टे, हस्तशिल्प और स्वरोज़गार गतिविधियों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को आर्थिक विकास के प्रमुख साधन के रूप में बढ़ावा दे रही है।

राष्ट्रीय पहचान में योगदान देने वाले मील के पत्थर

वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश भ्रमण ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित किया। इसके बाद वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आयोजित योग कार्यक्रम और वर्ष 2025 में आयोजित आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन ने इस गंतव्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह तीसरी बड़ी घटना है जिसने इस क्षेत्र की वैश्विक दृश्यता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

बढ़ती पर्यटक संख्या सीमांत क्षेत्र के लिए आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइड, परिवहन सेवाओं और हस्तशिल्प विक्रेताओं को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि यात्रियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और यादगार अनुभव प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं।

आगे की राह

यात्रा सत्र अभी जारी है और परमिट जारी होने की रफ़्तार बनी हुई है। यदि यही गति बरकरार रही, तो इस वर्ष का कुल आँकड़ा पिछले सभी सत्रों को बड़े अंतर से पीछे छोड़ सकता है। प्रशासन का ध्यान अब गुणवत्तापूर्ण यात्रा अनुभव और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित सॉफ्ट-पावर कूटनीति की भी कहानी है — PM मोदी के 2023 भ्रमण ने इस सुदूर सीमांत क्षेत्र को राष्ट्रीय चेतना में स्थापित किया, जो पहले मुख्यधारा की पर्यटन चर्चाओं में लगभग अनुपस्थित था। हालाँकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या मौजूदा बुनियादी ढाँचा इस तेज़ी से बढ़ती भीड़ को संभाल सकता है — विशेषकर जब यह क्षेत्र पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। पर्यटन की आर्थिक उपलब्धियाँ तभी टिकाऊ होंगी जब पर्यावरणीय वहन क्षमता को भी उतनी ही प्राथमिकता मिले जितनी परमिट संख्या को।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा 2026 में क्या रिकॉर्ड टूटा है?
वर्ष 2026 में यात्रा शुरू होने के मात्र 39 दिनों के भीतर 36,776 इनर लाइन परमिट (ILP) जारी हो गए, जो 2025 के पूरे यात्रा सत्र के 36,526 परमिट के रिकॉर्ड को पार कर गया। जिला प्रशासन के आँकड़ों के अनुसार यह इस यात्रा मार्ग का अब तक का सबसे तेज़ परमिट-वृद्धि रिकॉर्ड है।
आदि कैलाश यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट क्यों ज़रूरी है?
आदि कैलाश और ओम पर्वत पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र में भारत-चीन सीमा के निकट स्थित हैं, इसलिए वहाँ प्रवेश के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) अनिवार्य है। यह परमिट जिला प्रशासन द्वारा जारी किया जाता है और यात्रियों की संख्या की आधिकारिक निगरानी का माध्यम भी है।
इस वर्ष यात्रा में इतनी वृद्धि के क्या कारण हैं?
जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क, सरल परमिट प्रक्रिया, यात्री सुविधाओं का विस्तार और आवासीय व्यवस्थाओं में सुधार प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा PM मोदी का 2023 में आदि कैलाश भ्रमण, 2024 का योग कार्यक्रम और 2025 की अल्ट्रा मैराथन ने भी क्षेत्र को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
आदि कैलाश यात्रा से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?
बढ़ती यात्री संख्या से स्थानीय व्यापार, परिवहन, होमस्टे, हस्तशिल्प और स्वरोज़गार गतिविधियों को सीधा लाभ मिल रहा है। जिला प्रशासन इसे सीमांत क्षेत्र के पर्यटन, रोज़गार सृजन और आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत मान रहा है।
आदि कैलाश और ओम पर्वत कहाँ स्थित हैं और इनका धार्मिक महत्व क्या है?
आदि कैलाश और ओम पर्वत उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में स्थित हैं। आदि कैलाश को 'छोटा कैलाश' भी कहा जाता है और इसे भगवान शिव का निवास माना जाता है, जबकि ओम पर्वत पर प्राकृतिक रूप से बनी 'ॐ' आकृति इसे अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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