एनडीए नेताओं ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया, सहानुभूति जुटाने का प्रयास कर रही हैं
सारांश
Key Takeaways
- एनडीए नेताओं ने ममता बनर्जी पर सहानुभूति बटोरने का आरोप लगाया।
- भाजपा सांसदों का मानना है कि जनसमर्थन घट रहा है।
- ममता ने अमित शाह के बयान पर कड़ा जवाब दिया।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तीखी आलोचना की है। उनका आरोप है कि उनकी पार्टी का जनसमर्थन कम हो रहा है, जिससे वे चुनाव से पहले सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही हैं।
भाजपा के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल में सरकार के कार्यों का मूल्यांकन जनता ने स्वयं कर लिया है। अब लोग बदलाव की मांग कर रहे हैं, और ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर होती जा रही है।
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एक मुख्यमंत्री ही डर का माहौल बनाएगी, तो आम जनता का क्या होगा? उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कभी डर नहीं दिखाया और देश के लिए कार्य करती रहीं।
भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने आरोप लगाया कि जब सरकार ठीक से कार्य नहीं कर पाती, तब नेता भावनात्मक मुद्दों का सहारा लेते हैं। उनके अनुसार, जनता पहले ही बदलाव की तैयारी कर चुकी है, इसलिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि हर चुनाव में ममता बनर्जी किसी न किसी मुद्दे को उठाती हैं, लेकिन इस बार उनकी कोशिशें सफल नहीं होंगी।
उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने भी कहा कि ममता बनर्जी बिन वजह विवाद खड़ा कर रही हैं और वही लोग अब सम्मान की बात कर रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक जनता को परेशान किया।
इससे पहले, ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के "विक्टिम कार्ड" वाले बयान पर कड़ा जवाब दिया। यह बयान 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनके पैर में लगी चोट से संबंधित था। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी जान को खतरा हो सकता है।
पुरुलिया के मानबाजार में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली में ममता बनर्जी ने अमित शाह की आलोचना की। उन्होंने सरकार के खिलाफ जारी चार्जशीट पर कहा, "आप कौन होते हैं चार्जशीट देने वाले? असली चार्जशीट तो आपके खिलाफ होनी चाहिए।"
अमित शाह ने कहा था कि ममता बनर्जी विक्टिम कार्ड की राजनीति कर रही हैं। कभी वे चोट लगने की बात करती हैं, कभी सिर पर पट्टी बांधती हैं, कभी बीमार पड़ती हैं और कभी चुनाव आयोग की आलोचना करती हैं। उनके अनुसार, अब बंगाल की जनता यह सब समझ चुकी है।